क्रिसमस के मौके पर प्रकाशित किताब में लेख- ‘पवित्र है सेक्स, कामुकता नहीं है कोई पाप’

नई दिल्ली। केरल में एक चर्च से प्रकाशित पत्रिका में ‘सेक्स’ विषय में छपे लेख से विवाद पैदा हो गया है। पत्रिका में सेक्स और कामुकता को बढ़ावा देने वाला लेख लिखा गया है। ‘सेक्स और आयुर्वेद’ शीर्षक से छपे चार पन्ने के लेख में डॉक्टर संतोष थॉमस ने लिखा है, ‘सेक्स शरीर और दिमाग का उत्सव है। बिना शारीरिक संबंधों के प्यार बिना पटाखों के त्योहार जैसा है। अगर दो शरीर जुड़ना चाहते हैं तो उनके मन को भी साथ में जुड़ जाना चाहिए।’

हालांकि हमेशा से इंसानी दिमाग में सेक्स को लेकर तरह तरह की भ्रांतियां रही है। नुक्कड़-चौराहे पर हर दूसरा इंसान अपने विवेकानुसार इस विषय पर ज्ञान बाचता आपको मिल जाएगा। भक्तिमार्ग पर चलने वाले श्रद्धालुओं में सामान्य धारणा है कि सेक्स आध्यात्मिक जीवन के लिए अच्छा नहीं है और केवल प्रजनन के उद्देश्य से किया जाना चाहिए। लेकिन यहां इसे बिलकुल सही और फायदेमंद बताया गया है।

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रेथियुवम आयुर्वेदम’ (सेक्स और आयुर्वेद) टाइटल से छपे चार पन्ने के इस लेख में डॉ संतोष थॉमस ने लिखा है, ‘सेक्स शरीर और मस्तिष्क का उत्सव है। बिना शारीरिक संबंधों के प्रेम बिना पटाखों के पूरम (त्योहार) जैसा है। अगर दो शरीर जुड़ना चाहते हैं तो उनके मन को भी साथ में जुड़ जाना चाहिए।’ लेख आलप्पुझा बिशप की मासिक पत्रिका मुखरेखा में छपा है।

मैगजीन के एडिटर फादर जेवियर कुड्यामेश्रे बताते हैं, ‘यह पहली बार है जब हमने कामशास्त्र से जुड़ा कोई लेख छापा है। यह लेख स्वस्थ जीवन से जुड़ा है और इसे लिखने वाले डॉक्टर पहले भी मैगजीन के लिए लिखते रहे हैं।’

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