लॉंच हुआ देश का सबसे भारी उपग्रह जीसैट-11, बढ़ेगी इंटरनेट की स्पीड

लॉंच हुआ देश का सबसे भारी उपग्रह जीसैट-11, बढ़ेगी इंटरनेट की स्पीड
लॉंच हुआ देश का सबसे भारी उपग्रह जीसैट-11, बढ़ेगी इंटरनेट की स्पीड

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ISRO ने बुधवार को अब तक का अपना सबसे वजनी सैटेलाइट लॉंच कर दिया। भारतीय समय के अनुसार बुधवार की रात 2 से साढ़े तीन बजे के आसपास दक्षिणी अमेरिका के फ्रेंच गुयाना के एरियानेस्पेस के एरियाने-5 रॉकेट से भारत ले ‘सबसे अधिक वजनी’ उपग्रह GSAT-11 को लॉन्च किया गया।

India Heaviest Satellite Gsat 11 Launched Successfully :

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की ओर से पता चला कि करीब 5,854 किलोग्राम वजन का GSAT-11 देशभर में ब्रॉडबैंड सेवाएं उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगा। बता दें कि यह ISRO का बनाया अब तक का ‘सबसे अधिक वजन’ वाला उपग्रह है साथ ही इसका जीवनकाल 15 साल से भी अधिक का है। शुरुआत में उपग्रह जियो इक्वीवैलेंट ट्रांसफर ऑर्बिट में ले जाया जाएगा और उसके बाद उसे जियो स्टैटिक ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा। ऐसे में अगर यह सेटैलाइट सही सलामत अपनी कक्षा में स्थापित हो जाता है, तो यह देश के टेलीकॉम सेक्टर के लिए काफी अच्छा साबित होगा

GSAT-11 की खासियत

  • यह ISRO का अभी तक का सबसे वजनी उपग्रह है। जिसका वजन 5,854 किलोग्राम है।
  • इस सैटेलाइट को बनाने में लगभग 500 करोड़ की लागत आई है।
  • इसकी आयु यानी कि जीवनकाल 15 साल से अधिक की है।
  • इसका हर सोलर पैनल चार मीटर से बड़ा है। ये 11 किलोवाट की ऊर्जा का उत्पादन करेगा।
  • उच्च क्षमता वाला यह थ्रोपुट संचार उपग्रह हर सेकंड 100 गीगाबाइट से ऊपर की ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी देगा। साथ ही हाई क्वालिटी टेलीकॉम और डीटीएच सेवाओं में भी अहम भूमिका निभाएगा।
  • ये पहले से मौजूद इनसैट या GSAT सैटेलाइट्स से ज्यादा स्पीड देगा।
  • बता दें कि इसके बादअगले साल ISRO GSAT-20 भी लॉन्च करेगा।
नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ISRO ने बुधवार को अब तक का अपना सबसे वजनी सैटेलाइट लॉंच कर दिया। भारतीय समय के अनुसार बुधवार की रात 2 से साढ़े तीन बजे के आसपास दक्षिणी अमेरिका के फ्रेंच गुयाना के एरियानेस्पेस के एरियाने-5 रॉकेट से भारत ले 'सबसे अधिक वजनी' उपग्रह GSAT-11 को लॉन्च किया गया।भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की ओर से पता चला कि करीब 5,854 किलोग्राम वजन का GSAT-11 देशभर में ब्रॉडबैंड सेवाएं उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगा। बता दें कि यह ISRO का बनाया अब तक का 'सबसे अधिक वजन' वाला उपग्रह है साथ ही इसका जीवनकाल 15 साल से भी अधिक का है। शुरुआत में उपग्रह जियो इक्वीवैलेंट ट्रांसफर ऑर्बिट में ले जाया जाएगा और उसके बाद उसे जियो स्टैटिक ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा। ऐसे में अगर यह सेटैलाइट सही सलामत अपनी कक्षा में स्थापित हो जाता है, तो यह देश के टेलीकॉम सेक्टर के लिए काफी अच्छा साबित होगाGSAT-11 की खासियत
  • यह ISRO का अभी तक का सबसे वजनी उपग्रह है। जिसका वजन 5,854 किलोग्राम है।
  • इस सैटेलाइट को बनाने में लगभग 500 करोड़ की लागत आई है।
  • इसकी आयु यानी कि जीवनकाल 15 साल से अधिक की है।
  • इसका हर सोलर पैनल चार मीटर से बड़ा है। ये 11 किलोवाट की ऊर्जा का उत्पादन करेगा।
  • उच्च क्षमता वाला यह थ्रोपुट संचार उपग्रह हर सेकंड 100 गीगाबाइट से ऊपर की ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी देगा। साथ ही हाई क्वालिटी टेलीकॉम और डीटीएच सेवाओं में भी अहम भूमिका निभाएगा।
  • ये पहले से मौजूद इनसैट या GSAT सैटेलाइट्स से ज्यादा स्पीड देगा।
  • बता दें कि इसके बादअगले साल ISRO GSAT-20 भी लॉन्च करेगा।