मोदी की नोटबंदी नीति से बैंकों के लिए ब्याज बनेगा चुनौती

नई दिल्ली। 8 नंवबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा घोषित 500 और 1000 रुपए के नोटों की बंदी ने आम आदमी को जो परेशानी दीं हैं वह अपनी जगह है, लेकिन इस फैसले ने देश की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। इस फैसले का सबसे बड़ा असर पड़ता दिख रहा है देश के बैंकिंग सेक्टर पर, जिसकी चूलें हिलती नजर आ रहीं हैं। देश के बैंकों में नोटबंदी के बाद बीते 25 दिनों में भले ही 12 लाख करोड़ रुपए नगद जमा होने की खबर अच्छी लगती हो, लेकिन सवाल ये है कि बैंकों में जमा हो रही इतनी बड़ी रकम पर वर्तमान परिस्थितियों में बैंक अपने वादे के मुताबिक ग्राहकों को ब्याज कहां से देंगी?




जानकारों के मुताबिक बैंक बचत खातों पर अपने वादे के मुताबिक 4 से 6 प्रतिशत का वार्षिक ब्याज ग्राहक को देते हैं। मौजूदा हालातों में बैंक केवल रकम जमा कर रहे हैं, निकासी की सीमा केन्द्र सरकार ने तय कर रखी है। बैंक अपनी आमदनी जिस लोन के बिजनेस से करते हैं वह इन दिनों बिलकुल ठप्प पड़ी हुई है।

एक निजी बैंक के अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि महीने की 9 तारीख के बाद जमा होने वाले और 25 तारीख से पहले निकलने वाली रकम को बैंक उस महीने के ब्याज की गणना में शामिल नहीं करता। इस लिहाज से बैंकों में 10 नवंबर के बाद से लेकर 30 नवंबर तक करीब 12 लाख करोड़ रुपया जमा हुआ है। बैंक को नियमानुसान नवंबर का ब्याज तो नहीं देना होगा, लेकिन दिसबंर से इस रकम में से जो हिस्सा बचत खातों में जमा है उस पर बैंकों को ब्याज चुकाना होगा।




एक राष्ट्रीयकृत बैंक के अधिकारी के मुताबिक बैंक बचत खातों में जमा हुई रकम पर ग्राहक को ब्याज मिलेगा। कोई भी परिस्थिति हो बैंक को अपने कानून के मुताबिक ग्राहक को यह ब्याज चुकाएगी ही।

अर्थव्यवस्था के जानकार बताते हैं कि नोटबंदी के फैसले से बैंकिेंग सेक्टर पर केवल ब्याज के रूप में 2500 करोड़ रुपए का बोझ प्रतिमाह पड़ेगा। जिसकी भरपाई बैंकों को भविष्य में करनी पड़ेगी। आज लोग भले ही बैंकों में जमा हो रही रकमों के आंकड़े देखकर उत्साहित हो, लेकिन आने वाले समय में यदि बैंक खातों से निकासी पर लगी सीमा नहीं हटी तो बैंकों से सामने देय ब्याज चुकता कर अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाना एक मुसीबत होगी। जिस परिपेक्ष में भारत सरकार के वित्त मंत्रालय एवं रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया की कोई भी स्पष्ट नीति अघोषित है।




आपके सामने खबर देना हमारा काम था, इस खबर की व्याख्या करना आपके ऊपर छोड़ता हूं। अब आप तय करें कि इस फैसले से आम आदमी तो प्रभावित है ही लेकिन हमारी बैंकिंग व्यवस्था पर इसका क्या असर पड़ेगा ????