सरकारी सम्पत्तियों और जमीनों पर करना है कब्जा तो आयें बाराबंकी

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सरकारी सम्पत्तियों और जमीनों पर करना है कब्जा तो आये बाराबंकी

बाराबंकी: ‘योगी राज में टूटी भूमाफियाओ की कमर’ कुछ इसी अंदाज में योगी सरकार टीवी विज्ञापन के जरिए प्रदेश की छवि चमकाने में जुटी है लेकिन आरोप है कि बाराबंकी में रसूखदार लोगों ने जिस तरह लेखपाल व कुछ भ्रष्ट अफसरों से साठ-गांठ कर बड़े पैमाने पर बंजर,तालाब,चारागाह की कीमती जमीन पर अवैध कब्जा किया है, इससे तो यही लगता है कि आज भी उत्तर प्रदेश भ्रष्टाचार के भीषण चपेट में है।

ग्राम समाज की भूमि पर कब्जे की होड़-

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हैदरगढ़ तहसील क्षेत्र के रामपुर मजरे जमीन हुसैनाबाद गाव में दबंगो द्वारा ग्राम समाज की भूमि पर खुलेआम कब्जा किया जा रहा है आरोप है कि ग्रामीण जब इसकी शिकायत लेकर लेखपाल सहित जिम्मेदार अधिकारियों के पास जाते हैं तो वह इस मामले में कुछ नहीं करते हीला हवाली कर मामले को टाल देते हैं गांव के जागरुक व्यक्तियों के मना करने पर दबंग पर लड़ाई पर अमादा हो जाते है अगर शिकायत पर तत्काल कार्यवाही हो जाये तो अवैध कब्जे पर विराम लग सकता है, लेकिन प्रशासन की चुप्पी समझ से परे है।

भ्रष्टाचार की गर्त में पहुँचा तालाब का अस्तित्व-

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बाराबंकी जिले के तहसील हैदरगढ़ अन्तर्गत गांव रामपुर मजरे जमीन हुसैनाबाद में अतिक्रमण के चलते तालाब का अस्तित्व विलुप्त होने के कगार पर है। आश्चर्य तो ये है कि ऐसे भी तालाब है जिनका वजूद अवैध कब्जे के चलते सिमट कर रह गया ऐसे कब्जे को लेकर कोर्ट का रवैया भी सख्त है न केवल इस पर कब्जा किया गया है, बल्कि निर्माण के उपरांत घर भी बना लिया गया है। ग्राम तालाब का वजूद अवैध कब्जे के चलते सिमट गया है।

ऐसे मामलों की संख्या दर्जनों में है, उदाहरण के लिए इसी ग्राम सभा में लगभग आठ तालाब गाटा संख्या 44,117,145,166,179,288, 317 व 53 दर्ज है हैरानी की बात यह है कि इन तालाबो पर दबंगो द्वारा अवैध अतिक्रमण किया गया है। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि खाद के गड्डे गाटा संख्या160 व 182 सहित मृत जानवरो के खाल निकालने वाले पर भी अवैध कब्जा है। यहां तालाब, गड्ढों कार्रवाई के नाम पर प्रशासन पूरी तरह लाचर नजर आ रहा है यही नहीं प्रशासनिक स्तर पर प्रयास किया जाए तो निश्चित ही वजूद मिट रहे तालाब, पोखरों को पुनर्जीवन मिल सकता है।

चारागाह की जमीनों पर धड़ाधड़ कब्जे-

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चारागाह की जमीनों पर अवैध कब्जे व अतिक्रमण बदस्तूर जारी है हाईकोर्ट से लेकर शासन के दिशा निर्देशों को अवैध कब्जेदारों ने दरकिनार करके रख दिया है इसी का परिणाम है कि चाहे चारागाह की या खलिहान इन पर कब्जा किए जाने का सिलसिला जारी है बानगी के तौर पर ग्राम सभा की गाटा संख्या 3 व 183 चारागाह की जमीन पर दबंगों द्वारा कच्चा व पक्का निर्माण कर अवैध कब्जा कर लिया गया है।

लेखपाल पर भी लगे गम्भीर आरोप-

योगी सरकार किसानों के हितों के लिए लाख दावे क्यों न करे लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही नजर आती है जिसका जीता-जागता उदाहरण उस वक्त सामने आया जब पूरे दुर्जन दूबे का पुरवा मजरे जमीन हुसैनाबाद के किसान सन्तराम ने लेखपाल पर पट्टा दिलवाने के एवज में पैसे माँगने का आरोप लगाया है वही ग्रामीणों का आरोप है कि लेखपाल अपने सीनियर अफसरों को गलत सूचनाएं देकर सरकारी जमीनों का अतिक्रमण करवा रहे है और अतिक्रमण के बाद कुछ कागजी खानापूर्ति कर मामले में लीपा पोती कर देते है।

सबसे बड़ा सवाल-

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सुबेहा के समाज सेवी कमालुद्दीन अंसारी का कहना है कि जब बाराबंकी में सालों से चल रहे जमीन के गोरखधंधे की परतें पहले भी खुल चुकी हैं, तो जनपद के उच्चाधिकारी दोषी ग्रामीणों,भ्रष्ट अफसरों और जालसाजों को सलाखों के पीछे भेजने में इतनी देर क्यों लगा रही है,कहीं इस देरी में राजनीतिक मायने तो नहीं हैं?

इनका कहना है-

वही जब इस मामले को लेकर एडीएम बाराबंकी से बात की गयी तो उन्होंने बताया कि जल्द ही एक जाँच टीम गठित कर अवैध अतिक्रमण करने वालो के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी।

रिपोर्ट-राम मिश्रा/दिलीप तिवारी

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