भारत-चीन सीमा पर 45 साल में पहली बार भारतीय जवान शहीद

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नई दिल्ली: भारत और चीन का बॉर्डर जहां पिछले 4 दशकों से हिंसा नहीं देखने को मिली वहां माहौल सोमवार रात अचानक बदल गया। चीन की तरफ से लद्दाख बॉर्डर पर हिंसा हुई जिसमें हमने अपनी सेना के एक अधिकारी और दो जवानों को खो दिया। ऐसा करीब 45 साल बाद हुआ है कि भारत-चीन बॉर्डर पर हिंसा में किसी सैनिक की शहादत हुई हो। वैसे माना जाता है कि LAC बॉर्डर पर आखिरी फायरिंग (दोनों तरफ से) 1967 में हुई थी, लेकिन यह पूरा सच नहीं है। चीन की तरफ से 1975 में भी भारतीय सैनिकों पर हमला हुआ था।

Indian Soldiers Martyred For The First Time In 45 Years On The India China Border :

1967 में, पूरी कहानी
भारत और चीन के बीच आखिरी गोली के रूप में साल 1967 को याद किया जाता है। यानी 53 साल पहले। यह हिंसक झड़प सिक्किम में हुई थी। चीन वहां इसलिए चिढ़ा हुआ था क्योंकि 1962 की जंग के बाद भारत उस इलाके में अपनी स्थिति लगातार बेहतर कर रहा था। 1967 की इस जंग में भारत के 80 जवान शहीद हुए थे। वहीं चीन के करीब 400 सैनिकों ने अपनी जान गंवाई थी।

1975 में चीन ने फिर किया था हमला
दोनों देशों की तरफ से आखिरी गोलीबारी 1967 में जरूर हुई थी लेकिन इसके 8 साल बाद भी चीन ने घात लगाकर हमला किया था। 1975 के इस हमले में चार भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। तब भारत सरकार ने कहा था कि चीन ने सीमा क्रॉस की है, लेकिन हरबार की तरह चीन ने इससे इनकार किया था।

10वीं और 12वीं के छात्र चाहे तो ना दें बोर्ड की परीक्षाएं, प्री-बोर्ड के आधार पर दिए जाएंगे अंक

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