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अमेरिका के 52 ठिकानों को निशाना बनाने के जवाब में ईरान ने गिनाए 140 स्थान, कहा- देंगे मुंहतोड़ जवाब

Iran Counted 140 Places In Response To The Target Of 52 Us Bases Said Will Give A Befitting Reply

By बलराम सिंह 
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नई दिल्ली। ईरानी कुद्स फोर्स के प्रमुख कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान हमला करता है तो अमेरिका 52 ईरानी सांस्कृतिक स्थलों को निशाना बनाएगा। अब ईरान के कुद्स फोर्स ने कहा है कि उसने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के 140 ठिकानों को निशाने पर ले लिया है। ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका ने मिसाइल हमलों की प्रतिक्रिया में कोई नुकसान पहुंचाने की कोशिश की तो वह इन सभी ठिकानों को निशाना बनाएगा।

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ईरानी के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई के दफ्तर के एक अधिकारी ने ईरानी मीडिया से कहा कि अमेरिका को जवाब देने के कई तरीकों में अभी मिसाइल हमले का सबसे कमजोर तरीका चुना गया। ईरान इससे भी कड़ा और बड़ा कदम उठाने की क्षमता रखता है। ईरान के रक्षा मंत्री आमिर हातमी ने कहा कि हमने छोटी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल किया। उम्मीद है कि यह अमेरिका के लिए यादगार सबक साबित होगा।

ईराक में 2003 में सद्दाम हुसैन के तख्ता पलट के बाद अमेरिकी सेनाएं अल असद बेस पर अपना ठिकाना बनाए हुए हैं। यह इराक में सबसे बड़ा वायुसैनिक ठिकाना है। यहां अमेरिका और उसके गठबंधन की सहयोगी देशों की कुल 1500 सैनिक हर वक्त तैनात रहते हैं, जो आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट से मोर्चा ले रहे हैं। यहां नार्वे के भी 70 सैनिक तैनात हैं। 2018 में ही यहां ट्रंप ने पत्नी मेलानिया के साथ दौरा किया था।

देश को संबोधित करते हुए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामनेई ने कहा कि सिर्फ सैन्य हमला काफी नहीं है। हमें अपने दुश्मनों को काबू में लाने के लिए तरकीब से काम लेना होगा। अमेरिका हमारा दुश्मन है और हमें दुश्मन की योजना के बारे में पता होना चाहिए। हम शक्तिशाली ताकतों के खिलाफ संघर्ष के लिए एकजुट रहे हैं। ईरान कभी कमजोर नहीं पडे़गा और न ही कभी हार मानेगा। ईरान के साथ जो हुआ हम उसको कभी नहीं भूलेंगे।

इस बीच मलयेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने कहा कि अब मुस्लिम देशों को एकजुट हो जाना चाहिए। 94 वर्षीय महातिर दुनिया के सबसे बुजुर्ग प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि सभी मुस्लिम देश एकजुट हो जाएं। उन्होंने कहा कि इस्लामी देश निशाने पर लिए जा रहे हैं और असुरक्षा बढ़ रही है। मलयेशिया में 10 हजार ईरानी नागरिक रहते हैं।

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वहीं इराक के प्रधानमंत्री कार्यालय ने दावा किया कि उसे ईरान की तरफ से एक आधिकारिक मौखिक संदेश मिला था जिसमें कहा गया था कि इराक की जमीन पर तैनात अमेरिकी सेनाओं पर मिसाइल से हमला जल्द हो सकता है। कार्यालय ने कहा कि संदेश में कहा गया था कि सुलेमानी की हत्या के जवाब में यह कदम उठाया जाएगा और यह हमला केवल अमेरिकी सेना तक ही सीमित रहेगा।

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