टेलीफोन पाबंदिया न होती तो जम्मू-कश्मीर में कुर्बान होती कई जिंदगियां: सत्यपाल मलिक

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टेलीफोन पाबंदिया न होती तो जम्मू-कश्मीर में कुर्बान होती कई जिंदगियां: सत्यपाल मलिक

नई दिल्ली। जम्मू—कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने रविवार को कहा कि प्रदेश में दवाओं की कोई कमी नहीं है। वहीं टेलीफोन पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर उन्होने कहा कि अगर ऐसा न किया जाता तो घाटी में कई जिंदगियां कुर्बान होतीं। इसे समाज के हित का फैसला करार देते हुए कहा कि यहां धारा 370 समाप्त होने के बाद भी एक भी जिंदगी नहीं गई है।

If There Were No Telephone Restrictions Many Lives Would Have Been Sacrificed In Jammu And Kashmir Says Satyapal Malik :

इस कार्यक्रम में मौजूद पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि राज्य में प्रतिबंध कब तक जारी रहेंगे, उन्होंने कहा, “अगर संचार माध्यमों पर अंकुश लगाने से जिंदगी बचाने में मदद मिलती है तो इसमें क्या नुकसान है?” उन्होने याद दिलाया कि इससे पहले जब भी घाटी में कोई दिक्कत होती थी तो सप्ताह भर में दर्जनों लोगों की जान चली जाती थी।

उन्होंने कहा, “हमारा रवैया था कि इंसानी जान नहीं जानी चाहिए। 10 दिन टेलीफोन नहीं होंगे, नहीं होंगे, लेकिन हम बहुत जल्द सब वापस कर देंगे।” दवाईयों की कमी से इंकार करते हुए उन्होने कहा कि “वास्तव में, ईद में हमने लोगों के घरों पर मीट, सब्जियों और अंडों की आपूर्ति की।”

बता दें कि सत्यपाल मलिक अरुण जेटली को श्रद्धांजलि देने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में थे। उन्हे याद करते हुए मलिक ने कहा कि वह जेटली ही थे जिन्होंने पिछले साल जम्मू कश्मीर के राज्यपाल की जिम्मेदारी लेने के लिए उन पर जोर डाला था। उन्होंने कहा, “अरुण जेटली ने मुझे सलाह दी थी कि मैं राज्यपाल की जिम्मेदारी लूं। उन्होंने मुझसे कहा कि यह ऐतिहासिक होगा। उन्होंने मुझसे यह भी कहा कि उनकी ससुराल के लोग जम्मू से हैं।”

नई दिल्ली। जम्मू—कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने रविवार को कहा कि प्रदेश में दवाओं की कोई कमी नहीं है। वहीं टेलीफोन पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर उन्होने कहा कि अगर ऐसा न किया जाता तो घाटी में कई जिंदगियां कुर्बान होतीं। इसे समाज के हित का फैसला करार देते हुए कहा कि यहां धारा 370 समाप्त होने के बाद भी एक भी जिंदगी नहीं गई है। इस कार्यक्रम में मौजूद पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि राज्य में प्रतिबंध कब तक जारी रहेंगे, उन्होंने कहा, “अगर संचार माध्यमों पर अंकुश लगाने से जिंदगी बचाने में मदद मिलती है तो इसमें क्या नुकसान है?” उन्होने याद दिलाया कि इससे पहले जब भी घाटी में कोई दिक्कत होती थी तो सप्ताह भर में दर्जनों लोगों की जान चली जाती थी। उन्होंने कहा, “हमारा रवैया था कि इंसानी जान नहीं जानी चाहिए। 10 दिन टेलीफोन नहीं होंगे, नहीं होंगे, लेकिन हम बहुत जल्द सब वापस कर देंगे।” दवाईयों की कमी से इंकार करते हुए उन्होने कहा कि “वास्तव में, ईद में हमने लोगों के घरों पर मीट, सब्जियों और अंडों की आपूर्ति की।” बता दें कि सत्यपाल मलिक अरुण जेटली को श्रद्धांजलि देने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में थे। उन्हे याद करते हुए मलिक ने कहा कि वह जेटली ही थे जिन्होंने पिछले साल जम्मू कश्मीर के राज्यपाल की जिम्मेदारी लेने के लिए उन पर जोर डाला था। उन्होंने कहा, “अरुण जेटली ने मुझे सलाह दी थी कि मैं राज्यपाल की जिम्मेदारी लूं। उन्होंने मुझसे कहा कि यह ऐतिहासिक होगा। उन्होंने मुझसे यह भी कहा कि उनकी ससुराल के लोग जम्मू से हैं।”