इंसानियत: 12 साल के बच्चे की वतन वापसी के लिए एक हुए भारत-पाक

Pakistani family
इंसानियत: 12 साल के बच्चे की वतन वापसी के लिए एक हुए भारत-पाक

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने और घाटी को दो केन्द्र शासित प्रदेशों में बांटने के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव लगातार जारी है। हालांकि, इस तनातनी के बीच बीते दिनों अटारी बॉर्डर पर भारत-पाकिस्तान दोनों देशों की सरकारों ने एक 12 साल के बच्चे के लिए सारी दुश्मनी किनारे रखकर, कानून को दरकिनार करके इंसानियत को जीवंत कर दिया।

Humanity Indo Pak Reunited For The Return Of 12 Year Old Child :

जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान का 12 साल का बच्चा साबीह सिराज हार्ट की सर्जरी के लिए पिछले महीने नोएडा के जेपी अस्पताल आया था। साबीह का ​परिवार कराची में रहता है। साबीह 18 फरवरी को वह अपने माता-पिता के साथ नोएडा पहुंचा। 25 फरवरी को उसी सफल सर्जरी हुई। 16 मार्च तक ऑब्जर्वेशन के लिए साबीह को अस्पताल में ही रखा गया। 18 मार्च को जेपी अस्पताल से साबीह को छुट्टी दे दी गई। उसके बाद तीनों अस्पताल से अटारी बॉर्डर पहुंचे। लेकिन अटारी से पाकिस्तान पहुंचने में साबीह और उनके परिवार को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

साबीह के पिता सिराज अरशद ने सीमा पार जाने के लिए भारतीय इमिग्रेशन अधिकारियों से काफी गुजारिश की, लेकिन कामयाब नहीं हो सके। शिराज ने बताया कि बॉर्डर क्रॉस करने के लिए मैंने अधिकारियों से काफी मदद मांगी। मैंने उन्हें अपने बेटे की हार्ट सर्जरी के बारे में भी बताया, लेकिन उन्होंने मेरी एक बात भी नहीं मानी। क्योंकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने 40 कश्मीरी लड़कियों को भारत भेजने से मना कर दिया था।

अटारी बॉर्डर पर मौजूद भारतीय सुरक्षा अधिकारी ने सिराज को पाकिस्तान के इमिग्रेशन अधिकारियों से बात करने का सुझाव दिया, लेकिन वहां भी बात नहीं बन सकी। इसी बीच सिराज ने पाकिस्तान के एक मीडियाकर्मी से बात करके अपनी समस्या बताई। पाकिस्तानी पत्रकार ने अमृतसर मे रहने वाले अपने एक पत्रकार मित्र से बात कर साबीह और उसके परिवार के मदद करने का अनुरोध किया।

इसके बाद भारतीय पत्रकार ने अटारी बॉर्डर पर फंसे साबीह के परिवार की मदद के लिए भारतीय अधिकारियों से बात की। दूसरी ओर पाकिस्तानी पत्रकार ने भी पाकिस्तान के विदेश सचिव सोहैल महमूद से बात कर साबीह के बारे में बताया। उसके बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग को निर्देश दिया कि वे पाकिस्तानी परिवार की वापसी के लिए तुरंत भारतीय अधिकारियों से संपर्क करें। पाकिस्तानी उच्चायोग के अनुरोध पर भारतीय अधिकारियों ने सीमा पार करने के लिए साबीह और उसके परिवार के लिए स्पेशल पास जारी किया।

साबीह के पिता सिराज अरशद ने गुरुवार की रात बताया कि भारतीय अधिकारियों ने हमें प्रोटोकॉल के साथ सीमा पार भेजा। सिराज ने मुश्किल वक्त में मदद करने के लिए भारतीय पत्रकार और अधिकारियों का शुक्रिया अदा भी किया। उन्होंने कहा, ‘हम बहुत चिंतित थे। लेकिन भारतीय और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच आपसी सहयोग की वजह से हम अपने घर जा सके। मैं सभी का आभारी हूं। डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और अस्पताल प्रबंधन ने हमारे साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया। हम 20 दिनों तक भारत में रहे और यहां सभी से हमें प्यार और सहयोग मिला।

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने और घाटी को दो केन्द्र शासित प्रदेशों में बांटने के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव लगातार जारी है। हालांकि, इस तनातनी के बीच बीते दिनों अटारी बॉर्डर पर भारत-पाकिस्तान दोनों देशों की सरकारों ने एक 12 साल के बच्चे के लिए सारी दुश्मनी किनारे रखकर, कानून को दरकिनार करके इंसानियत को जीवंत कर दिया। जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान का 12 साल का बच्चा साबीह सिराज हार्ट की सर्जरी के लिए पिछले महीने नोएडा के जेपी अस्पताल आया था। साबीह का ​परिवार कराची में रहता है। साबीह 18 फरवरी को वह अपने माता-पिता के साथ नोएडा पहुंचा। 25 फरवरी को उसी सफल सर्जरी हुई। 16 मार्च तक ऑब्जर्वेशन के लिए साबीह को अस्पताल में ही रखा गया। 18 मार्च को जेपी अस्पताल से साबीह को छुट्टी दे दी गई। उसके बाद तीनों अस्पताल से अटारी बॉर्डर पहुंचे। लेकिन अटारी से पाकिस्तान पहुंचने में साबीह और उनके परिवार को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। साबीह के पिता सिराज अरशद ने सीमा पार जाने के लिए भारतीय इमिग्रेशन अधिकारियों से काफी गुजारिश की, लेकिन कामयाब नहीं हो सके। शिराज ने बताया कि बॉर्डर क्रॉस करने के लिए मैंने अधिकारियों से काफी मदद मांगी। मैंने उन्हें अपने बेटे की हार्ट सर्जरी के बारे में भी बताया, लेकिन उन्होंने मेरी एक बात भी नहीं मानी। क्योंकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने 40 कश्मीरी लड़कियों को भारत भेजने से मना कर दिया था। अटारी बॉर्डर पर मौजूद भारतीय सुरक्षा अधिकारी ने सिराज को पाकिस्तान के इमिग्रेशन अधिकारियों से बात करने का सुझाव दिया, लेकिन वहां भी बात नहीं बन सकी। इसी बीच सिराज ने पाकिस्तान के एक मीडियाकर्मी से बात करके अपनी समस्या बताई। पाकिस्तानी पत्रकार ने अमृतसर मे रहने वाले अपने एक पत्रकार मित्र से बात कर साबीह और उसके परिवार के मदद करने का अनुरोध किया। इसके बाद भारतीय पत्रकार ने अटारी बॉर्डर पर फंसे साबीह के परिवार की मदद के लिए भारतीय अधिकारियों से बात की। दूसरी ओर पाकिस्तानी पत्रकार ने भी पाकिस्तान के विदेश सचिव सोहैल महमूद से बात कर साबीह के बारे में बताया। उसके बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग को निर्देश दिया कि वे पाकिस्तानी परिवार की वापसी के लिए तुरंत भारतीय अधिकारियों से संपर्क करें। पाकिस्तानी उच्चायोग के अनुरोध पर भारतीय अधिकारियों ने सीमा पार करने के लिए साबीह और उसके परिवार के लिए स्पेशल पास जारी किया। साबीह के पिता सिराज अरशद ने गुरुवार की रात बताया कि भारतीय अधिकारियों ने हमें प्रोटोकॉल के साथ सीमा पार भेजा। सिराज ने मुश्किल वक्त में मदद करने के लिए भारतीय पत्रकार और अधिकारियों का शुक्रिया अदा भी किया। उन्होंने कहा, 'हम बहुत चिंतित थे। लेकिन भारतीय और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच आपसी सहयोग की वजह से हम अपने घर जा सके। मैं सभी का आभारी हूं। डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और अस्पताल प्रबंधन ने हमारे साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया। हम 20 दिनों तक भारत में रहे और यहां सभी से हमें प्यार और सहयोग मिला।