पंचायती राज घोटाले में पांच के खिलाफ FIR दर्ज, सांठगांठ से हुआ करोड़ों का घोटाला

fir
पंचायती राज घोटाले में पांच के खिलाफ FIR दर्ज, सांठगांठ से हुआ करोड़ों का घोटाला

लखनऊ। पांचायती राज निदेशालय में ग्राम पंचायतों के परफारमेंस ग्रांट में करोड़ों रुपये के घोटाले में विजिलेंस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। पंचायती राज विभाग के डिप्टी डायरेक्टर समेत 5 अफसरों के खिलाफ विजिलेंस टीम ने अलीगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। आरोपी अफसरों में अपर निदेशक राजेन्द्र सिंह, शिवकुमार, उपनिदेशक गिरीश चन्द्र रजक, मुख्य लेखाधिकारी केशव सिंह, पटल-सहायक नोडल अधिकारी रमेश चन्द्र यादव शामिल हैं। यह घोटाला 31 जिलों की 1123 ग्राम पंचायतों में हुआ।

In The Panchayati Raj The Scam Of Crores With The Connivance Of Officers Fir Registered Against 5 :

बता दें कि, सीएम योगी ने दो माह पूर्व इस मामले की समीक्षा की थी और परफारेंस ग्रांट के घोटालेबाज अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद शासन ने विजिलेंस जांच को मंजूरी दी थी। सूत्रों के मुताबिक कई जिलों के जिला पंचायत राज अधिकारी भी जांच टीम के राडार पर है। इससे पहले अपर निदेशकों समेत 12 अफसरों को निलंबित कर दिया गया था। परफारमेंस ग्रांट में करोड़ों रुपये के घोटाले में विजिलेंस के इंस्पेक्टर अनिल कुमार यादव की तहरीर पर पांच अफसरों पर केस दर्ज हुआ है।

आरोप है कि अफसरों ने अपने कार्यकाल के दौरन अपात्र ग्राम पंचायतों को भी परफारमेंस ग्रांट के लिए ​चयनित कर लिया और सांठगांठ कर ग्राम पंचायतों को ग्रांट देने से पहले ग्राम पंचायतों से रुपये भी वसूल लिये थे। इसके बाद ही इन ग्राम पंचायतों के खातों में ग्रांट का पैसा डाला गया। ग्राम पंचायत को ग्रांट देने के लिये चयन की प्रक्रिया वर्ष 2016 में शुरू की गई थी।

उस समय ग्राम पंचायतों की जो सूची तैयार की, उसमें अंतिम स्तर पर बिना किसी पड़ताल के बदलाव कर दिया गया। इस बदलाव में ही अपात्र ग्राम पंचायत शामिल कर ली गई। उस समय नोडल अधिकारी गिरीश चन्द्र रजक ने भी चयन समिति के सामने अपात्र को पात्र ग्राम पंचायत बताते हुए सूची रख दी थी। इस सूची पर गिरीश और रमेश चन्द्र के हस्ताक्षर भी थे।

लखनऊ। पांचायती राज निदेशालय में ग्राम पंचायतों के परफारमेंस ग्रांट में करोड़ों रुपये के घोटाले में विजिलेंस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। पंचायती राज विभाग के डिप्टी डायरेक्टर समेत 5 अफसरों के खिलाफ विजिलेंस टीम ने अलीगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। आरोपी अफसरों में अपर निदेशक राजेन्द्र सिंह, शिवकुमार, उपनिदेशक गिरीश चन्द्र रजक, मुख्य लेखाधिकारी केशव सिंह, पटल-सहायक नोडल अधिकारी रमेश चन्द्र यादव शामिल हैं। यह घोटाला 31 जिलों की 1123 ग्राम पंचायतों में हुआ। बता दें कि, सीएम योगी ने दो माह पूर्व इस मामले की समीक्षा की थी और परफारेंस ग्रांट के घोटालेबाज अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद शासन ने विजिलेंस जांच को मंजूरी दी थी। सूत्रों के मुताबिक कई जिलों के जिला पंचायत राज अधिकारी भी जांच टीम के राडार पर है। इससे पहले अपर निदेशकों समेत 12 अफसरों को निलंबित कर दिया गया था। परफारमेंस ग्रांट में करोड़ों रुपये के घोटाले में विजिलेंस के इंस्पेक्टर अनिल कुमार यादव की तहरीर पर पांच अफसरों पर केस दर्ज हुआ है। आरोप है कि अफसरों ने अपने कार्यकाल के दौरन अपात्र ग्राम पंचायतों को भी परफारमेंस ग्रांट के लिए ​चयनित कर लिया और सांठगांठ कर ग्राम पंचायतों को ग्रांट देने से पहले ग्राम पंचायतों से रुपये भी वसूल लिये थे। इसके बाद ही इन ग्राम पंचायतों के खातों में ग्रांट का पैसा डाला गया। ग्राम पंचायत को ग्रांट देने के लिये चयन की प्रक्रिया वर्ष 2016 में शुरू की गई थी। उस समय ग्राम पंचायतों की जो सूची तैयार की, उसमें अंतिम स्तर पर बिना किसी पड़ताल के बदलाव कर दिया गया। इस बदलाव में ही अपात्र ग्राम पंचायत शामिल कर ली गई। उस समय नोडल अधिकारी गिरीश चन्द्र रजक ने भी चयन समिति के सामने अपात्र को पात्र ग्राम पंचायत बताते हुए सूची रख दी थी। इस सूची पर गिरीश और रमेश चन्द्र के हस्ताक्षर भी थे।