प्रणब मुखर्जी की स्मोकिंग पर इंदिरा गांधी ने किया था कमेंट, पढ़ें उनके पाइप के शौक से जुड़ी 7 अनसुनी बातें

नई दिल्ली: प्रणब मुखर्जी ने बतौर राष्ट्रपति अपना पांच साल का सफल कार्यकाल पूरा कर लिया है. ऐसे में उनके जीवन से जुड़ी बातें लोगों के जेहन में एक बार फिर से ताजा हो होने लगी है. पश्चिम बंगाल के बेहद साधारण परिवार में जन्में प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति बनने तक का सफर तय किया. इस मुकाम तक पहुंचने से पहले उन्होंने कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव वाले दौर देखे. उनके राजनीतिक सफर के बारे में तो ज्यादातर लोगों को मालूम है लेकिन उनके व्यक्तिगत जीवन की कई बातों से अब भी ज्यादातर लोग अनजान हैं. इसी कड़ी में उनके एक शौक की बड़ी चर्चा है. बेहद शांत स्वभाव के प्रणब मुखर्जी को पाइप पीने के शौकीन रहे.

पाइप के शौक से जुड़ी 7 अनसुनी बातें बातें:

  1. प्रणब मुखर्जी के मित्र और वरिष्ठ पत्रकार जयंत घोषाल के मुताबिक असम के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता देबकांत बरुआ ने पहली बार प्रणब दा को पाइप पीने को दिया था. इसके बाद प्रणब दा को पाइप पीने की लत लग गई.
  2. प्रणब मुखर्जी के पाइप पीने के शौक को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पसंद नहीं करती थीं, हालांकि श्रीमती गांधी नाराज नहीं होतीं पर धुएं की वजह से उन्हें परेशानी होती.
  3. इंदिरा गांधी कहा करती थीं, ‘प्रणब मुखर्जी से कोई चाहे जो कहे, लेकिन उसके मुंह से धुआं के अलावा कुछ नहीं निकलेगा.’ इंदिरा गांधी के इस बयान का अर्थ यह था कि प्रणब मुखर्जी कभी भी कोई बात लीक नहीं करते थे, वे गुप्त बातें अपने मन में दबाए रहते थे.
  4. जयंत घोषाल कि मानें तो प्रणब मुखर्जी को डॉक्टरों ने पाइप पीने की आदत छोड़ने की सलाह दी, जिसके बाद उन्होंने कुछ समय पाइप नहीं पिया.
  5. कुछ दिनों बाद फिर से प्रणब दा को पाइप पीने की तलब हुई, जिसके बाद उन्होंने वह काफी समय तक निकोटिन रहित स्मोकिंग पाइप का सेवन करते रहे.
  6. एक बार की बात है बांग्लादेश के राष्ट्रपति अब्दुल हमीद भारत दौरे पर थे. वे जब राष्ट्रपति भवन में प्रणब मुखर्जी से भेंट करने पहुंचे तो उन्हें स्मोकिंग करने की तलब हुई. प्रणब मुखर्जी की इजाजत पर अब्दुल हमीद को राष्ट्रपति भवन में स्मोकिंग की इजाजत मिली थी, जबकि पूरा राष्ट्रपति भवन ही ‘नो स्मोकिंग जोन’ है. कहा जाता है कि इस घटना के बाद अब्दुल हमीद ने भी स्मोकिंग छोड़ दी थी.
  7. बतौर राष्ट्रपति रहते हुए प्रणब मुखर्जी को 500 पाइप उपहार के रूप में मिले थे,जिन्हें उन्होंने राष्ट्रपति भवन के म्यूजियम को दान कर दिया.