यूपी के पूर्व IAS ने जारी की दस सालों के घोटालों की लिस्ट

लखनऊ। प्रदेश सरकारों के संरक्षण में हुए भ्रष्टाचारों को लेकर मुखर रहे यूपी के पूर्व आईएएस अफसर सूर्य प्रताप सिंह ने रविवार को दो पूर्व मुख्यमंत्रियों यानी मायावती और अखिलेश यादव के कार्यकाल में हुए 38 घोटालों की लिस्ट जारी की है। सिंह इन तमाम घोटालों की सीबीआई
जांच करवाने के पक्षधर हैं।



आपको बता दें कि सूर्य प्रताप सिंह ने नौकरी में रहते अखिलेश सरकार के कृपापात्र रहे यूपी राज्य सेवा आयोग के अध्यक्ष डा0 अनिल यादव के कारनामों का सोशल मीडिया के माध्यम से विरोध शुरू किया था। जिसके बाद वह उन्होने अनिल यादव के खिलाफ शुरू की अपनी मुहिम को आगे बढ़ाने के आड़े आई अपनी नौकरी से वीआरएस ले लिया था। उसके बाद मीडिया में सूर्य प्रताप सिंह ने सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज को बुलंद करना शुरू कर दिया था।




सूर्य प्रताप सिंह के मुताबिक यूपी में गत् 10 वर्षों में निम्न घोटाले को अंजाम दिया गया, जिनकी जांच सीबीआई से करवाई जानी चाहिए—

  • 2 लाख करोड़ का भ्रष्टाचार नोएडा/ग्रेटर नोएडा/ यमुना एक्सप्रेस वे अथॉरिटी/UDSIDC/GDA/LDA तमाम विकास प्राधिकरणों/ आवास विकास परिषद में पिछले 10 वर्षों के भूमि आवंटन,एफ़एआर परिवर्तन, ब्याज माफ़ी,भू उपयोग परिवर्तन, ठेके, टेंडर, संस्थानों को सस्ती भूमि देना, मेट्रो , 1 करोड़ से बड़े निर्माण कार्य, नॉएडा इक्स्टेन्शन व बड़े बिल्डर्ज़ के नक़्शे पास करने में अनियमिततायें, ग्रीन बेल्ट पर क़ब्ज़े, भू अधिग्रहण व मुआवज़े वितरण, इन्स्टिटूशनल ऋण आदि में हुआ है।
  • 30,000 करोड़ का भ्रष्टाचार लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे में।
  • 1550 करोड़ का भ्रष्टाचार गोमती रिवर फ़्रंट प्रोजेक्ट में।
  • चीनी मिलों की बिक्री व चीनी मिल संघ में भर्ती घोटाला, शीरा व बगास क्रय/विक्रय आदि में भ्रष्टाचार।
  • UPPSC व अन्य भर्ती आयोगों के घोटाले।
  • 700 करोड़ का भ्रष्टाचार मिडडे मील और पंजीरी ठेके में।
  • 16000 करोड़ प्रति वर्ष के हिसाब से आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार।
  • 50,000 करोड़ का खनन का भ्रष्टाचार ।
  • 25,000 करोड़ का भ्रष्टाचार मंडी समिति के निर्माण कार्य में।
  • 5,000 करोड़ का भ्रष्टाचार — नक़ल का धंधा, बोर्ड द्वारा द्वारा करायी प्रंटिंग, किताब व अन्य ख़रीदारी, सर्व शिक्षा अभियान के निर्माण कार्य, लैपटॉप ख़रीद।
  • समाज कल्याण विभाग का छात्रवृत्ति घोटाला
  • 50,000 करोड़ के घोटाले आवास विभाग द्वारा बड़े बिल्डर्स को किए गए भूमि आवंटन व बिल्डर्स की अनियमित्ताऐं छुपाने में।
  • पिछले 10 वर्षों में 2 लाख करोड़ का घोटाला बिजली विभाग में ख़रीदारी व निर्माण कार्यों के नाम पर हुआ।
  • 25,000 करोड़ का भ्रष्टाचार लोक निर्माण विभाग /सिंचाई/लघु सिंचाई विभागों के निर्माण कार्यों में।
  • पंचायती राज विभाग के निर्माण कार्य
  • 50,000 करोड़ के घोटाले चिकित्सा विभाग/ एनआरएचएम में पुनः हुए घोटाले-दवा व उपकरण ख़रीद, ऐम्ब्युलन्स सेवा, बिल्डिंग निर्माण आदि में।
  • फ़र्ज़ी वृक्षारोपण घोटाला।
  • सचिवालय में स्टेशनेरी ख़रीद घोटाला।
  • यूपी पथ परिवहन निगम में बस ख़रीद घोटाला, परिवहन विभाग में ओवर लोडिंग टोकन सिस्टम के माध्यम से भ्रष्टाचार।
  • फ़िल्म निर्माण अनुदान घोटाला।
  • निर्माण एजेंसियों-राजकीय निर्माण निगम, ब्रिज कॉर्परेशन, RES, PWD, सहकारी संघ, समाज कल्याण निगम,जल निगम/जल संस्थान के द्वारा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जाँच।
  • Outsourcing के माध्यम से की जा रही भर्तियों में घोटाला।
  • प्रदेश में विभिन्न दरों पर साइकिल ट्रैक निर्माण।
  • ग़ाज़ियाबाद के हज हाउस निर्माण में भ्रष्टाचार।
  • मनेरेगा फ़र्ज़ी मस्टर रोल घोटाला।
  • नई नहरों का निर्माण/ डेम के निर्माण और पुरानी नहरों और डेम की सफ़ाई में भ्रष्टाचार।
  • लघु सिंचाई का चेक डेम घोटाला।
  • कृषि बीज ख़रीदारी में भ्रष्टाचार।
  • नए विमान ख़रीद में भ्रष्टाचार।
  • प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी होने वाली अनापत्तियों में भ्रष्टाचार।
  • पशुधन विभाग की भर्तियों में भ्रष्टाचार।
  • सहकारिता विभाग व बैंक की भर्ती व ऋण वितरण में भ्रष्टाचार।
  • सरकारी भवनों पर क़ब्ज़े व आवंटन।
  • प्रदेश में सरकारी व ग़ैर सरकारी जमीनों पर सपा के गुंडों द्वारा किए गए क़ब्ज़े।
  • प्रदेश में ग़ायब हुए हज़ारों बच्चे व महिलाएं।
  • सांसद व विधायक निधि व सरकार द्वारा से प्राइवेट संस्थाओं को दिया गया धन-अमानत में खयानत के घोटाले।
  • 860 का जय प्रकाश नारायण अन्तराष्ट्रीय केन्द्र(जेपी सेन्टर), चक गंजरिया सिटी, जनेश्वर मिश्र पार्क तथा पुराने लखनऊ के सुन्दरीकरण में घोटाले।
  • सैफ़ई गाँव के लिए हुए करीब 20,000 करोड़ के विकास कार्यों में घोटाले।

इस लिस्ट को जारी करने वाले सूर्य प्रताप सिंह का दावा है कि अगर इन तमाम मामलों में सीबीआई जांच करवाई जाए तो कई बड़े नेता और नौकरशाह तो जेल जाएँगे। जिनमें मुलायम सिंह यादव, मायावती और अखिलेश यादव के परिवार के लोग व करीबी भी शामिल होंगे।