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श्रीलंका: भारतीय सूत्रों ने किया था Alert, नज़रअंदाज़ करना पड़ा महंगा

By टीम पर्दाफाश 
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नई दिल्ली। भारत का पड़ोसी देश श्रीलंका में रविवार को हुए आठ सीरियल ब्लास्ट ने इस देश को देहला के रख दिया। इन हमलों में 300 से ज्यादा लोग मारे गए। हालांकि भारत ने वहां संभावित जिहादी हमले की खुफिया जानकारी दी थी। भारतीय एजेंसियों ने नैशनल तौहीद जमात (एनटीजे) के बारे में भी जानकारी देते हुए बताया था कि इस संगठन के कई सहयोगी, फॉलोअर पाकिस्तान में हैं और यह संगठन लंका में हमले की प्लानिंग कर रहा है।

इस बात को मानते हुए श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने कहा, ‘भारत ने खुफिया जानकारी दी थी, लेकिन हम इस पर कैसे कार्रवाई करें, इसको लेकर लापरवाही हुई। खुफिया जानकारी नीचे तक नहीं पहुंची।’ साथ ही उन्होंने कहा कि श्रीलंका के जांचकर्ता पाकिस्तान और चीन सहित कई देशों के साथ संपर्क में थे।

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दरअसल, भारतीय एजेंसियां पूर्वी श्रीलंका में कट्टरपंथी इस्लामी मान्यताओं के प्रभाव पर नजर रख रही थीं। एजेंसियों ने श्रीलंका सरकार को चेतावनी भी दी थी कि यह क्षेत्र लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों ऑपरेशनल जोन बन सकता है। एजेंसियों के अनुसार आतंकी संगठन लश्कर श्रीलंका में कट्टरपंथ को बढ़ावा देने में जुटा है।

यही नहीं एक श्रीलंकाई रक्षा सूत्र और एक भारत सरकार के सूत्र ने कहा कि भारतीय खुफिया अधिकारियों ने पहले विस्फोट से करीब 2 घंटे पहले अपने श्रीलंकाई समकक्षों से संपर्क किया था और हमले को लेकर आगाह किया था। उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि हमलावर विशेष तौर पर गिरिजाघरों पर हमला कर सकते हैं।

वहीं, श्रीलंका के हिंसक समूहों के पाकिस्तान से संबंध का खुलासा लश्कर के लिए धन जुटाने वाले संगठन फलाह-ए-इंसानियत ने किया था। फलाह ने 2016 में दिए एक विज्ञापन में दावा किया था कि सीरिया, अफगानिस्तान, म्यांमार, सोमालिया के अलावा उसकी मौजूदगी श्रीलंका में भी है। एनटीजे लश्कर की तरह ही कट्टरपंथ को बढ़ावा देने की कोशिश में लगा रहता था। बाद में यह संगठन आपदा प्रबंधन जैसे कामों में लग गया और 2004 में आई सुनामी के दौरान श्रीलंका और मालदीव में लोगों की मदद भी की थी।

बता दें, भारतीय खुफिया एजेंसियों ने एनटीजे के हमले के बारे में जानकारी दी थी। भारतीय एजेंसियों ने 4 अप्रैल तक एनटीजे द्वारा श्रीलंका में हमले की साजिश रचने की जानकारी दी थी। न्यू यॉर्क टाइम्स में प्रकाशित खबरों के मुताबिक भारतीय एजेंसियों की चेतावनी को नजरअंदाज किया गया।

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