आईआईटी कानपुर ने 60 छात्रों को निकाला, 38 निलंबित

कानपुर। देश के जाने माने शैक्षणिक संस्थानों में से एक आईआईटी कानपुर ने अपने 60 पीएचडी स्कालर्स सहित 98 छात्रों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। निष्कासित होने वाले इन छात्रों पर आरोप है कि ये संस्थान के मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे थे और अपनी पढ़ाई को बीच में ही छोड़ चुके है। आईआईटी कानपुर की इस कार्यवाही को अपनी रैंकिंग सुधारने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।




मिली जानकारी के मुताबिक कभी देश का नंबर एक तकनीकी संस्थान का दर्जा रख चुकी आईआईटी कानपुर ने अपने छात्रों पर एक बड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाही की है। उसने खराब परफार्मेंन्स और लापरवाह छात्रों की बड़े पैमाने पर निष्कासित कर दिया है। निष्कासन का फैसला सीनेट की मीटिंग में लिया गया है। सीनेट चेयरमैन डा0 इन्द्रनिल मन्ना की अध्यक्षता में हुई बैठक में छात्रों की परफार्मेन्स पर चर्चा की गयी और इसके बाद साठ पीएचडी छात्रों को निष्कासित करने का फैसला लिया गया। यह सभी या तो बीच में पढ़ाई छोड़ गये है अथवा इन्होनें तय मानक पूरे नहीं किये हैं। सीनेट का कहना है कि इन छात्रों को अब दोबारा मौका नहीं दिया जायेगा।




पीएचडी स्कालर्स के अलावा पिछले सेमेस्टर में खराब परफार्मेन्स करने वाले 38 यूजी और पीजी छात्रों को एक सेमेस्टर के लिये निलंबित किया गया है लेकिन इनके पास अपील करने का मौका होगा। इनकी अपील मान्य होने पर वे दोबारा पढ़ाई शुरू कर सकेगें। इन 98 छात्रों के निष्कासन के अलावा 138 छात्रों को सुधरने की चेतावनी भी दी गयी है। संस्थागत अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिहाज से आईआईटी कानपुर में पिछले सेमेस्टर की तुलना में इस सेमेस्टर की कार्रवाई को बड़ा माना जा रहा है।




इस अनुशासनात्मक कार्यवाही की बीच आईआईटी छात्र दबी जुबान से पीएचडी छात्र अलोक कुमार पाण्डे की मौत पर सीनेट में चर्चा न किये जाने पर असन्तोष भी व्यक्त कर रहे हैं। पिछली आठ अगस्त को मैटीरियल साईन्स में पीएचडी करने वाले छात्र आलोक की मौत बेहद संदिग्ध परिस्थितियों में हो गयी थी। तब स्टूडेण्ट जिमखाना ने मौत की वजह संस्थान का तनावपूर्ण शैक्षिणिक माहौल बताते हुए जाॅच की माॅग की थी।

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