तीन तलाक नहीं, इंस्टैंट तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट ने लगया रोक

इंस्टैंट तीन तलाक अब भारत में इतिहास बन चुका है. 18 महीने की सुनवाई के बाद 5 जजों की बैंच ने इस पर फैसला सुनाया. एक लंबे विवाद और अदालती सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आज बहुमत से फैसला सुनाया कि इस परंपरा को और जारी नहीं रहने दिया जा सकता.

इंस्टैंट तीन तलाक पर पूरा फैसला:

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने बहुमत के निर्णय में मुस्लिम समाज में एक बार में तीन बार तलाक देने की प्रथा को निरस्त करते हुए अपनी व्यवस्था में इसे असंवैधानिक, गैरकानूनी और शून्य करार दिया. कोर्ट ने कहा कि तीन तलाक की यह प्रथा कुरान के मूल सिद्धांत के खिलाफ है. प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने 365 पेज के फैसले में कहा, ‘3:2 के बहुमत से दर्ज की गई अलग-अलग राय के मद्देनजर‘तलाक-ए-बिद्दत’’ तीन तलाक को निरस्त किया जाता है.

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प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर ने तीन तलाक की इस प्रथा पर छह महीने की रोक लगाने की हिमायत करते हुए सरकार से कहा कि वह इस संबंध में कानून बनाए जबकि न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन और न्यायमूर्ति उदय यू ललित ने इस प्रथा को संविधान का उल्लंघन करने वाला करार दिया. बहुमत के फैसले में कहा गया कि इंस्टैंट तीन तलाक सहित कोई भी प्रथा जो कुरान के सिद्धांतों के खिलाफ है, अस्वीकार्य है. तीन न्यायाधीशों ने यह भी कहा कि इंस्टैंट तीन तलाक के माध्यम से विवाह विच्छेद करने की प्रथा मनमानी है और इससे संविधान का उल्लंघन होता हैं, इसलिए इसे निरस्त किया जाना चाहिए.

दरअसल, ‘तीन तलाक बनाम इंस्टैंट तीन तलाक’ ये दोनों तलाक की दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं.

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