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दुनिया से हमें धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद या लोकतंत्र सीखने की जरूरत नहीं, यह हमारे खून में है : मोहन भागवत

आएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने संशोधित नागरिकता कानून को लेकर देश के मुसलमानों को बड़ा भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि उन्हें इससे कोई नुकसान नहीं होगा। भागवत ने यह भी कहा कि अल्पसंख्यकों को लेकर विभाजन के समय जो वादा किया गया था। उसी का पालन अब भारत कर रहा है, लेकिन पाकिस्तान ने ऐसा नहीं किया।

By संतोष सिंह 
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नई दिल्ली। आएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने संशोधित नागरिकता कानून को लेकर देश के मुसलमानों को बड़ा भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि उन्हें इससे कोई नुकसान नहीं होगा। भागवत ने यह भी कहा कि अल्पसंख्यकों को लेकर विभाजन के समय जो वादा किया गया था। उसी का पालन अब भारत कर रहा है, लेकिन पाकिस्तान ने ऐसा नहीं किया। भागवत ने जोर देते हुए कहा कि धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद या लोकतंत्र भारत को दुनिया से सीखने की जरूरत नहीं है। भागवत ने कहा कि यह हमारी परंपरा और खून में रहा है। हमारे देश ने इसे लागू किया और जीवित रखा।

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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत बुधवार को नानी गोपाल महंत द्वारा लिखी “नानी गोपाल महंत पर नागरिकता बहस: असम और इतिहास की राजनीति” नामक पुस्तक का गुवाहाटी में विमोचन किया। इसी मौके पर उन्होंने कहा कि, दुनिया में एक भी उदाहरण ऐसा नहीं है कि जिसमें इतनी सारी विविधताएंं इकट्ठा चार हजार साल चलीं। बिना झगड़ा किए आपस में मिल-जुलकर चलीं और सब की सब कायम हैं आज भी। राजनीतिक लाभ के लिए दोनों विषयों (सीएए-एनआरसी) को हिन्दू मुसलमान का विषय बना दिया। यह हिन्दू मुसलमान का विषय ही नहीं है।

गुवाहाटी में बुधवार को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि CAA किसी भारत के नागरिक के विरुद्ध बनाया हुआ कानून नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत के नागरिक मुसलमान को CAA से कुछ नुकसान नहीं पहुंचेगा। विभाजन के बाद एक आश्वासन दिया गया कि हम अपने देश के अल्पसंख्यकों की चिंता करेंगे। हम आज तक उसका पालन कर रहे हैं। पाकिस्तान ने नहीं किया।

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