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डिप्रेशन ने ली सुशांत सिंह राजपूत की जान, जाने तनाव और दुख दूर करने के तरीके

If You Are In Trouble Do This 2

By आस्था सिंह 
Updated Date

लखनऊ। सुख और दुख दोनों ही जीवन का हिस्सा है। दुख और आघात सभी की जिन्दगी में आते रहते हैं। अगर ये कहा जाए कि दु:ख भी जीवन का एक हिस्सा है तो इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है। लेकिन कुछ खास बातों का ध्यान रखते हुए जीवन की दुखद परिस्थितियों को आसान बनाया जा सकता है। आज हम आपको बतायेंगे जब भी जीवन में कोई दु:ख या परेशानी आए तो क्या करना चाहिए।

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  • सबसे पहले तो ये कोशिश करिए ये दु:ख या परेशानी अल्पकालीन रहें, जितनी जल्दी हो इन्हें विदा कर दीजिए। इनका टिकना खतरनाक है। क्योंकि ये दोनों स्थितियां जीवन का नकारात्मक पक्ष है। यहीं से तनाव का आरम्भ होता है।
  • तनाव यदि अल्पकालीन है तो उसमें से सृजन किया जा सकता है। रचनात्मक बदलाव के सारे मौके कम अवधि के तनाव में बने रहते हैं। लेकिन लम्बे समय तक रहने पर यह तनाव और उदासी आगे जाकर अवसाद यानी डिप्रेशन में बदल जाती है।
  • कुछ लोग ऐसी स्थिति में ऊपरी तौर पर अपने आपको उत्साही बताते हैं, वे खुश रहने का दिखावा करते हैं और कुछ लोग इस कदर डिप्रेशन में डूब जाते हैं कि लोग उन्हें पागल करार कर देते हैं।
  • पैदा होने पर मान लेते हैं बस अब जिन्दगी कट जाएगी, लेकिन जन्म और जीवन अलग-अलग मामला है। जन्म एक घटना है और उसके साथ जो सम्भावना हमें मिली है उस सम्भावना के सृजन का नाम जीवन है।
  • हर व्यक्ति से प्रेम से मिलें क्यों न वह गुस्से वाला आदमी हो।
  • अपनी जरूरतों को प्राथमिकता दें।
  • जहां नकारात्मक विचार वाले लोग हों उनसे दूर रहें।

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