यूपी में अवैध खनन मामले की सीबीआई जांच के आदेश पर रोक





नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में गैरकानूनी तरीके से चल रही खनन गतिविधियों की सीबीआई को जांच का आदेश देने संबंधी इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि यह आदेश समुचित तरीके से सोच विचार या जांच ब्यूरो की प्रारंंभिक रिपोर्ट के अवलोकन के बगैर ही दिया गया है। प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर व न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि सीबीआई को इस प्रकरण में आपराधिक मामले दर्ज करने का निर्देश देने और इनकी जांच जारी रखने का निर्देश देने तक हाईकोर्ट के आदेश पर रोक रहेगी। इसके साथ ही पीठ ने कहा कि हम स्पष्ट करते हैं कि यह आदेश सीबीआई द्वारा सीलबंद लिफाफे में पेश प्रारंभिक जांच रिपोर्ट की जांच पड़ताल व राज्य सरकार का पक्ष सुनने और इस पर सही तरीके से विचार के बाद उचित आदेश देने से हाईकोर्ट को नहीं रोकता।

इस मामले की सुनवाई के दौरान यूपी सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल दीवान का तर्क था कि हाईकोर्ट ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पर विचार किए बगैर ही यह आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने सही तरीके से विचार के बगैर ही ऐसा किया क्योंकि राज्य में गैरकानूनी खनन के बारे में कोई स्पष्ट आरोप नहीं था, इसलिए केंद्रीय जांच एजेंसी को इस मामले में जांच से रोका जाना चाहिए। सोनू कुमार व अन्य की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि हाईकोर्ट ने एकदम सही आदेश दिया है क्योंकि यूपी सरकार के अफसरों की साठगांठ से प्रदेश में गैरकानूनी तरीके से खनन गतिविधियां चल रही हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि गैरकानूनी खनन गतिविधियां रोकने के लिए जिम्मेदार प्राधिकारी ही राज्य में इसकी सुविधा मुहैया करा रहे हैं। भूषण ने कहा कि राज्य में मई, 2012 के बाद अनेक खनन पट्टों की अवधि ‘गैरकानूनी तरीके से बढा’ दी गई है। भूषण के इस आरोप पर पीठ ने जानना चाहा कि क्या हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी की प्रारंभिक रिपोर्ट का अवलोकन किया था।