परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह पर भारी प्रमुख सचिव आराधना शुक्ला

लखनऊ। कहते हैं कि सरकारें आतीं हैं चली जातीं हैं, लेकिन नौकरशाह वही रहते हैं। असल सरकार और उसके महकमे यही नौकरशाह चलाते हैं, ऐसा ही कुछ यूपी परिवहन​ विभाग में देखने को मिला रहा है। जहां परिवहन विभाग के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के फैसलों पर विभाग की प्रमुख सचिव आराधना शुक्ला की मनमर्जी भारी पड़ रही है।
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पिछले महीने ही भ्रष्टाचार के आरोप में चंदौली के अरबपति एआरटीओ आरएस यादव की गिरफ्तारी के बाद एक टीवी चैनल ने खबर चलाई कि यूपी के परिवाहन मंत्री पर परिवहन आयुक्त हावी हैं। यह बात सही भी है क्योंकि परिवहन आयुक्त ही तय करता है कि किस अफसर को ​कौन से जिले का आरटीओ और एआरटीओ बनाना है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो मंत्री के बाद परिवहन आयुक्त ही विभाग का सर्वेसर्वा रहता है, जबकि प्रमुख ​सचिव की भूमिका नाम मात्र की होती है।

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जिसके बाद चैनल की खबर पर असर करवाते हुए प्रमुख सचिव परिवहन आराधना शुक्ला ने मंत्री जी को समझाकर तत्कालीन परिवहन आयुक्त का तबादला आजमगढ़ के कमिश्नर की पोस्ट पर करवा दिया। कहा जाता है कि पूर्व परिवहन आयुक्त और प्रमुख सचिव के बीच बनती नहीं थी। मौके को भांपते हुए प्रमुख सचिव ने अपनी गुडविल वाले अफसर को परिवहन आयुक्त नियुक्त करवा लिया। अब परिवहन विभाग में आराधना शुक्ला की तूती बोल रही है। नए परिवहन आयुक्त उनके इशारे पर काम कर रहे हैं तो मंत्री जी उनके फैसलों के साथ खड़े हैं।

सूत्रों की माने तो नए परिवहन आयुक्त की तैनाती के साथ आरटीओ और एआरटीओ के तबादलों की तैयारी शुरू हो चुकी है। इसके लिए अनुराधा शुक्ला एक गुड लिस्ट तैयार करवा रहीं हैं। यह खबर मिलते ही तमाम आरटीओ और एआरटीओ लखनऊ पहुंचकर इस लिस्ट में अपना नाम सबसे ऊपर दर्ज करवाने की कोशिश में लगे हैं।

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आपको बता दें कि अनुराधा शुक्ला एक तेजतर्रार सीनियर आईएएस है और एनआरएचएम घोटाले की सीबीआई जांच में पद के दुर्उपयोग और भ्रष्टाचार दोषी पाए गए आईएएस प्रदीप शुक्ला की पत्नी है।

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