इन्फोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति ने छुए रतन टाटा के पैर, तस्वीर वायरल

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इन्फोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति ने छुए रतन टाटा के पैर, तस्वीर वायरल

नई दिल्ली। टाईकॉन अवॉर्ड समारोह में मंगलवार को उद्योगपति रतन टाटा (82) को टाईकाॅन मुंबई 2020 लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा गया। उन्हें यह अवॉर्ड काॅर्पाेरेट वर्ल्ड में मूल्याें के पक्षधर इन्फोसिस के को-फाउंडर एन आर नारायण मूर्ति (73) ने दिया। आईटी सेक्‍टर में टीसीएस और इन्‍फोसिस, दोनों सॉफ्टवेयर कंपनियां एक-दूसरे की प्रतिद्वंदी हैं। अब इन दोनों कंपनियों से जुड़े दो सबसे ताकतवर शख्‍सियत- टाटा ग्रुप के रतन टाटा और  इन्फोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति की एक तस्‍वीर सामने आई है। ये तस्‍वीर भारतीय मूल्यों की कद्र करने वालों के दिल को छू जाएगी।

Infosys Co Founder Narayana Murthy Touched Ratan Tatas Feet Photo Goes Viral :

मंगलवार को टाईकॉन(TiECon) मुंबई 2020 कार्यक्रम में रतन टाटा को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। कॉर्पोरेट जगत के दूसरे बड़े नाम यानी इन्फोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति ने यह अवॉर्ड दिया और उस दौरान जो हुआ, वह देखते ही बनता है। यह तस्वीर उसी क्षण की है। 73 वर्षीय नारायणमूर्ति ने 82 साल के रतन टाटा पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया।

टाटा ने इस कार्यक्रम मे स्टार्टअप्स पर बात की और उन्हें चेताया। टाटा ने कई स्टार्टअप्स में निवेश किया है और उन्होंने कहा, जो निवेशकों का पैसा करते हैं वे दूसरा या तीसरा मौका नहीं पा सकते। बीते गुरुवार को रतन टाटा ने इन्टाग्राम पर एक थ्रोबैक तस्वीर पोस्ट कर सबको हैरान कर दिया था। अपने 15वें इंस्टा पोस्ट में उन्होंने अपनी जवानी के दिनों की यह तस्वीर की थी, जिसपर लोग फिदा हो गए थे।  

कौन हैं नारायण मूर्ति

नारायण मूर्ति का पूरा नाम नागावर रामाराव नारायण मू्र्ति है। इनका जन्म 20 अगस्त, 1946 को कर्नाटक के चिक्काबालापुरा ज़िले के शिद्लाघट्टा में हुआ था। नारायण मूर्ति का जन्म दक्षिण भारत के अति साधारण परिवार में हुआ था।. स्कूली से अपनी शिक्षा ख़त्म करने के बाद उन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की और आई आई टी कानपुर से एमटेक किया।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान नारायण मूर्ति ने कई तरह के आर्थिक संकट का सामना किया। इन कठिन हालातों में नारायणमूर्ति के शिक्षण डॉ. कृष्णमूर्ति ने बहुत मदद की। बाद में नारायणमूर्ति ने आर्थिक सुधरने पर उनके नाम से फेलोशिप शुरू की। इन्फोसिस की शुरुआत से पहले पहले नारायण मूर्ति, आई आई एम अहमादाबाद में चीफ सिस्टम प्रोग्रामर थे। इसके बाद उन्होंने ‘साफ्टट्रानिक्स’ नामक कंपनी शुरू की, लेकिन ये सफल नहीं रहा। इसके बाद वे पुणे स्थित पटनी कम्प्यूटर सिस्टम में शामिल हो गए।

इसके बाद नारायण मूर्ति ने 6 लोगों के साथ मिलकर, 1981 में इन्फोसिस की शुरुआत की। उन्होंने अपनी पत्नी सुधा मूर्ति से 10 हजार रुपये लेकर इन्फोसिस की शुरुआत की। साल 1981-2002 तक नारायण मूर्ति ही इन्फोसिसके सीइओ रहे। नास्कडैक की लिस्ट में शामिल होने वाली ये पहली भारतीय कंपनी भी है।  

नई दिल्ली। टाईकॉन अवॉर्ड समारोह में मंगलवार को उद्योगपति रतन टाटा (82) को टाईकाॅन मुंबई 2020 लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा गया। उन्हें यह अवॉर्ड काॅर्पाेरेट वर्ल्ड में मूल्याें के पक्षधर इन्फोसिस के को-फाउंडर एन आर नारायण मूर्ति (73) ने दिया। आईटी सेक्‍टर में टीसीएस और इन्‍फोसिस, दोनों सॉफ्टवेयर कंपनियां एक-दूसरे की प्रतिद्वंदी हैं। अब इन दोनों कंपनियों से जुड़े दो सबसे ताकतवर शख्‍सियत- टाटा ग्रुप के रतन टाटा और  इन्फोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति की एक तस्‍वीर सामने आई है। ये तस्‍वीर भारतीय मूल्यों की कद्र करने वालों के दिल को छू जाएगी। मंगलवार को टाईकॉन(TiECon) मुंबई 2020 कार्यक्रम में रतन टाटा को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। कॉर्पोरेट जगत के दूसरे बड़े नाम यानी इन्फोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति ने यह अवॉर्ड दिया और उस दौरान जो हुआ, वह देखते ही बनता है। यह तस्वीर उसी क्षण की है। 73 वर्षीय नारायणमूर्ति ने 82 साल के रतन टाटा पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। टाटा ने इस कार्यक्रम मे स्टार्टअप्स पर बात की और उन्हें चेताया। टाटा ने कई स्टार्टअप्स में निवेश किया है और उन्होंने कहा, जो निवेशकों का पैसा करते हैं वे दूसरा या तीसरा मौका नहीं पा सकते। बीते गुरुवार को रतन टाटा ने इन्टाग्राम पर एक थ्रोबैक तस्वीर पोस्ट कर सबको हैरान कर दिया था। अपने 15वें इंस्टा पोस्ट में उन्होंने अपनी जवानी के दिनों की यह तस्वीर की थी, जिसपर लोग फिदा हो गए थे।   कौन हैं नारायण मूर्ति नारायण मूर्ति का पूरा नाम नागावर रामाराव नारायण मू्र्ति है। इनका जन्म 20 अगस्त, 1946 को कर्नाटक के चिक्काबालापुरा ज़िले के शिद्लाघट्टा में हुआ था। नारायण मूर्ति का जन्म दक्षिण भारत के अति साधारण परिवार में हुआ था।. स्कूली से अपनी शिक्षा ख़त्म करने के बाद उन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की और आई आई टी कानपुर से एमटेक किया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान नारायण मूर्ति ने कई तरह के आर्थिक संकट का सामना किया। इन कठिन हालातों में नारायणमूर्ति के शिक्षण डॉ. कृष्णमूर्ति ने बहुत मदद की। बाद में नारायणमूर्ति ने आर्थिक सुधरने पर उनके नाम से फेलोशिप शुरू की। इन्फोसिस की शुरुआत से पहले पहले नारायण मूर्ति, आई आई एम अहमादाबाद में चीफ सिस्टम प्रोग्रामर थे। इसके बाद उन्होंने 'साफ्टट्रानिक्स' नामक कंपनी शुरू की, लेकिन ये सफल नहीं रहा। इसके बाद वे पुणे स्थित पटनी कम्प्यूटर सिस्टम में शामिल हो गए। इसके बाद नारायण मूर्ति ने 6 लोगों के साथ मिलकर, 1981 में इन्फोसिस की शुरुआत की। उन्होंने अपनी पत्नी सुधा मूर्ति से 10 हजार रुपये लेकर इन्फोसिस की शुरुआत की। साल 1981-2002 तक नारायण मूर्ति ही इन्फोसिसके सीइओ रहे। नास्कडैक की लिस्ट में शामिल होने वाली ये पहली भारतीय कंपनी भी है।