सिंचाई विभाग के भ्रष्ट इंजीनियर राजेश्वर सिंह के ठिकानों पर आईटी की छापेमारी

सिंचाई विभाग के भ्रष्ट इंजीनियर राजेश्वर सिंह के ठिकानों पर आईटी की छापेमारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग की ओखला यूनिट में तैनात भ्रष्ट इंजीनियर राजेश्वर सिंह यादव के नोएडा स्थित आवास समेंत करीब 21 ठिकानों पर शुक्रवार को आयकर विभाग (Income Tax Department) ने छापेमारी शुरू की है। आयकर विभाग को राजेश्वर सिंह के खिलाफ मिली आय से अधिक संपत्ति की शिकायत मिली थी जिसके आधार पर सात शहरों में इंजीनियर के सगे संबन्धियों और रिश्तेदारों के अलग अलग ठिकानों पर छापा मारा गया है। राजेश्वर के ससुर सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी हैं, जिनके आवास पर भी आईटी ने छापेमारी को अंजाम दिया है। छापेमारी की कार्रवाई शनिवार को भी जारी रहने की बात सामने आई है।

मिली जानकारी के मु​ताबिक राजेश्वर सिंह का समाजवादी पार्टी के मुखिया परिवार से करीबी रिश्ता है। राजेश्वर के पारिवारिक आयोजनों में मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, शिवपाल यादव और रामगोपाल यादव के शामिल होते रहने की बात भी सामने आई है। यही वजह रही है कि राजेश्वर सिंह ने समाजवादी पार्टी के सत्ता में रहकर सिंचाई विभाग में बेहद अहम मानी जाने वाली ओखला यूनिट पर तैना​ती हासिल कर अरबों की बेनामी संपत्ति जुटाई है।

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मूलत: एटा जिले के मेहनी गांव से आने वाले राजेश्वर सिंह के पैतृक निवास पर भी आईटी टीम ने कार्रवाई की है। गांव से पता चला है कि कभी गरीबी का शिकार रहा राजेश्वर सिंह का परिवार एकाएक अमी​र हो गया। उसने और उसके सगे संबन्धियों ने कुछ ही सालों में कई सौ बीघा जमीनें खरीद डालीं हैं। आईटी विभाग को राजेश्वर के नाम पर भी 200 बीघा जमीन होने के साक्ष्य मिले हैं। आईटी विभाग ने राजेश्वर के भाई व अन्य रिश्तेदारों से भी पूछताछ की है।

सूत्रों की माने तो आईटी ने आगरा में राजेश्वर सिंह के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। राजेश्वर सिंह के पास आगरा की लायर्स कालोनी में करीब 50 करोड़ की कीमत वाली आलीशान कोठी पर मालिकाना हक, और कई करोड़ की जमीनों और रियल इस्टेट प्रोजेक्ट्स में उसका बड़ा बेनामी निवेशक है। आगरा के कुछ कद्दावर सपा नेताओं के साथ राजेश्वर सिंह के कारोबारी रिश्ते हैं। आगरा के अलावा दिल्ली, एटा और नोएडा में भी बड़ा निवेश कर रखा है।

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पहले से थी छापे की जानकारी —

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि राजेश्वर सिंह को अपने ठिकानों पर आईटी की छापेमारी होने का पूर्वानुमान था। यही वजह रही कि उसने पिछले कुछ समय में बड़ी तदात में जमीनों की रजिस्ट्री के दस्तावेज व अन्य निवेशों से जुड़े दस्तावेजों को ठिकाने लगाने का काम शुरू कर दिया था।

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