सोनभद्र जमीनी विवाद से जुड़ीं अहम फाइलें हुईं गायब, एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी

sonbhadr
सोनभद्र जमीनी विवाद से जुड़ीं अहम फाइलें हुईं गायब, एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी

लखनऊ। सोनभद्र नरसंहार की जांच कर रही एसआइटी को तगड़ा झटका लगा है। जमीनी विवाद से जुड़ी अहम फाइलें वन विभाग कार्यालय से गायब हो गई हैं। फाइलें गायब होने की खबर के बाद शासन में हड़कंप मचा हुआ है। कई बार फाइलें मांगे जाने के बाद भी नहीं मिलीं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी गई। वहीं, शनिवार को छुट्टी होने के बावजूद दिन भर रिकॉर्ड खंगाला गया लेकिन संबंधित फाइलें नहीं मिलीं।

Important Files Related To Sonbhadra Land Dispute Went Missing :

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सोनभद्र में राजनेताओं, अधिकारियों और दबंगों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर वन विभाग की जमीन कब्जाने की शिकायत की गई थी। इसमें बसपा शासन में जेपी ग्रुप को अवैध रूप से एक हजार हेक्टेयर से ज्यादा जमीन देने के मामले का भी जिक्र किया गया था। एक हजार हेक्टेयर से ज़्यादा ज़मीन जेपी ग्रुप को देने सबंधी फाइलें भी गायब हैं। जमीनी से जुड़ी फाइलें गायब होने के बाद सीएम कार्यालय ने वन विभाग से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

सूत्रों की माने तो, सीएम कार्यालय के आदेश के बाद जवाब तैयार करने के लिए फाइलें खंगाली गईं तो जो स्थिति सामने आई उससे अधिकारी भी हैरान रह गए। संबंधित कई महत्वपूर्ण फाइलें शासन के पास हैं ही नहीं। इन्हें वन मुख्यालय से शासन को भेजा गया था। सबसे चौंकाने वाली बात जेपी ग्रुप को जमीन देने से संबंधित फाइलों का न मिलना है। बताते हैं कि जेपी ग्रुप को जिन दस्तावेजों के आधार पर जमीन दी गई थी, उस पर वन विभाग के कई अधिकारियों ने साइन करने से इंकार कर दिया था।

गौरतलब है कि सोनभद्र के घोरावल थानाक्षेत्र के उम्भा-सपही गांव में 17 जुलाई को नरसंहार हुआ था। सौ बीघा विवादित जमीन को लेकर यहां दो पक्षों में खूनी संघर्ष हो गया था। इस दौरान फायरिंग के साथ लाठी-डंडे और फावड़े भी चले। इसमें 10 लोगों की मौत हो गई। 28 लोग घायल हो गए थे।

लखनऊ। सोनभद्र नरसंहार की जांच कर रही एसआइटी को तगड़ा झटका लगा है। जमीनी विवाद से जुड़ी अहम फाइलें वन विभाग कार्यालय से गायब हो गई हैं। फाइलें गायब होने की खबर के बाद शासन में हड़कंप मचा हुआ है। कई बार फाइलें मांगे जाने के बाद भी नहीं मिलीं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी गई। वहीं, शनिवार को छुट्टी होने के बावजूद दिन भर रिकॉर्ड खंगाला गया लेकिन संबंधित फाइलें नहीं मिलीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सोनभद्र में राजनेताओं, अधिकारियों और दबंगों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर वन विभाग की जमीन कब्जाने की शिकायत की गई थी। इसमें बसपा शासन में जेपी ग्रुप को अवैध रूप से एक हजार हेक्टेयर से ज्यादा जमीन देने के मामले का भी जिक्र किया गया था। एक हजार हेक्टेयर से ज़्यादा ज़मीन जेपी ग्रुप को देने सबंधी फाइलें भी गायब हैं। जमीनी से जुड़ी फाइलें गायब होने के बाद सीएम कार्यालय ने वन विभाग से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। सूत्रों की माने तो, सीएम कार्यालय के आदेश के बाद जवाब तैयार करने के लिए फाइलें खंगाली गईं तो जो स्थिति सामने आई उससे अधिकारी भी हैरान रह गए। संबंधित कई महत्वपूर्ण फाइलें शासन के पास हैं ही नहीं। इन्हें वन मुख्यालय से शासन को भेजा गया था। सबसे चौंकाने वाली बात जेपी ग्रुप को जमीन देने से संबंधित फाइलों का न मिलना है। बताते हैं कि जेपी ग्रुप को जिन दस्तावेजों के आधार पर जमीन दी गई थी, उस पर वन विभाग के कई अधिकारियों ने साइन करने से इंकार कर दिया था। गौरतलब है कि सोनभद्र के घोरावल थानाक्षेत्र के उम्भा-सपही गांव में 17 जुलाई को नरसंहार हुआ था। सौ बीघा विवादित जमीन को लेकर यहां दो पक्षों में खूनी संघर्ष हो गया था। इस दौरान फायरिंग के साथ लाठी-डंडे और फावड़े भी चले। इसमें 10 लोगों की मौत हो गई। 28 लोग घायल हो गए थे।