भारत और चीन के बीच LAC पर बढ़ता जा रहा तनाव, खतरनाक हथियारों की तैनाती में लगा चीन

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भारत और चीन के बीच LAC पर बढ़ता जा रहा तनाव, खतरनाक हथियारों की तैनाती में लगा चीन

नई दिल्‍ली: लद्दाख में भारत और चीन के बीच बढ़ती तनातनी के बीच चीनी विश्लेषकों की तरफ से भड़ाऊ बयान सामने आया है। विश्लेषकों ने भारत के खिलाफ अपने नए हथियारों को इस क्षेत्र में तैनात करने की सलाह चीनी सरकार को दी है। साल 2017 में भारत के साथ डोकलाम गतिरोध के बाद चीनी सेना ने अपने शस्त्रागार में हथियारों का विस्तार किया। उसने टाइप 15 टैंक, जेड -20 हेलीकॉप्टर और जीजे -2 ड्रोन का निर्माण किया, जिनको अब लद्दाख में भारत के खिलाफ प्रयोग करने की वकालत की गई है। यह बात चीनी विश्लेषकों की तरफ से वहां के अखबार ग्‍लोबल टाइम्‍स में एक लेख के जरिए कही गई हैं।

Increased Tension Between India And China Over Lac China Engaged In The Deployment Of Dangerous Weapons :

चीन ने बनाए टाइप 15 टैंक को पिछले साल 1 अक्टूबर को राष्ट्रीय दिवस सैन्य परेड में देश के सामने रखा था। इसमें एक इंजन इंजन लगा हुआ है। टाइप 15 लाइटवेट युद्धक टैंक प्रभावी रूप से मुश्किल से पठार क्षेत्रों में काम कर सकता है। इसमें उन्नत अग्नि नियंत्रण प्रणाली और 105 मिलीमीटर कैलिबर बंदूक भी लगी है। जो किसी भी हल्के बख्तरबंद वाहन को भेद सकता है। इस परेड़ में चीन के सबसे उन्नत होवित्जर PCL-181 को भी दिखाया गया। 25 टन का PCL-181 हल्का और तेज है यह चीन के पिछले 40 टन के स्व-चालित होवित्जर की तुलना में अधिक ताकतवर है।

इन दोनों ही 15 टैंक और PCL-181 हॉवित्जर को जनवरी में सैन्य अभ्यास के दौरान दक्षिण-पश्चिम चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की ऊंचाई वाले पहाड़ों में देखा गया था। इस परेड में एक अन्य नया हथियार एक मल्टी-रॉकेट लॉन्चर सिस्टम था, जो 8×8 पहियों वाली गाड़ी पर तैनात था। इसमें चार 370-मिलीमीटर रॉकेट के दो सेटों लगे हुए थे जोकि ऊंचाई पर तैनाती किया जा सकता है।

चीनी विश्‍लेषकों की तरफ से बताया गया कि चीन ने परेड में Z-20 हेलीकाप्टर को भी शामिल किया, जोकि सभी प्रकार के इलाकों और मौसम में उड़ान भरने में सक्षम है। इसका उपयोग कर्मियों और कार्गो परिवहन, खोज और बचाव व टोही मिशनों पर किया जा सकता है। Z-20 में शक्तिशाली इंजन लगा हुआ है जोक‍ि एविएशन इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन ऑफ चाइना ने बनाया है। बाद में इसको संशोधित करते Z-8G में बदल दिया गया, जोकि एक बड़ा परिवहन हेलीकॉप्टर बना।

Z-8G चीन में अपनी तरह का पहला हेलीकाप्‍टर है जो समुद्र तल से 4,500 मीटर से अधिक दूर तक जा सकता है, जिसकी 6,000 मीटर से अधिक ऊंचा जा सकता है। एयरशो चाइना 2018 में, चीनी वायु सेना ने जीजे -2 सशस्त्र टोही ड्रोन का अनावरण किया, जो पिछले जीजे-1 की तुलना में अधिक वजन ले जा सकता है। रिपोर्टों में कहा गया है कि इसका उपयोग तिब्बत जैसे उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लंबी सीमा पर गश्त करने के लिए किया जा सकता है। चीनी विश्लेषकों ने कहा कि विशेष रूप से तैयार किए गए इन हथियारों ने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चीनी सेना की युद्धक क्षमताओं को बढ़ावा दिया है, जिससे राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बेहतर सुरक्षा मिल सके।

बता दें कि हाल ही में LAC पर चीन और भारत की सेनाओं के बीच झड़प हुई हैं। जिसके बाद चीन ने यहां पर सैनिकों की तादाद को बढ़ा दिया है। लेख में बताया गया है कि मई में गालवान घाटी क्षेत्र में भारत ने अवैध निर्माण किया है। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि चीन ने हाल ही में 5000 सैनिकों को तैनात किया है और दोनों देशों के राजनयिकों ने शांतिपूर्ण समाधान पर बातचीत शुरू कर दी है।

चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रेन गुओकियांग ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चीनी सैनिक सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता की रक्षा के लिए समर्पित हैं और चीन-भारत सीमा पर समग्र स्थिति स्थिर और नियंत्रण में है।

नई दिल्‍ली: लद्दाख में भारत और चीन के बीच बढ़ती तनातनी के बीच चीनी विश्लेषकों की तरफ से भड़ाऊ बयान सामने आया है। विश्लेषकों ने भारत के खिलाफ अपने नए हथियारों को इस क्षेत्र में तैनात करने की सलाह चीनी सरकार को दी है। साल 2017 में भारत के साथ डोकलाम गतिरोध के बाद चीनी सेना ने अपने शस्त्रागार में हथियारों का विस्तार किया। उसने टाइप 15 टैंक, जेड -20 हेलीकॉप्टर और जीजे -2 ड्रोन का निर्माण किया, जिनको अब लद्दाख में भारत के खिलाफ प्रयोग करने की वकालत की गई है। यह बात चीनी विश्लेषकों की तरफ से वहां के अखबार ग्‍लोबल टाइम्‍स में एक लेख के जरिए कही गई हैं। चीन ने बनाए टाइप 15 टैंक को पिछले साल 1 अक्टूबर को राष्ट्रीय दिवस सैन्य परेड में देश के सामने रखा था। इसमें एक इंजन इंजन लगा हुआ है। टाइप 15 लाइटवेट युद्धक टैंक प्रभावी रूप से मुश्किल से पठार क्षेत्रों में काम कर सकता है। इसमें उन्नत अग्नि नियंत्रण प्रणाली और 105 मिलीमीटर कैलिबर बंदूक भी लगी है। जो किसी भी हल्के बख्तरबंद वाहन को भेद सकता है। इस परेड़ में चीन के सबसे उन्नत होवित्जर PCL-181 को भी दिखाया गया। 25 टन का PCL-181 हल्का और तेज है यह चीन के पिछले 40 टन के स्व-चालित होवित्जर की तुलना में अधिक ताकतवर है। इन दोनों ही 15 टैंक और PCL-181 हॉवित्जर को जनवरी में सैन्य अभ्यास के दौरान दक्षिण-पश्चिम चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की ऊंचाई वाले पहाड़ों में देखा गया था। इस परेड में एक अन्य नया हथियार एक मल्टी-रॉकेट लॉन्चर सिस्टम था, जो 8×8 पहियों वाली गाड़ी पर तैनात था। इसमें चार 370-मिलीमीटर रॉकेट के दो सेटों लगे हुए थे जोकि ऊंचाई पर तैनाती किया जा सकता है। चीनी विश्‍लेषकों की तरफ से बताया गया कि चीन ने परेड में Z-20 हेलीकाप्टर को भी शामिल किया, जोकि सभी प्रकार के इलाकों और मौसम में उड़ान भरने में सक्षम है। इसका उपयोग कर्मियों और कार्गो परिवहन, खोज और बचाव व टोही मिशनों पर किया जा सकता है। Z-20 में शक्तिशाली इंजन लगा हुआ है जोक‍ि एविएशन इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन ऑफ चाइना ने बनाया है। बाद में इसको संशोधित करते Z-8G में बदल दिया गया, जोकि एक बड़ा परिवहन हेलीकॉप्टर बना। Z-8G चीन में अपनी तरह का पहला हेलीकाप्‍टर है जो समुद्र तल से 4,500 मीटर से अधिक दूर तक जा सकता है, जिसकी 6,000 मीटर से अधिक ऊंचा जा सकता है। एयरशो चाइना 2018 में, चीनी वायु सेना ने जीजे -2 सशस्त्र टोही ड्रोन का अनावरण किया, जो पिछले जीजे-1 की तुलना में अधिक वजन ले जा सकता है। रिपोर्टों में कहा गया है कि इसका उपयोग तिब्बत जैसे उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लंबी सीमा पर गश्त करने के लिए किया जा सकता है। चीनी विश्लेषकों ने कहा कि विशेष रूप से तैयार किए गए इन हथियारों ने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चीनी सेना की युद्धक क्षमताओं को बढ़ावा दिया है, जिससे राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बेहतर सुरक्षा मिल सके। बता दें कि हाल ही में LAC पर चीन और भारत की सेनाओं के बीच झड़प हुई हैं। जिसके बाद चीन ने यहां पर सैनिकों की तादाद को बढ़ा दिया है। लेख में बताया गया है कि मई में गालवान घाटी क्षेत्र में भारत ने अवैध निर्माण किया है। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि चीन ने हाल ही में 5000 सैनिकों को तैनात किया है और दोनों देशों के राजनयिकों ने शांतिपूर्ण समाधान पर बातचीत शुरू कर दी है। चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रेन गुओकियांग ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चीनी सैनिक सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता की रक्षा के लिए समर्पित हैं और चीन-भारत सीमा पर समग्र स्थिति स्थिर और नियंत्रण में है।