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चांदी के पालने पर पहली बार विराजमान होकर अयोध्या में झूला झूलेंगे रामलला : चम्पतराय

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम (Maryada Purushottam Lord Shri Ram) की नगरी अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि (Shri Ram Janmabhoomi)  पर विराजमान रामलला (Ram Lalla )  पहली बार चांदी के पालने पर विराजमान (Sitting on a Silver Cradle) होकर झूला झूलेंगे। यह जानकारी गुरुवार को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) के महासचिव चम्पतराय (General Secretary Champtarai) ने  दी है।

By संतोष सिंह 
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अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम (Maryada Purushottam Lord Shri Ram) की नगरी अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि (Shri Ram Janmabhoomi)  पर विराजमान रामलला (Ram Lalla )  पहली बार चांदी के पालने पर विराजमान (Sitting on a Silver Cradle) होकर झूला झूलेंगे। यह जानकारी गुरुवार को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) के महासचिव चम्पतराय (General Secretary Champtarai) ने  दी है। उन्होंने बताया कि श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि (Panchami Tithi of Shravan Shukla Paksha) पर रामलला चांदी के हिंडोले पर विराजेंगे। जहां वह नागपंचमी शुक्रवार से लेकर रक्षाबंधन पर्व तक उसी रजत जड़ित हिंडोले में अस्थायी मंदिर में झूला झूलेंगे। उन्होंने बताया रामलला के लिये 21 किलो चांदी का झूला (Silver Cradle) बनाया गया है। जो आज उन्हें समर्पित कर दिया गया है। पहली बार ऐसा हो रहा है जब रामलला चांदी के पालने पर विराजमान होकर झूला झूलेंगे।

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श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव ने बताया कि यह अयोध्या का प्रसिद्ध सावन झूला मेला पौराणिक और ऐतिहासिक(Ayodhya’s famous Sawan Jhula fair mythological and historical)  है। श्रावण शुक्ल पक्ष तृतीया (Shravan Shukla Paksha Tritiya) अर्थात हरियाली तीज के दिन मणिपर्वत पर झूला पड़ऩे के साथ ही यहां पर अधिकांश मठ मंदिरों में झूलन प्रारंभ हो जाता है। उन्होंने बताया कि संत-महंत अपने-अपने मंदिरों में युगल सरकार को झूले पर पधारकर झुलाते हुए भाव विभोर होते हैं। साथ ही भक्तजन ठाकुर जी के झूलन झांकी का दर्शन(Jhulan tableau view)  कर अपना जीवन कृतार्थ बनाते हैं।

उन्होंने बताया कि वहीं रामलला के दरबार में श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन झूलनोत्सव की शुरुआत होती है। जो श्रावण पूर्णिमा (Shravan Purnima) तक अपने फलक पर रहता है। 10 दिनों तक रामलला पालने पर विराजमान होकर झूलते हैं। महासचिव ने कहा कि भगवान राम हम सभी के आराध्य हैं। लम्बे संघर्षों के बाद उनके भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है। इसे देखकर सम्पूर्ण हिंदू समाज (Hindu society) में खुशी की लहर है। जल्द ही रामलला का दिव्य मंदिर (Ramlala’s divine temple) बनकर तैयार हो जायेगा। जहां हम सब उनका दर्शन कर सकेंगे।

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