साल 2016 के दो चर्चित युवा, जिन्होंने हिला दी देश की राजनीति

नई दिल्ली। हर साल की तरह यह साल भी कुछ चंद दिनों में हमसे अलविदा करने की तैयारी में है। साल 2016 ने कुछ चुनिंदा लोगों को ऊंचाई दी, तो कुछ को जमीनी हकीकत से रूबरू भी कराया। आज हम बात कर रहे हैं देश के उन दो युवाओं की, जिन्होने पूरे देश में खूब सुर्खियां बटोरी और सिस्टम की ‘नाक में दम’ कर दिया।




इन नौजवानों ने अपने विचारों-आंदोलन के दम पर सरकार को नाकों चना चबवाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। हालांकि इन युवाओं ने शुरुआत अकेले की थी पर बाद में इनके पीछे हजारों की तादाद में लोगों ने जमकर समर्थन किया। वहीं इनके विरोधियों की संख्या भी कम नहीं रही, पर जो भी हो इन युवाओं को इस साल अनदेखा करना मुमकिन नहीं था।



दो ऐसे मामले जो रहे सुर्खियों में–

रोहित की आखिरी चिट्ठी —

इस लिस्ट में सबसे पहला नाम है रोहित वेमुला का, इस दलित छात्र ने जनवरी में खुदकुशी कर ली थी और उसकी लिखी आखिरी चिट्ठी ने समाज में फैले जातिवाद के मुंह पर एक करारा तमाचा मारा था। रोहित का लिखा सुसाइड नोट किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर देने के लिए काफी था। चिट्ठी में रोहित ने लिखा था-‘एक आदमी की क़ीमत आज के समय में उसकी तात्कालिक पहचान और नज़दीकी संभावना तक समेट दी गई है। इस घटना ने देश भर के छात्रों में आक्रोश भर दिया था और लोग रोहित के जाने के बाद उसके हक़ की लड़ाई लड़ने के लिए सड़कों पर तक उतर आए। वहीं उनकी खुदकुशी से जुड़े मामले को लेकर सियासी गलियारों में भी काफी तूफान आ गया था। जिसके बाद कई राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी सियासी रोटियाँ सेकने में लग गयी थी।



‘देशद्रोह’ और देशभक्ति के बीच फंसा कन्‍हैया–

वामपंथी विचारधारा के युवाओं की नई आवाज बनकर उभरे जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार आज देश की युवा राजनीति में जाना-माना नाम हैं। देश में अपने अस्तित्व को लगातार खोती जा रही वामपंथी विचारधारा को एक नई राह दिखाने के लिए कन्हैया कुमार ने कमान संभाली। रोहित वेमुला की खुदुकशी के मामले से लेकर अफजल गुरु की फांसी और कश्मीर की आजादी का मुद्दा उठाकर एकाएक देशद्रोह के आरोपों में घिरने के बाद हुई उनकी गिरफ्तारी ने उन्हे रातों-रात देश की राजनीति के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया। आज कन्हैया कुमार देश के कई राज्यों में भ्रमण करते हुए युवा छात्रों के बीच सभाएं कर वामपंथी विचारधारा को बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

 

रिपोर्ट—अनुराग सिंह