भारत की अमेरिका को दो टूक, रूस से क्या खरीदना है, क्या नहीं, हमे न बताएं

s jaishankar
भारत की अमेरिका को दो टूक, रूस से क्या खरीदना है, क्या नहीं, हमे न बताएं

नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर इस समय अमेरिका के दौरे पर हैं। उन्होंने अमेरिका की ओर से प्रतिबंध के खतरे के बावजूद रूस से मिसाइल हथियार प्रणाली खरीदने के भारत के अधिकार पर खुलकर जवाब दिया है। जयशंकर ने कहा कि भारत अमेरिका की चिंताओं पर चर्चा कर रहा है लेकिन उन्होंने उन्होंने रूस से एस-400 खरीदने के संबंध में खुलकर कहा कि हम नहीं चाहते कि कोई देश हमें बताए कि रूस से क्या खरीदना है और क्या नहीं। यह हमारा अधिकार है कि हम किससे क्या खरीदते हैं।

Indias America Bluntly What To Buy From Russia What Not Dont Tell Us :

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो के साथ बैठक से पहले कहा कि भारत रूस से मिसाइल डिफेंस सिस्टम एस-400 खरीदने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते कि कोई देश हमें बताए कि रूस से क्या खरीदना है और क्या नहीं। हमने हमेशा इस बात को कहा है कि हम क्या सैन्य उपकरण खरीदते हैं, यह हमारा संप्रभु अधिकार है। इसी तरह हम नहीं चाहते कि कोई हमें बताए कि हमें अमेरिका से क्या खरीदना है और क्या नहीं।’

जयशंकर ने कहा कि इस चयन का अधिकार हमारा है और मुझे लगता है कि इस बात को समझना हरेक के हित में है। रूस की यूक्रेन एवं सीरिया में सैन्य संलिप्तता और अमेरिकी चुनावों में हस्तक्षेप के आरोपों के कारण अमेरिका ने 2017 कानून के तहत उन देशों पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किया है जो रूस से बड़े हथियार खरीदते हैं।

जयशंकर ने अमेरिका के साथ अच्छे संबंधों को सराहा लेकिन ईरान के संबंध में अमेरिका के नजरिए को लेकर भारत के मतभेद का जिक्र भी किया। अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए सभी देशों को उससे तेल खरीदने से रोकने के लिए उन पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है। ट्रंप प्रशासन ने भारत समेत ईरान से तेल खरीदने वाले कई देशों को मिली छूट समाप्त कर दी थी।

जयशंकर ने ईरान पर बातचीत को लेकर आगे कोई भी टिप्पणी करने से इंकार करते हुए कहा कि हमें बार-बार भरोसा दिलाया गया है कि ऊर्जा के प्रति किफायती पहुंच में कोई बदलाव नहीं होगा। भारत ईरान के चाबहार बंदरगाह का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है ताकि पाकिस्तान से न जाकर, अफगानिस्तान की ओर से तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

आपको बता दें कि भारत ने पिछले साल रूस के साथ एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की खरीद का करार किया है। अमेरिका ने इसपर नाराजगी जाहिर करते हुए भारत पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है। भारत को रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की पहली खेप साल 2021 के मध्य तक प्राप्त हो जाएगी। भारत ने दीर्घकालिक सुरक्षा जरूरतों के लिए पांच अक्तूबर 2018 को नई दिल्ली में 19वें भारत-रूस वार्षिक द्विपक्षीय सम्मेलन के दौरान पांच एस-400 प्रणालियों की खरीद के लिए रूस के साथ 5.43 बिलियन डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर इस समय अमेरिका के दौरे पर हैं। उन्होंने अमेरिका की ओर से प्रतिबंध के खतरे के बावजूद रूस से मिसाइल हथियार प्रणाली खरीदने के भारत के अधिकार पर खुलकर जवाब दिया है। जयशंकर ने कहा कि भारत अमेरिका की चिंताओं पर चर्चा कर रहा है लेकिन उन्होंने उन्होंने रूस से एस-400 खरीदने के संबंध में खुलकर कहा कि हम नहीं चाहते कि कोई देश हमें बताए कि रूस से क्या खरीदना है और क्या नहीं। यह हमारा अधिकार है कि हम किससे क्या खरीदते हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो के साथ बैठक से पहले कहा कि भारत रूस से मिसाइल डिफेंस सिस्टम एस-400 खरीदने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते कि कोई देश हमें बताए कि रूस से क्या खरीदना है और क्या नहीं। हमने हमेशा इस बात को कहा है कि हम क्या सैन्य उपकरण खरीदते हैं, यह हमारा संप्रभु अधिकार है। इसी तरह हम नहीं चाहते कि कोई हमें बताए कि हमें अमेरिका से क्या खरीदना है और क्या नहीं।' जयशंकर ने कहा कि इस चयन का अधिकार हमारा है और मुझे लगता है कि इस बात को समझना हरेक के हित में है। रूस की यूक्रेन एवं सीरिया में सैन्य संलिप्तता और अमेरिकी चुनावों में हस्तक्षेप के आरोपों के कारण अमेरिका ने 2017 कानून के तहत उन देशों पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किया है जो रूस से बड़े हथियार खरीदते हैं। जयशंकर ने अमेरिका के साथ अच्छे संबंधों को सराहा लेकिन ईरान के संबंध में अमेरिका के नजरिए को लेकर भारत के मतभेद का जिक्र भी किया। अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए सभी देशों को उससे तेल खरीदने से रोकने के लिए उन पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है। ट्रंप प्रशासन ने भारत समेत ईरान से तेल खरीदने वाले कई देशों को मिली छूट समाप्त कर दी थी। जयशंकर ने ईरान पर बातचीत को लेकर आगे कोई भी टिप्पणी करने से इंकार करते हुए कहा कि हमें बार-बार भरोसा दिलाया गया है कि ऊर्जा के प्रति किफायती पहुंच में कोई बदलाव नहीं होगा। भारत ईरान के चाबहार बंदरगाह का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है ताकि पाकिस्तान से न जाकर, अफगानिस्तान की ओर से तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। आपको बता दें कि भारत ने पिछले साल रूस के साथ एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की खरीद का करार किया है। अमेरिका ने इसपर नाराजगी जाहिर करते हुए भारत पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है। भारत को रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की पहली खेप साल 2021 के मध्य तक प्राप्त हो जाएगी। भारत ने दीर्घकालिक सुरक्षा जरूरतों के लिए पांच अक्तूबर 2018 को नई दिल्ली में 19वें भारत-रूस वार्षिक द्विपक्षीय सम्मेलन के दौरान पांच एस-400 प्रणालियों की खरीद के लिए रूस के साथ 5.43 बिलियन डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।