प्रेगनेंसी में थायराइड हो जाए तो मिलते हैं कुछ इस तरह के संकेत

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लखनऊ: प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में शिशु के मस्तिष्‍क और तंत्रिका तंत्र के विकास के लिए थायराइड हार्मोन विशेष तौर पर जरूरी होता है। शिशु हार्मोंस पर ही निर्भर करता है जो कि उसे प्‍लेसेंटा के जरिए मिलते हैं। प्रेगनेंसी के 12वें हफ्ते तक भ्रूण का अपनी थायराइड ग्रंथि खुद अपने थायराइड हार्मोन बनाना शुरू कर देती है।

If You Get A Thyroid In Pregnancy You Get Some Such Signs :

गर्भावस्‍था में हाइपरथायराइडिज्‍म के लक्षण

गर्भावस्‍था में होने वाली समस्‍याओं की तरह ही हायपरथायरा‍इडिज्‍म के लक्षण हो सकते हैं जैसे कि हार्ट रेट बढ़ना, गर्मी ज्‍यादा लगना और थकान। इसके अलावा दिल की धड़कन अनियमित होना, बेचैनी बढ़ना, मतली और उल्‍टी गंभीर रूप से होना, हाथ कंपकपाना, नींद आने में दिक्‍कत होना और वजन कम या बढ़ना भी प्रेगनेंसी में हायपरथायराइडिज्‍म के संकेत हो सकते हैं।

प्रेगनेंसी में हाइपोथायराइड के संकेत
हाइपोथायराइड में बहुत ज्‍यादा थकान और वजन बढ़ने की शिकायत होती है। इसमें कब्‍ज, ध्‍यान लगाने में दिक्‍कत या याददाश्‍त से जुड़ी परेशानियां, ठंड ज्‍यादा लगना और मांसपेशियों में ऐंठन भी शामिल है।

क्‍या हाइपोथायराइड भ्रूण को नुकसान पहुंचाता है
यदि हाइपोथायराडिज्‍म का इलाज न करवाया जाए और ये गंभीर स्थिति में पहुंच जाए तो इसकी वजह से डिलीवरी के बाद बच्‍चे के विकास में देरी हो सकती है। ऐसा उन महिलाओं में ज्‍यादा होता है जिनके शरीर में आयोडीन की कमी होती है।
कुछ अध्‍ययनों का मानना है कि हाइपोथायराइड के हल्‍के मामलों का इलाज न करने पर भी भ्रूण के मस्तिष्‍क का विकास प्रभावित हो सकता है।

लखनऊ: प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में शिशु के मस्तिष्‍क और तंत्रिका तंत्र के विकास के लिए थायराइड हार्मोन विशेष तौर पर जरूरी होता है। शिशु हार्मोंस पर ही निर्भर करता है जो कि उसे प्‍लेसेंटा के जरिए मिलते हैं। प्रेगनेंसी के 12वें हफ्ते तक भ्रूण का अपनी थायराइड ग्रंथि खुद अपने थायराइड हार्मोन बनाना शुरू कर देती है। गर्भावस्‍था में हाइपरथायराइडिज्‍म के लक्षण गर्भावस्‍था में होने वाली समस्‍याओं की तरह ही हायपरथायरा‍इडिज्‍म के लक्षण हो सकते हैं जैसे कि हार्ट रेट बढ़ना, गर्मी ज्‍यादा लगना और थकान। इसके अलावा दिल की धड़कन अनियमित होना, बेचैनी बढ़ना, मतली और उल्‍टी गंभीर रूप से होना, हाथ कंपकपाना, नींद आने में दिक्‍कत होना और वजन कम या बढ़ना भी प्रेगनेंसी में हायपरथायराइडिज्‍म के संकेत हो सकते हैं। प्रेगनेंसी में हाइपोथायराइड के संकेत हाइपोथायराइड में बहुत ज्‍यादा थकान और वजन बढ़ने की शिकायत होती है। इसमें कब्‍ज, ध्‍यान लगाने में दिक्‍कत या याददाश्‍त से जुड़ी परेशानियां, ठंड ज्‍यादा लगना और मांसपेशियों में ऐंठन भी शामिल है। क्‍या हाइपोथायराइड भ्रूण को नुकसान पहुंचाता है यदि हाइपोथायराडिज्‍म का इलाज न करवाया जाए और ये गंभीर स्थिति में पहुंच जाए तो इसकी वजह से डिलीवरी के बाद बच्‍चे के विकास में देरी हो सकती है। ऐसा उन महिलाओं में ज्‍यादा होता है जिनके शरीर में आयोडीन की कमी होती है। कुछ अध्‍ययनों का मानना है कि हाइपोथायराइड के हल्‍के मामलों का इलाज न करने पर भी भ्रूण के मस्तिष्‍क का विकास प्रभावित हो सकता है।