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अपने आखिरी वक्त में रामानंद सागर ने लिखी थी वो कहानी, जिसे पढ़कर दंग रह गई दुनिया

By रवि तिवारी 
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नई दिल्ली। दूरदर्शन पर रामायण टीआरपी के सारे रिकॉर्ड तोड़ रहा है। हालांकि, इस सीरियल के डायरेक्टर रामानंद सागर अब इस दुनिया में नहीं हैं। रामानंद सागर एक वक्त टीबी के मरीज थे। यही नहीं, उन्होंने मौत से पहले एक डायरी भी लिखी थी।  

निर्देशक रामानंद सागर (Ramanand Sagar) टीबी के मरीज थे। इस बात की जानकारी उन्हें काफी दिनों के बाद हुई। रामानंद सागर के बेटे प्रेम सागर ने एक इंटरव्यू में इस बात का जिक्र करते हुए अपने पिता की जिंदगी के कुछ किस्सों को साझा किया।

उन्होंने बताया कि उनके पिता यानि रामानंद सागर को लिखने-पढ़ने का बहुत शौक था। एक दिन कुछ पढ़ते-पढ़ते उन्हें अचानक खांसी आ गई। उन्होंने देखा कि उनके कपड़ो पर खून लगा है। आनन-फानन में डॉक्टर को बुलाया तो पता चला उन्हें टीबी हो गया है।

उस वक्त टीबी का कोई इलाज नहीं था। डॉक्टर ने उन्हें टीबी सेनिटोरियम में भर्ती हो जाने की सलाह दी थी। फिर पिता जी को टीबी सेनिटोरियम लेकर गए और वहां उन्हें भर्ती कर दिया। उस दौर में वहां टीबी पेशेंट्स जिंदा जरूर आते थे लेकिन बाहर उनकी लाश जाती थी।

जब वो वहां पहुंचे तो उन्होंने वहां एक एक कपल को देखा, जो एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे। एक दिन दोनों वहां से स्वस्थ होकर निकले। उन्हें देखकर पिताजी चकित रह गए। उस दिन उन्हें एहसास हुआ कि प्यार किसी भी बीमारी को मात दे सकता है। उस दिन से उन्होंने रोज डायरी लिखना शुरू किया- मौत के बिस्तर से डायरी टीबी पेशेंट की।

उनके कॉलम को साहित्य प्रेमी पढ़ा करते थे. एक दिन एक अखबार के संपादक ने उनका कॉलम पढ़ा, जिसे पढ़कर वो उनके लेखीनी के दीवाने हो गए. उनके मन में विचार आया कि एक आदमी मर रहा है और वो लोगों को बता रहा है कि जीना कैसे है। इसके बाद उन्होंने अपने अखबार में एक कॉलम निकालना शुरू किया, जिसको नाम दिया गया-‘मौत के बिस्तर से रामानंद सागर’।

आपको बता दें कि रामानंद सागर ने 32 लघुकथाएं, 4 कहानियां, 1 उपन्यास, 2 नाटक लिखे हैं। साल 1987 में फिल्मों से अलग रामानंद ने रामायण का निर्माण किया और फिर देखते ही देखते यह विश्व के हर कोने में पहुंच गई। आज भारत ही नहीं बल्क‍ि अन्य देशों में भी रामानंद सागर के रामायण की चर्चा होने लगी थी।  

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