आईएलएंडएफएस कंपनी ने जनता व कर्मचारियों के लूटे 91 हजार करोड़ रूपए

ilfs fraud
आईएलएंडएफएस कंपनी ने जनता व कर्मचारियों के लूट 91 हजार करोड़ रूपए

नई दिल्ली। सरकारी कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंसियल सर्विसेज द्वारा किया गया 91 हजार करोड़ रूपए के फ्राड का मामला सामने आने पर बवाल मच गया है। इसकी जांच में जुटी एसएफआर्ईओ के मुताबिक कंपनी के अफसरों ने ही अरबों रूपए का गबन किया है। अब इस पैसे से खरीदी गई चल व अचल संपत्तियों को बेंचकर इस रकम की वसूली की जाएगी।

Ilfs Fraud Of 91 Thausands Crore Investigation Going On :

जांच एजेंसी ने एनसीएलटी को 328 पन्नों की अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी है। जिसमें उसने कहा कि अफसरों ने मिलकर कंपनी को चूना लगाया और फिर रकम का आपस में बंदरबांट किया गया। वहीं कंपनी के मैनेजमेंट के सामने नियमों को ताक पर रखकर बंदरबांट होता रहा, फिर भी उसने इसके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया। जांच एजेंसी ने कहा कि कंपनी के पूर्व निदेशकों ने कंपनी को 91 हजार करोड़ रूपए का चूना लगाकर अकूत संपत्ति बना ली।

बता दें कि जांच में जुटी एजेंसी ने कंपनी के लैपटॉप, डेस्टटॉप और हार्डडिस्क की जांच की तो उनमें घोटालों से जुड़े कई अहम सुराग मिले, जिसके बाद जांच को एक नई रफ़्तार मिल गई। बताया जाता है कि अरबों रूपए का ये घोटाला जब किया गया तो कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर रवि पार्थसारथी, उपाध्यक्ष हरि शंकरन, संयुक्त निदेशक और सीईओ अरूण कुमार साह, सीआईओ विभव कपूर,एमडी आरसी बावा थे।

घोटाला करने वाले इन लोगों ने कंपनी के कर्मचारियों को भी बख्शा। अपने रसूख का इस्तेमाल कर कंपनी के चार शीर्ष अधिकारियों ने कर्मचारी कल्याण ट्रस्ट में रखे 400 करोड़ रूपए ऐसे ट्रस्ट में ट्रांसफर कर दिए, जिसका पंजीकरण ही नहीं था। घोटाने के उजागर होने के बाद केन्द्र सरकार हरकत में आई और मामले पर बड़ी जांच चल रही है। सूत्रों का कहना है कि घोटालेबाज अफसरों की सम्पत्ति बेंचकर इस रकम की वसूली की जाएगी। एसएफआईओ अधिकारियों पर अपराधिक मामला चलाने की अपील ट्रायल कोर्ट से करेगी, ताकि ये लोग अपनी कंपनी सम्पत्ति को बेंच न सके।

नई दिल्ली। सरकारी कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंसियल सर्विसेज द्वारा किया गया 91 हजार करोड़ रूपए के फ्राड का मामला सामने आने पर बवाल मच गया है। इसकी जांच में जुटी एसएफआर्ईओ के मुताबिक कंपनी के अफसरों ने ही अरबों रूपए का गबन किया है। अब इस पैसे से खरीदी गई चल व अचल संपत्तियों को बेंचकर इस रकम की वसूली की जाएगी।जांच एजेंसी ने एनसीएलटी को 328 पन्नों की अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी है। जिसमें उसने कहा कि अफसरों ने मिलकर कंपनी को चूना लगाया और फिर रकम का आपस में बंदरबांट किया गया। वहीं कंपनी के मैनेजमेंट के सामने नियमों को ताक पर रखकर बंदरबांट होता रहा, फिर भी उसने इसके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया। जांच एजेंसी ने कहा कि कंपनी के पूर्व निदेशकों ने कंपनी को 91 हजार करोड़ रूपए का चूना लगाकर अकूत संपत्ति बना ली।बता दें कि जांच में जुटी एजेंसी ने कंपनी के लैपटॉप, डेस्टटॉप और हार्डडिस्क की जांच की तो उनमें घोटालों से जुड़े कई अहम सुराग मिले, जिसके बाद जांच को एक नई रफ़्तार मिल गई। बताया जाता है कि अरबों रूपए का ये घोटाला जब किया गया तो कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर रवि पार्थसारथी, उपाध्यक्ष हरि शंकरन, संयुक्त निदेशक और सीईओ अरूण कुमार साह, सीआईओ विभव कपूर,एमडी आरसी बावा थे।घोटाला करने वाले इन लोगों ने कंपनी के कर्मचारियों को भी बख्शा। अपने रसूख का इस्तेमाल कर कंपनी के चार शीर्ष अधिकारियों ने कर्मचारी कल्याण ट्रस्ट में रखे 400 करोड़ रूपए ऐसे ट्रस्ट में ट्रांसफर कर दिए, जिसका पंजीकरण ही नहीं था। घोटाने के उजागर होने के बाद केन्द्र सरकार हरकत में आई और मामले पर बड़ी जांच चल रही है। सूत्रों का कहना है कि घोटालेबाज अफसरों की सम्पत्ति बेंचकर इस रकम की वसूली की जाएगी। एसएफआईओ अधिकारियों पर अपराधिक मामला चलाने की अपील ट्रायल कोर्ट से करेगी, ताकि ये लोग अपनी कंपनी सम्पत्ति को बेंच न सके।