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एशिया की सबसे खराब करंसी बना भारतीय रुपया, एक डॉलर की कीमत 74 रुपये के पार

By रवि तिवारी 
Updated Date

नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में भारी बिकवाली, कच्चे तेल के दाम में गिरावट और कोरोना वायरस (Coronavirus) आपदा ने भारतीय करंसी (Indian Currency) रुपये की कमर तोड़ कर रख दी है। ताजा खबरों के अनुसार रुपया 52 हफ्तों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। एक डॉलर के मुकाबले रूपया 74.16 रुपये पर पहुंच गया है। इससे पहले यह कीमत 73.7825 रुपये थी। आपको बता दें कि इस वक्त भारतीय रुपये की स्थिति एशिया में सिर्फ पाकिस्तान और दक्षिण कोरिया से बेहतर है। 2019 से अब तक रुपये में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट हुई है।    

सता रहा मंदी का डर

घरेलू इक्विटी मार्केट (Domestic Equity Market) में बड़ी गिरावट और कोरोना वायरस आपदा की वजह से अर्थव्यवस्था में सुस्ती (Economic Slowdown) की आशंका को देखते हुए फॉरेक्स मार्केट (Forex Market) में रुपये की शुरुआत 73.99 के स्तर पर हुई। इसके बाद 16 पैसे की गिरावट के साथ यह 74.03 के स्तर पर फिसल गया। हालांकि, विदेशी बाजारों में अमेरिकन करंसी में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से रुपये में हल्का सपोर्ट देखने को मिला, लेकिन ट्रेडर्स का मानना है कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मंदी का डर भारतीय रुपये की हालत और भी पस्त कर सकता है।

डिमांड सप्लाई तय करता है भाव

करेंसी एक्सपर्ट के अनुसार रुपये की कीमत पूरी तरह इसकी डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करती है। इंपोर्ट और एक्सपोर्ट का भी इस पर असर पड़ता है। हर देश के पास उस विदेशी मुद्रा का भंडार होता है, जिसमें वो लेन-देन करता है। विदेशी मुद्रा भंडार के घटने और बढ़ने से ही उस देश की मुद्रा की चाल तय होती है। अमरीकी डॉलर को वैश्विक करेंसी का रुतबा हासिल है और ज्यादातर देश इंपोर्ट का बिल डॉलर में ही चुकाते हैं।

शेयर मॉर्केट में पांच साल में सबसे बड़ी गिरावट

स्टॉक मार्केट भी आज भारी गिरावट के साथ खुला है और शुरुआती कारोबार में भी ऐतिहासिक गिरावट देखी जा रही है। सेसेंक्स में 21 सौ से ज्यादा अंकों की गिरावट दर्ज की गयी है, निफ्टी में भी 550 अंकों से ज्यादा की गिरावट है। बड़ी वजह कोरोना बताया जा रहा है क्योंकि आज चीन और जापान के शेयर बाज़ारों में भी भारी गिरावट दर्ज की गयी है। यह पांच साल में सबसे बड़ी गिरावट बताई जा रही है।

शेयर बाजार में सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान भारी गिरावट के चलते निवेशकों के करीब पांच लाख करोड़ रुपये डूब गए।

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