INX Media Case: पी चिदंबरम को झटका, ईडी को मिली गिरफ्तारी की इजाजत

chitmbarma

नई दिल्ली। आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग (INX Media case) मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम (P Chidambaram) को एक और झटका लगा है। दिल्ली की विशेष अदालत ने ईडी को आईएनएक्स मीडिया घोटाले मामले में चिदंबरम से तिहाड़ जेल मे पूछताछ करने की इजाजत दे दी है। साथ ही यह भी कह दिया है कि यदि पूछताछ के दौरान ईडी को लगता है कि गिरफ्तार करने की जरूरत है तो गिरफ्तार भी कर सकती है।

Inx Media Case Shock To P Chidambaram Cbi Allows Ed To Arrest :

आईएनएक्स मीडिया केस मे पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को सीबीआई ने पिछले महीने गिरफ्तार किया था और सीबीआई रिमांड से आने के बाद से चिदंबरम लगातार तिहाड़ जेल मे हैं। इस मामले में मनी लांड्रिग एक्ट के तहत ईडी ने चिदंबरम से पूछताछ के लिए उन्हे रिमांड पर लेने की अपील कोर्ट से की थी जिसका चिदंबरम के वकीलों ने विरोध किया था। इस बारे मे कोर्ट ने मंगलवार की शाम को फैसला देने को कहा था। आज कोर्ट ने कहा कि ईडी चिदंबरम से तिहाड़ मे जा कर पूछताछ करे और यदि उसे जरूरत महसूस हो तो वो गिरफ्तार कर सकती है।  

कोर्ट में ईडी ने चिदंबरम को कस्टडी में लेकर पूछताछ करने की मांग की थी। इस पर कपिल सिब्बल ने कहा था कि हम इसका विरोध करते हैं। आईएनएक्स मीडिया केस में ईडी को कस्टडी में लेने की जरूरत ही नहीं है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक जजमेंट का हवाला देते हुए कहा था कि ईडी को इस मामले में गिरफ्तारी की जरूरत ही नहीं है। सीबीआई की 15 दिन की कस्टडी के बाद ईडी की हिरासत की जरूरत नहीं है। सिब्बल ने कहा था कि सीबीआई की एफआईआर पर ही ईडी ने केस दर्ज किया, फिर कस्टडी की क्या जरूरत है? अपराध वही है। सभी ट्रांजेक्शन सेम है, केस भी सेम है, फिर दोबारा कस्टडी की मांग क्यों? सिब्बल ने कहा कि इस कोर्ट में इस केस से जुड़ा कुछ भी लंबित नहीं है।

ईडी ने कहा था कि मनी लांड्रिंग अपने आप में एक अपराध है। एक केस की जांच दूसरे से अलग होती है। चिदंबरम भले ही सीबीआई की कस्टडी में रहे हों, उन्हें गिरफ्तार किया गया हो, लेकिन ईडी को उनकी गिरफ्तारी और कस्टडी का  हक है, क्योंकि मनी लांड्रिंग अपने आप में एक अलग तरह का अपराध है। ईडी ने कहा कि चिदंबरम पहले ईडी के सामने सरेंडर करने को तैयार थे, अब कस्टडी का विरोध क्यों कर रहे हैं? मनी लॉन्ड्रिंग के केस में हमें यह अधिकार है कि हम इन्हें अरेस्ट कर सकते हैं और कस्टडी में ले सकते हैं। ईडी ने कहा कि चिदंबरम प्रोडक्शन वारंट के खिलाफ केवल हाईकोर्ट में चुनौती दे सकते हैं।

नई दिल्ली। आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग (INX Media case) मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम (P Chidambaram) को एक और झटका लगा है। दिल्ली की विशेष अदालत ने ईडी को आईएनएक्स मीडिया घोटाले मामले में चिदंबरम से तिहाड़ जेल मे पूछताछ करने की इजाजत दे दी है। साथ ही यह भी कह दिया है कि यदि पूछताछ के दौरान ईडी को लगता है कि गिरफ्तार करने की जरूरत है तो गिरफ्तार भी कर सकती है। आईएनएक्स मीडिया केस मे पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को सीबीआई ने पिछले महीने गिरफ्तार किया था और सीबीआई रिमांड से आने के बाद से चिदंबरम लगातार तिहाड़ जेल मे हैं। इस मामले में मनी लांड्रिग एक्ट के तहत ईडी ने चिदंबरम से पूछताछ के लिए उन्हे रिमांड पर लेने की अपील कोर्ट से की थी जिसका चिदंबरम के वकीलों ने विरोध किया था। इस बारे मे कोर्ट ने मंगलवार की शाम को फैसला देने को कहा था। आज कोर्ट ने कहा कि ईडी चिदंबरम से तिहाड़ मे जा कर पूछताछ करे और यदि उसे जरूरत महसूस हो तो वो गिरफ्तार कर सकती है।   कोर्ट में ईडी ने चिदंबरम को कस्टडी में लेकर पूछताछ करने की मांग की थी। इस पर कपिल सिब्बल ने कहा था कि हम इसका विरोध करते हैं। आईएनएक्स मीडिया केस में ईडी को कस्टडी में लेने की जरूरत ही नहीं है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक जजमेंट का हवाला देते हुए कहा था कि ईडी को इस मामले में गिरफ्तारी की जरूरत ही नहीं है। सीबीआई की 15 दिन की कस्टडी के बाद ईडी की हिरासत की जरूरत नहीं है। सिब्बल ने कहा था कि सीबीआई की एफआईआर पर ही ईडी ने केस दर्ज किया, फिर कस्टडी की क्या जरूरत है? अपराध वही है। सभी ट्रांजेक्शन सेम है, केस भी सेम है, फिर दोबारा कस्टडी की मांग क्यों? सिब्बल ने कहा कि इस कोर्ट में इस केस से जुड़ा कुछ भी लंबित नहीं है। ईडी ने कहा था कि मनी लांड्रिंग अपने आप में एक अपराध है। एक केस की जांच दूसरे से अलग होती है। चिदंबरम भले ही सीबीआई की कस्टडी में रहे हों, उन्हें गिरफ्तार किया गया हो, लेकिन ईडी को उनकी गिरफ्तारी और कस्टडी का  हक है, क्योंकि मनी लांड्रिंग अपने आप में एक अलग तरह का अपराध है। ईडी ने कहा कि चिदंबरम पहले ईडी के सामने सरेंडर करने को तैयार थे, अब कस्टडी का विरोध क्यों कर रहे हैं? मनी लॉन्ड्रिंग के केस में हमें यह अधिकार है कि हम इन्हें अरेस्ट कर सकते हैं और कस्टडी में ले सकते हैं। ईडी ने कहा कि चिदंबरम प्रोडक्शन वारंट के खिलाफ केवल हाईकोर्ट में चुनौती दे सकते हैं।