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औरैया में इंसानियत हुई शर्मसार, शवों के साथ ‘ज़िंदा इंसान’

By टीम पर्दाफाश 
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लखनऊ: कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी के चलते लॉकडाउन के मुश्किल समय में मजदूरों की बेबस तस्वीरें हैरान करने वाली है। वहीं तमाम दावों के बाद भी सरकारी अमला अक्सर अमानवीय व्यवहार करता नज़र आ ही जाता है। ऐसे ही एक घटना सामने आई जिसने सरकार के तमाम दावों और मानवीय चेहरे को शर्मशार किया है। यूपी के औरैया में सड़क हादसे का शिकार हुए झारखंड के मजदूरों की एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। जिसने सरकारी महकमे के तमाम दावों की पोल खोल दी है।

बता दें सड़क हादसे में मारे गए मजदूरों के शव जिस ट्रक पर रखकर झारखंड के बोकारो भेजे जा रहे थे।उसी ट्रक पर शवों के साथ ही हादसे में घायल हुए मजदूरों को भी बिठा दिया गया था। शवों से आ रही तेज़ दुर्गंध के बीच बिठाए गए घायलों की तस्वीर को जब झारखण्ड के सीएम हेमंत सोरेन ने ट्वीट करते हुए अपने राज्य के अफसरों को शवों और घायलों को सम्मान देने को कहा । जिसके बाद यूपी का सरकारी अमला हरकत में आई । आनन फानन में बोकारो जाने वाले ट्रक के साथ ही झारखंड व वेस्ट बंगाल जाने वाले दो ट्रकों को प्रयागराज में दिल्ली हावड़ा नेशनल हाइवे पर रोका गया।

करीब डेढ़ घंटे इंतजार के बाद सरकारी अमले ने वहां एम्बुलेंस और शव वाहनों का इंतजाम कराया। बोकारो जा रहे जिस ट्रक पर आठ शवों के साथ तीन मजदूरों को बिठाए जाने की तस्वीर वायरल हुई थी। उसके साथ के बाकी दोनों ट्रकों को भी प्रयागराज के नवाबगंज इलाके में NH- 2 पर रोक लिया गया। किसी को जानकारी न हो इसके लिए आने जाने के रास्ते को ब्लाक कर दिया गया। पुलिस के आलाधिकारियों ने शवों को तीन अलग – अलग जगह जाने वाले शव वाहनों में शिफ्ट कर दिया।

वहीं तीन घायलों को एम्बुलेंस में शिफ्ट कराया। जानकारी के मुताबिक़ रविवार की रात शव वाहनों व एम्बुलेंस को आगे के लिए रवाना कर दिया गया। एक ट्रक के ड्राइवर राजेश ने बगैर कैमरे के बातचीत में बताया कि शवों से इतनी दुर्गंध आ रही थी कि आगे भी बैठना मुश्किल हो रहा था। औरैया से चलने के बाद जब उन्हें घायलों के बारे में एहसास हुआ तो उन्होंने मानवीयता दिखाते हुए घायलों को अपने वाहनों की आगे की केबिन में बिठा लिया। कहा जा सकता है कि औरैया का हादसा जितना दर्दनाक था। उससे ज़्यादा अमानवीय सरकारी अमले की यह हरकत थी।

वहीं औरैया हादसे के शवों के साथ ही ट्रकों में घायल कामगारों और उनके परिजनों को भेजे जाने के मामले में आईजी प्रयागराज जोन के पी सिंह का कहना है कि शासन से जानकारी मिलने के बाद ट्रकों को नवाबगंज में रोककर एम्बुलेंस में शिफ्ट कराकर उन्हें आगे के लिए रवाना किया गया है। उन्होंने कहा है कि हादसा औरैया जिले में हुआ था। कहा की छोटा जिला होने की वजह से औरैया में एंबुलेंस की व्यवस्था प्रशासन नहीं कर पाया था।

जिसके चलते तीन डीसीएम ट्रकों से शवों को और कुछ घायलों व परिजनों को पश्चिम बंगाल और झारखंड भेजा जा रहा था। लेकिन इसकी सूचना जब शासन से जिला प्रशासन और पुलिस को मिली उसके बाद नवाबगंज हाईवे पर ट्रकों को रोका गया। तीन डीसीएम ट्रकों में कुल 17 कामगारों के शव भेजे जा रहे थे। छह पश्चिम बंगाल पुरुलिया के थे जबकि 11 शव बोकारो झारखंड के कामगारों के थे। आईजी के मुताबिक पहले कौशाम्बी में शवों को रखने के लिए वर्फ की व्यवस्था करायी गई। उसके बाद ट्रकों के नवाबगंज पहुंचने पर सभी शवों और उनके परिजनों को पूरे सम्मान के साथ छह एसी एंबुलेंस के जरिए आगे के लिए रवाना कर दिया गया है। परिजनों को एम्बुलेंस में ड्राइवर के साथ आगे बैठाकर रवाना किया गया है। आईजी के मुताबिक इस कार्रवाई को पूरा करने में डेढ़ से दो घंटे का समय लगा था। जिसके बाद पुलिस के वाहन से एस्कार्ट करते हुए एम्बुलेंस को रवाना कर दिया गया है और इसकी सूचना शासन को भी दे दी गई है।

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