भारत का सख्त रुख, पाकिस्तान को जाने वाले पानी पर लगाई रोक

NITIN
भारत का सख्त रुख, पाकिस्तान को जाने वाले पानी पर लगाई रोक

नई दिल्ली। पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को लेकर भारत ने कडा रुख अपना लिया है। पड़ोसी देश पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए अब तक भारत के कोटे का वह पानी जो पाक को दिया जाता था, उसे आगामी कुछ सालों में यमुना नदी में डायवर्ट किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी है।

India To Stop Its Water To Pakistan After Pulwama Terror Attack Nitin Gadkari :

एक कार्यक्रम के दौरान केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, “भारत और पाकिस्तान होने बाद जो हमारी तीन नदियां पाकिस्तान को मिली थी और तीन भारत को मिली थी। हमारी तीन नदियों के अधिकार का पानी पाकिस्तान में जा रहा था, अब उसपर तीन परियोजना शुरू कर यह पानी यमुना में वापस ला रहे हैं।”

बता दें कि व्यास, रावी और सतलज नदियों का पानी भारत से होकर पाकिस्तान पहुंचता है। मतलब, आतंक की खेती करने वाले पाकिस्तान में सूखा पड़ जाएगा। वो अब बूंद-बूंद को तरसेगा। बता दें कि इससे पहले भी कई बार यह मांग की जा चुकी है कि सिंधु जल समझौते के बावजूद जो पानी पाक को दिया जा रहा है, उसे वापस भारतीय इलाकों में इस्तेमाल किया जाए। ऐसे में इस बार नितिन गडकरी ने इस बयान के साथ समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं।

नई दिल्ली। पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान को लेकर भारत ने कडा रुख अपना लिया है। पड़ोसी देश पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए अब तक भारत के कोटे का वह पानी जो पाक को दिया जाता था, उसे आगामी कुछ सालों में यमुना नदी में डायवर्ट किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी है।एक कार्यक्रम के दौरान केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, "भारत और पाकिस्तान होने बाद जो हमारी तीन नदियां पाकिस्तान को मिली थी और तीन भारत को मिली थी। हमारी तीन नदियों के अधिकार का पानी पाकिस्तान में जा रहा था, अब उसपर तीन परियोजना शुरू कर यह पानी यमुना में वापस ला रहे हैं।"बता दें कि व्यास, रावी और सतलज नदियों का पानी भारत से होकर पाकिस्तान पहुंचता है। मतलब, आतंक की खेती करने वाले पाकिस्तान में सूखा पड़ जाएगा। वो अब बूंद-बूंद को तरसेगा। बता दें कि इससे पहले भी कई बार यह मांग की जा चुकी है कि सिंधु जल समझौते के बावजूद जो पानी पाक को दिया जा रहा है, उसे वापस भारतीय इलाकों में इस्तेमाल किया जाए। ऐसे में इस बार नितिन गडकरी ने इस बयान के साथ समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं।