शहीद होने से पहले बोला जवान, मां दिवाली मना रहा हूं लो सुन लो आवाज

कुरुक्षेत्र (पिहोवा)। जम्मू के आरएस पुरा सेक्टर में पिहोवा के रहने वाले बीएसएफ जवान हवलदार सुशील कुमार के शहीद होने की खबर मिलते ही उनके घर पर लोगों की भीड़ इक्कठा हो गयी और घर वालों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया है। परिवारजनो को सांत्वना देने के लिए आसपास के लोग और रिश्तेदार पहुँच गए हैं। सुशील के घर पर सुबह से ही जिला प्रशाशन के अफसरों के पहुंचने का सिलसिला भी बना हुआ था।




सुशील कुमार का पार्थिव शरीर शनिवार रात 2 बजे ट्रेन से दिल्ली से कुरुक्षेत्र लाया गया। मंगलवार सुबह 7: 30 बजे उनके पार्थिव शरीर को कुरुक्षेत्र से पिहोवा पहुँचाया गया| और वहां बड़ी संख्या में लोग पहले से ही अंतिम दर्शन के लिए इन्तजार कर रहे थे। पिहोवा चौक से बीएसएफ जवान अपने कंधों पर सुशील के पार्थिव शरीर को उनके घर तक लेकर पहुंचे। परिजनों के अंतिम दर्शन के बाद संस्कार के लिए ले जाया गया। जहां बीएसएफ की एक टुकड़ी ने सलामी दी और शहीद सुशील के बेटे मोहित ने मुखाग्नि दी। इस दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए और उनके झंडें को जूते मारे।

परिवारजनो के मुताबिक, सुशील से उनकी करीब 12 बजे बात हुई थी। सुशील ने आखिरी बार अपनी मां सोमादेवी से बात किया था। सोमादेवी ने बताया कि बात करते वक्त पीछे से गोली चलने की आवाजे आ रही थी तो उन्होंने पूछा कि ये गोलियों की आवाज क्यों आ रही है, तो इस पर सुशील कुमार ने जवाब दिया कि मां हम दिवाली मना रहे हैं उसकी बात सुन कर मां ने कहा कि अभी दिवाली में काफी टाइम है तो सुशील कुमार ने कहा यहां तो हर रोज दिवाली मनाई जाती है।



सुशील कुमार अपने परिवार में अकेले ऐसे शक्स थे जो भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे थे। सुशील के परिवार में दो भाई, एक मां, पत्नी और दो बच्चे हैं। इस दुःख घडी में सभी को सुशील के देश के लिए शहीद होने का गर्व भी है।

आस्था सिंह की रिपोर्ट

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