रेलवे अपने 23 स्टेशनों की लगाएगी बोली

नई दिल्ली। केन्द्रीय रेल मंत्रालय ने देश के रेलवे स्टेशनों को आधुनिक सुख सुविधाओं से लैस बनाने के लिए पहल करते हुए निजी कंपनियों को भागीदारी देने की योजना बनाई है। रेल मंत्रालय ने इस योजना को रेलवे पु​नर्विकास कार्यक्रम का नाम दिया है। शुरूआत में देश के 23 रेलवे स्टेशनों को चिन्हित किया गया है। जिनमें कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन, कोलकाता का हावडा, मुंबई सेंट्रल, इलाहाबाद जंक्शन और उदयपुर का नाम भी शामिल है। इस कार्यक्रम के तहत भारतीय रेल अपने स्टेशनों को 45 सालों की लीज पर देने के लिए बोली लगाएगी।




मिली जानकारी के मुताबिक रेलवे की बोली में कामयाब रहने वाली कंपनी उस स्टेशन को आधुनिक बनाने की जिम्मेदार होगी। स्टेशनों की सफाई, यात्रियों के बैठने की व्यवस्था, पेयजल की व्यवस्था, खानपान स्टॉल्स से लेकर टिकटों की बि​क्री, माल भाड़े की बुकिंग और ट्रेन के प्लेटफार्म पर रुकने तक की कीमत वही कंपनी बसूल करेगी। कंपनियों को अपने सरकारी मानकों के आधार पर स्टेशनों का कायाकल्प करना होगा।

खबरों की माने तो कानपुर के सेंट्रल रेलवे स्टेशन को पीपीपी यानी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत पुनर्विकसित करने के लिए बोली 200 करोड़ से शुरू होगी। जो कंप​नी इस जिम्मेदारी को लेने के लिए तैयार होती है उसे कम से 200 करोड़ रूपए सरकार को देने होंगे। सफल रहने वाली कंपनी इस स्टेशन को विकसित करने का काम करेगी। जो स्टेशन पर मिलने वाली सेवाओं की कीमत अपने हिसाब से बसूल करेगी।

ऐसा माना जा रहा है कि इन बड़े रेलवे स्टेशनों को अत्याधुनिक बनाने के अलावा यात्रियों को खरीददारी के लिए मॉल की तरह विकसित किया जाएगा। जहां मल्टी ब्रांड स्टोर्स, सिनेमाघर, रेस्टोरेन्टस, यात्रियों के ठहरने के लिए होटल्स और कॉफी शॉप्स का अनुभव भी मिल सकेगा। हालांकि इसके साथ ही इन स्टेशनस पर आने वाले यात्रियों को आज मिलने वाली मुफ्त सुविधाओं के लिए आने वाले समय में कीमत भी चुकानी पड़ सकती है।




जानकारों की माने तो भारतीय रेल पास देश के बड़े शहरों में अपना एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर है। जिन स्टेशनों को आधुनिक बनाने की बात की जा रही है इनके आस पास करोड़ों की कीमत की जमीनें बेकार पड़ी हैं। जो वा​स्तविकता में रेलवे के लिए आमदनी का श्रोत बन सकती है। इसी सोच के साथ निजी कंपनियों की भागीदारी से रेलवे ने इस योजना को तैयार किया है। अगर स्टेशन पर लोगों को बेहतर सुविधाओं के साथ अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी ​तो निश्चित रूप से यात्री उनका लाभ उठाना चाहेंगे। यह पहल रेल नेटवर्क को बढ़ाने की दिशा में एक अच्छा आर्थिक योगदान दे सकती है। इन स्टेशनों से होने वाली आमदनी से रेलवे की निवेश क्षमता निश्चित ही बढ़ेगी। नए नेटवर्क से रेलवे की पहुंच बढ़ेगी।