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Independence Day 2021: भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में रसायनज्ञ डॉ प्रफुल्लचन्द्र राय का महत्वपूर्ण योगदान रहा

देश 2021 में स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ (75th anniversary of independence day) मना रहा है। इस स्वतंत्रता दिवस पर हम आपको बताने जा रहे हैं भारत के महान रसायनज्ञ डॉ प्रफुल्लचन्द्र राय के बारे में जिनका भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। डाक्टर प्रफुल्लचन्द्र राय भारत के महान रसायनज्ञ, उद्यमी तथा महान शिक्षक थे।

By अनूप कुमार 
Updated Date

Independence Day 2021: देश 2021 में स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ (75th anniversary of independence day) मना रहा है। इस स्वतंत्रता दिवस पर हम आपको बताने जा रहे हैं भारत के महान रसायनज्ञ डॉ प्रफुल्लचन्द्र राय (The great chemist Dr Prafulla Chandra Rai) के बारे में जिनका भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन (Indian independence movement) में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। डाक्टर प्रफुल्लचन्द्र राय भारत के महान रसायनज्ञ, उद्यमी तथा महान शिक्षक (Great Chemist, Entrepreneur and Great Teacher) थे। आचार्य राय केवल आधुनिक रसायन शास्त्र के प्रथम भारतीय प्रवक्ता ही नहीं थे बल्कि उन्होंने ही इस देश में रसायन उद्योग (chemical industry) की नींव भी डाली थी। डॉ॰ राय को उनकी खोज के कारण ‘नाइट्राइट्स का मास्टर’ (‘Master of Nitrites’) कहा जाता है।

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बहुआयामी व्यक्तित्व
‘सादा जीवन उच्च विचार’ वाले उनके बहुआयामी व्यक्तित्व से प्रभावित होकर महात्मा गांधी ने कहा था, “शुद्ध भारतीय परिधान में आवेष्टित इस सरल व्यक्ति को देखकर विश्वास ही नहीं होता कि वह एक महान वैज्ञानिक हो सकता है।” आचार्य राय की प्रतिभा इतनी विलक्षण थी कि उनकी आत्मकथा “लाइफ एण्ड एक्सपीरियेंसेस ऑफ बंगाली केमिस्ट” (“Life and Experience of Bengali Chemist”) के प्रकाशित होने पर अतिप्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय विज्ञान पत्रिका “नेचर” ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए लिखा था कि “लिपिबद्ध करने के लिए संभवत: प्रफुल्ल चन्द्र राय से अधिक विशिष्ट जीवन चरित्र किसी और का हो ही नहीं सकता।”

उन्हें रसायन के अलाव इतिहास से बड़ा प्रेम था। फलस्वरूप, इन्होंने १०-१२ वर्षो तक गहरा अध्ययन कर हिंदू रसायन का इतिहास नामक महत्वपूर्ण ग्रन्थ लिखा, जिससे आपकी बड़ी प्रसिद्धि हुई। इस पुस्तक द्वारा प्राचीन भारत के अज्ञात, विशिष्ट रसायन विज्ञान का बोध देश और विदेश के वैज्ञानिकों को हुआ, जिन्होंने डॉ॰ राय की बहुत प्रशंसा की।

 

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जीवन परिचय
डाक्टर प्रफुल्लचंद्र राय का जन्म बंगाल के खुलना जिले के ररूली कतिपरा नामक ग्राम में 2 अगस्त 1861 ई. को हुआ था। इनके पिता, श्रीहरिश्चंद्र राय, मध्यवृत्ति के संपन्न गृहस्थ तथा फारसी के विद्वान् थे। अंग्रेजी शिक्षा की ओर इनका आकर्षण था, इसलिये इन्होंने अपने गाँव में एक “मॉडल” स्कूल स्थापित किया था, जिसमें प्रफुल्लचंद्र ने प्राथमिक शिक्षा पाई।

विद्वान् सर जॉन इलियट और सर ऐलेक्जैंडर पेडलर से शिक्षा पाई
इसके बाद इनका परिवार कलकत्ता चला आया, जहाँ ये उस समय के सुप्रसिद्ध हेयर स्कूल में प्रथम, तथा बाद में ऐल्बर्ट स्कूल में भरती हुए। सन् 1879 में एंट्रेंस परीक्षा पास करके इन्होंने कालेज की पढ़ाई मेट्रॉपालिटन इंस्टिट्यूट में आरंभ की, पर विज्ञान के विषयों का अध्ययन करने के लिये इन्हें प्रेसिडेंसी कालेज जाना पड़ता था। यहाँ इन्होंने भौतिकी और रसायन के सुप्रसिद्ध विद्वान् सर जॉन इलियट और सर ऐलेक्जैंडर पेडलर से शिक्षा पाई, जिनके संपर्क से इनके विज्ञानप्रेम में वृद्धि हुई।

एडिनबरा विश्वविद्यालय में दाखिल हुए
सन् 1882 में गिल्क्राइस्ट छात्रवृत्ति प्रतियोगिता की परीक्षा में सफल होने के कारण विदेश जाकर पढ़ने की आपकी इच्छा पूरी हुई। इसी वर्ष आप एडिनबरा विश्वविद्यालय में दाखिल हुए, जहाँ अपने छह वर्ष तक अध्ययन किया।

बंगाल कैमिकल ऐंड फार्मास्युटिकल वर्क्स का कार्य आरंभ किया
सन् 1892 में 800 रूपए की अल्प पूँजी से, अपने रहने के कमरे में ही, विलायती ढंग की ओषधियाँ तैयार करने के लिये बंगाल कैमिकल ऐंड फार्मास्युटिकल वक्र्स का कार्य आरंभ किया, जो प्रगति कर आज करोड़ों रूपयों के मूल्य का कारखाना हो गया है और जिससे देश में इस प्रकार के अन्य उद्योगों का सूत्रपात हुआ है।

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शोध-पत्र प्रकाशित किए
1912 में इंग्लैण्ड के अपने दूसरे प्रवास के दौरान डरहम विश्वविद्यालय के कुलपति ने उन्हें अपने विश्वविद्यालय की मानद डी.एस.सी. उपाधि प्रदान की। रसायन के क्षेत्र में आचार्य ने 120 शोध-पत्र प्रकाशित किए।

अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हुई
1912 में इंग्लैण्ड के अपने दूसरे प्रवास के दौरान डरहम विश्वविद्यालय के कुलपति ने उन्हें अपने विश्वविद्यालय की मानद डी.एस.सी. उपाधि प्रदान की। रसायन के क्षेत्र में आचार्य ने 120 शोध-पत्र प्रकाशित किए। मरक्यूरस नाइट्रेट एवं अमोनियम नाइट्राइट नामक यौगिकों के प्रथम विरचन से उन्हें अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हुई।

डाक्टर राय ने अपना अनुसंधान कार्य पारद के यौगिकों से प्रारंभ किया तथा पारद नाइट्राइट नामक यौगिक, संसार में सर्वप्रथम सन् 1896 में, आपने ही तैयार किया, जिससे आपकी अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्धि प्रारंभ हुई।

आचार्य राय की प्रतिभा इतनी विलक्षण थी कि उनकी आत्मकथा “लाइफ एण्ड एक्सपीरियेंसेस ऑफ बंगाली केमिस्ट” (एक बंगाली रसायनज्ञ का जीवन एवं अनुभव) के प्रकाशित होने पर अतिप्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय विज्ञान पत्रिका “नेचर” ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए लिखा था कि “लिपिबद्ध करने के लिए संभवत: प्रफुल्ल चंद्र राय से अधिक विशिष्ट जीवन चरित्र किसी और का हो ही नहीं सकता।”

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