इस देश में भारतीय विरासत की जल्द होगी नीलामी

kashmiri shawl
इस देश में भारतीय विरासत की जल्द होगी नीलामी

नई दिल्ली। कश्मीरी शॉलों की लोकप्रियता पूरे विश्व में हैं।हाथ से की गई कारीगरी लोगों का दिल जीत लेती है और खरीदने पर मजबूर कर देती है। ऐसे ही एक हाथ से बुने गए 17वीं सदी के दुर्लभ कश्मीरी शॉलों के एक निजी संग्रह की ब्रिटेन के लंदन में नीलामी होगी। नीलामीकर्ता क्रिस्टी ने इन शॉलों को ‘कीमती विरासत’ करार देते कहा कि इनकी ऑनलाइन नीलामी 11-18 जून के बीच करीब 90 हजार रुपये से 10 लाख रुपये तक में की जाएगी।

Indian Heritage Will Soon Be Auctioned In This Country :

साथ ही क्रिस्टी ने ये भी बताया, ‘कश्मीरी शॉलों के संग्रह की नीलामी बेहद महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि इन्हें 17वीं से लेकर 19वीं सदी के उत्तरार्ध तक हाथों से बुना गया है। पुरुष और महिलाओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ये शॉल पीढ़ी दर पीढ़ी विरासत के रूप में हस्तांतरित होते रहे।

वहीं, शॉलों के ऊन की गुणवत्ता और इन पर की गई कसीदाकारी अद्वितीय है। ये शॉल कश्मीर की उम्दा बुनाई कौशल का भी प्रदर्शन करते हैं।’ इन शॉलों को गुरुवार को लंदन में स्थित क्रिस्टी आर्ट ऑफ द इस्लामिक एंड इंडियन व‌र्ल्ड में प्रदर्शित किया जाएगा।

नई दिल्ली। कश्मीरी शॉलों की लोकप्रियता पूरे विश्व में हैं।हाथ से की गई कारीगरी लोगों का दिल जीत लेती है और खरीदने पर मजबूर कर देती है। ऐसे ही एक हाथ से बुने गए 17वीं सदी के दुर्लभ कश्मीरी शॉलों के एक निजी संग्रह की ब्रिटेन के लंदन में नीलामी होगी। नीलामीकर्ता क्रिस्टी ने इन शॉलों को 'कीमती विरासत' करार देते कहा कि इनकी ऑनलाइन नीलामी 11-18 जून के बीच करीब 90 हजार रुपये से 10 लाख रुपये तक में की जाएगी। साथ ही क्रिस्टी ने ये भी बताया, 'कश्मीरी शॉलों के संग्रह की नीलामी बेहद महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि इन्हें 17वीं से लेकर 19वीं सदी के उत्तरार्ध तक हाथों से बुना गया है। पुरुष और महिलाओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ये शॉल पीढ़ी दर पीढ़ी विरासत के रूप में हस्तांतरित होते रहे। वहीं, शॉलों के ऊन की गुणवत्ता और इन पर की गई कसीदाकारी अद्वितीय है। ये शॉल कश्मीर की उम्दा बुनाई कौशल का भी प्रदर्शन करते हैं।' इन शॉलों को गुरुवार को लंदन में स्थित क्रिस्टी आर्ट ऑफ द इस्लामिक एंड इंडियन व‌र्ल्ड में प्रदर्शित किया जाएगा।