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कभी भाजपा में बोलती थी जसवंत सिंह की तूती, अटल बिहारी वाजपेयी के करीबियों में होती थी गिनती

In The Eye Of Memories Jaswant Singhs Weight Used To Speak In Bjp Counting Was In Close Proximity To Atal Bihari Vajpayee

By शिव मौर्या 
Updated Date

नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह का निधन 82 वर्ष की उम्र में हो गया है। वह राजस्थान के बाड़मेर से थे और यहां के बड़े राजपूत नेता रहे। जसवंत सिंह का भारतीय जनता पार्टी में कभी तूती बोलती थी लेकिन समय बीतते ही पार्टी ने उन्हें किनारे कर दिया। साथ ही उन्हें टिकट तक नहीं मिला।

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इसके बाद जसवंत सिंह बागी हो गए और बीजेपी सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करने लगे। वहीं, अटल बिहारी वाजपेयी के सबसे करीबियों में भी इनकी गिनती होती थी। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में जब एनडीए को सत्ता मिली तो जसवंत सिंह को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। वाजपेयी कैबिनेट में जसवंत सिंह के पास विदेश मंत्रालय से लेकर रक्षा मंत्रालय और वित्त मंत्रालय तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां रहीं। हालांकि, जसवंत सिंह की राजनीति में एंट्री की वजह सिंधिया परिवार रहा है। वही सिंधिया परिवार जिससे बाद में जसवंत सिंह का छत्तीस का आंकड़ा हो गया।

इस तरह हुई राजनीतिक शुरूआत
जयवंत सिंह का जन्म 3 जनवरी 1938 को बाड़मेर के जसोल गांव में हुआ था। जसवंत सिंह शुरू में जोधपुर के राजपरिवार के पास नौकरी करते थे। इसके बाद वह सेना में चले गए थे। जसवंत सिंह की पत्नी शीतल कंवर उर्फ कालू बाई और सिंधिया परिवार के अभिभावकों की तरह रहे ग्वालियर की राजमाता के निजी सचिव सरदार आंग्रे की पत्नी की बहन थी। शीतल कंवर के ताऊ की बेटी से सरदार आंग्रे की शादी हुई थी। सिंधिया और जसोल परिवार के बीच पारिवारिक रिश्ता रहा है। इसी वजह से आर्मी बैकग्राउंड के जसवंत सिंह को सरदार आंग्रे परिवार के अनुरोध पर विजयाराजे सिंधिया राजनीति में लेकर आईं। राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने न केवल उन्हें बीजेपी ज्वाइन कराई बल्कि रहने के लिए दिल्ली के तीन मूर्ति लेन में जगह भी दी थी। सिंधिया परिवार की सरपरस्ती में जसवंत सिंह का कद बीजेपी में बड़ा होता गया और वो अटल बिहारी वाजपेयी के भी बेहद करीबी हो गए।

राजनीतिक अनुभव रखने वाले नेताओं में थे शुमार
जसवंत सिंह सबसे लंबे समय तक सांसद रहने का अनुभव रखने वालों नेताओं में शुमार रहे हैं। वो पांच बार राज्यसभा सांसद रहे और 1990, 1991, 1996 और 2009 में उन्होंने लोकसभा चुनाव जीता. हालांकि, इसके बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई।

 

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