आपके हाथ में आने से पहले फोन को 10 हजार से ज्यादा बार क्यों छूआ जाता है?

क्या आपको मालूम है कि हमारे हाथों में आने से पहले स्मार्टफोन 200 से ज्यादा बार गिरता है. स्मार्टफोन की टच सेंसटिविटी को चेक करने के लिए उसे 10 हजार से ज्यादा बार छू कर देखा जाता है. 60 से ज्यादा छोटे-छोटे एलिमेंट को जोड़कर स्मार्टफोन का निर्माण किया जाता है. इन सभी एलिमेंट को सबसे पहले प्रोडक्शन लैब में बारीकी से जांचा जाता है और इस बात की पुष्टि की जाती है कि स्मार्टफोन में लगने वाले सभी पुर्जे उच्च दर्जे के हो, जिससे भविष्य में ग्राहक को कोई समस्या का सामना न करना पड़े.

जांच प्रक्रिया के बाद असेम्बलिंग ट्रे पर इन पुर्जों को रख कर स्क्रीन, कैमरा, इंटरनल सर्किट सहित सभी पुर्जों को उनकी निर्धारित जगहों पर फिक्स किया जाता है. असेम्बलिंग का सारा काम प्रोडक्शन लाइन पर किया जाता है. जिसके दोनों तरफ वर्कर बैठे होते हैं, बीच में एक मूविंग ट्रे के जरिए छोटे-छोटे पुर्जे एक स्थान से आगे बढ़ते हुए अगले, कर्मचारी तक पहुंचते हैं. ये सभी बातें इंटेक्स के डीजीएम वरुण सोनी ने बताई है.

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महज एक छोटे से स्क्रीन से शुरू होकर सभी तरह की जांचों से गुजरते हुए आखिरी में पूरा हैंडसेट तैयार होकर निकलता है. जिसके बाद, इसमें मौजूद सभी फीचर्स एक एक करके जांच होती है. आखिर में बॉक्स में फाइनल प्रोडक्ट (स्मार्टफोन) को सभी accessories के साथ रखा जाता है. हर स्मार्टफोन पर फाइनल सील लगने से पहले उस डिब्बे को एक बार और खोल के देखा जाता है. जिससे इस बात पूरी तरह से पुष्टि की जा सके कि फाइनल बॉक्स में सभी सामान मौजूद है. उसके बाद फाइनल सील लगाई जाती है.

कंपनी तैयार फोन्स में से रैंडम कुछ हैंडसेट को टेस्टिंग के लिए चुनती है, जिसमें टेक्निकल से लेकर हर स्तर पर फोन जांच होती है. तकरीबन एक मीटर की ऊंचाई से फोन को 200 से ज्यादा बार गिरा के देखा जाता है. ताकि उसमे अगर किसी तरह की कोई दिक्कत हो तो वह पहले ही पता चल जाए. इसके साथ ही, फोन के चार्जर की Capability चेक करने के लिए उसको एक निश्चित भार के साथ कुछ ऊंचाई पर लटकाया जाता है, ताकि खिंचाव के वजह से अगर चार्जिंग वायर में कोई दिक्कत हो तो वह सामने आ जाए.

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इसके साथ ही पेन की निब से लेकर और उच्च तापमान के साथ तमाम अन्य टेस्ट से होकर आपका फोन गुजरता है और उसके बाद ही वह आपके हाथो में पहुंचता है.

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