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लखनऊ कैसे बनेगा स्मार्ट सिटी, जब अंधेरे में डूब जाती हैं ऐतिहासिक इमारतें, शाम-ए-अवध बनी गुमनामी का शिकार

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्मार्ट सिटी के सपने को लखनऊ विकास प्राधिकरण, नगर निगम और निर्माण निगम पूरा करने में असमर्थ हैं। इनकी अनदेखी की वजह से पूरे शहर में कीचड़ गड्ढे पाइप लाइन के नाम पर खुदी हुई सड़कें गलियों और रास्तों पर बदबू मारता हुआ कूड़ा लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाने में बाधा डाल रहा है।

By संतोष सिंह 
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लखनऊ।  यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्मार्ट सिटी के सपने को लखनऊ विकास प्राधिकरण, नगर निगम और निर्माण निगम पूरा करने में असमर्थ हैं। इनकी अनदेखी की वजह से पूरे शहर में कीचड़ गड्ढे पाइप लाइन के नाम पर खुदी हुई सड़कें गलियों और रास्तों पर बदबू मारता हुआ कूड़ा लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाने में बाधा डाल रहा है। साथ ही साथ पहले लखनऊ की जो ऐतिहासिक इमारतें रात होते ही जगमगाने लगती थी। अब वो ही इमारतें शाम होते ही अंधेरे में डूब जाती हैं।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पर्यटन विभाग के स्लोगन यूपी नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा की धज्जियां नगर निगम निर्माण निगम और लखनऊ विकास प्राधिकरण मिल कर उड़ा रहे हैं। रात होते ही अवध की पहचान रूमी गेट, घंटाघर, सतखंडा, बड़ा इमामबाड़ा, छोटा इमामबाड़ा, लखनऊ के शाही दरवाज़े अंधेरों में कहीं खो जाते हैं, जो सैलानी भारत के अलग-अलग राज्यों और विदेशों से लखनऊ की शाम यानी शाम ए अवध देखने निकलते हैं तो उन्हें लखनऊ की ऐतिहासिक इमारतें अंधेरे में डूबी हुई नज़र आती हैं।

गोमती पर बना हुआ पक्का पुल दिन के उजाले में सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करने के साथ-साथ पर्यटन विभाग को अपनी खूबसूरती बेजोड़ कारीगरी के दम पर फायदा पहुंचाते हैं। मगर अवध की शाम होते-होते हमारा वजूद अंधेरों के हवाले हो जाता है। कहीं ऐसा न हो कि शाम ए अवध भी गुमनामियों के अंधेरों में खो जाए।

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