भारतीय नौसेना की बढ़ेगी ताकत , US ने बेची 7,100 करोड़ रुपये की नौसैनिक तोपें

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भारतीय नौसेना की बढ़ेगी ताकत , US ने बेची 7,100 करोड़ रुपये की नौसैनिक तोपें

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने भारत को एक अरब डॉलर यानी करीब 7,100 करोड़ रुपये की नौसैनिक तोपें बेचने का फैसला लिया है। इन तोपों के मिलने से भारतीय नौसेना की मारक क्षमता में उल्लेखनीय इजाफा होगा। बता दें कि बीते तीन साल में भारत ने करीब 5.67 अरब डॉलर के रक्षा समझौते किए हैं। लोकसभा में रक्षा राज्यमंत्री श्रीपद नाइक ने कहा कि दोनों देशों के बीच 21 रक्षा सौदे हुए हैं।

Indian Navy To Increase Strength Us Sold Naval Artillery Worth Rs 7100 Crore :

दरअसल, अमेरिका की रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने मंगलवार को वाशिंगटन में जारी अपनी अधिसूचना में कहा कि 13एमके-45 पांच इंच/62 कैलिबर (एमओडी-4) नौसैनिक तोपों और उनसे संबंधित उपकरणों की प्रस्तावित विदेशी सैन्य बिक्री की अनुमानित लागत 1.0210 अरब डॉलर है। इन तोपों का इस्तेमाल युद्धपोतों तथा युद्धक विमानों के खिलाफ और तटों पर बमबारी के लिए किया जाता है। अधिसूचना के मुताबिक, इन तोपों का निर्माण बीएई सिस्टम्स लैंड एंड आर्मामेंट्स द्वारा किया जाएगा और प्रस्तावित बिक्री से भारत की क्षमता में इजाफा होगा और भारतीय नौसेना मौजूदा एवं भविष्य के खतरों से बेहतर ढंग से निपटने में सक्षम होगी।

वहीं, इस फैसले से भारत उन चुनिंदा देशों में शुमार हो गया है जिन्हें अमेरिका ने अपनी नौसैनिक तोपों के आधुनिक संस्करण (एमओडी-4) बेचने का निर्णय किया है। जिन अन्य देशों को अमेरिका ने अभी तक ये तोपें बेची हैं उनमें आस्ट्रेलिया, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं। अमेरिका ने थाइलैंड को भी एमओडी-4 संस्करण की एक तोप बेची है। भारत के अलावा अमेरिका ने ब्रिटेन और कनाडा समेत कुछ अन्य सहयोगी व मित्र देशों को भी इन तोपों की बिक्री का फैसला किया है।

बता दें कि बीते तीन सालों में भारत ने करीब 5.67 अरब डॉलर के रक्षा समझौते किए हैं। लोकसभा में रक्षा राज्य मंत्री श्रीपद नाइक ने कहा कि दोनों देशों के बीच 21 रक्षा सौदे हुए हैं। अमेरिका ने ही नहीं बल्कि फ्रांस ने भी तीन राफेल लड़ाकू विमान भारत को सौंप दिए हैं। अब इन पर एयरफोर्स के पायलटों और इंजिनियरों को ट्रेनिंग दी जाएगी। इतना ही नहीं 8 अक्टूबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पैरिस में पहला राफेल जेट सौंपा था। 4 राफेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप मई 2020 में भारत आएगी।

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने भारत को एक अरब डॉलर यानी करीब 7,100 करोड़ रुपये की नौसैनिक तोपें बेचने का फैसला लिया है। इन तोपों के मिलने से भारतीय नौसेना की मारक क्षमता में उल्लेखनीय इजाफा होगा। बता दें कि बीते तीन साल में भारत ने करीब 5.67 अरब डॉलर के रक्षा समझौते किए हैं। लोकसभा में रक्षा राज्यमंत्री श्रीपद नाइक ने कहा कि दोनों देशों के बीच 21 रक्षा सौदे हुए हैं। दरअसल, अमेरिका की रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी ने मंगलवार को वाशिंगटन में जारी अपनी अधिसूचना में कहा कि 13एमके-45 पांच इंच/62 कैलिबर (एमओडी-4) नौसैनिक तोपों और उनसे संबंधित उपकरणों की प्रस्तावित विदेशी सैन्य बिक्री की अनुमानित लागत 1.0210 अरब डॉलर है। इन तोपों का इस्तेमाल युद्धपोतों तथा युद्धक विमानों के खिलाफ और तटों पर बमबारी के लिए किया जाता है। अधिसूचना के मुताबिक, इन तोपों का निर्माण बीएई सिस्टम्स लैंड एंड आर्मामेंट्स द्वारा किया जाएगा और प्रस्तावित बिक्री से भारत की क्षमता में इजाफा होगा और भारतीय नौसेना मौजूदा एवं भविष्य के खतरों से बेहतर ढंग से निपटने में सक्षम होगी। वहीं, इस फैसले से भारत उन चुनिंदा देशों में शुमार हो गया है जिन्हें अमेरिका ने अपनी नौसैनिक तोपों के आधुनिक संस्करण (एमओडी-4) बेचने का निर्णय किया है। जिन अन्य देशों को अमेरिका ने अभी तक ये तोपें बेची हैं उनमें आस्ट्रेलिया, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं। अमेरिका ने थाइलैंड को भी एमओडी-4 संस्करण की एक तोप बेची है। भारत के अलावा अमेरिका ने ब्रिटेन और कनाडा समेत कुछ अन्य सहयोगी व मित्र देशों को भी इन तोपों की बिक्री का फैसला किया है। बता दें कि बीते तीन सालों में भारत ने करीब 5.67 अरब डॉलर के रक्षा समझौते किए हैं। लोकसभा में रक्षा राज्य मंत्री श्रीपद नाइक ने कहा कि दोनों देशों के बीच 21 रक्षा सौदे हुए हैं। अमेरिका ने ही नहीं बल्कि फ्रांस ने भी तीन राफेल लड़ाकू विमान भारत को सौंप दिए हैं। अब इन पर एयरफोर्स के पायलटों और इंजिनियरों को ट्रेनिंग दी जाएगी। इतना ही नहीं 8 अक्टूबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पैरिस में पहला राफेल जेट सौंपा था। 4 राफेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप मई 2020 में भारत आएगी।