क्या राहुल गांधी महागठबंधन को बांधे रहने में रहे असफल..?

नई दिल्ली। बिहार की महागठबंधन सरकार के भरोसे 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चुनौती देने का सपना देख रही कांग्रेस के लिए नीतीश कुमार का दूर जाना किसी सदमे से कम नहीं है। लेकिन ऐसा क्या हुआ कि वह नीतीश कुमार को अपने पाले में बनाए रखने में नाकाम रही यह बहुत बड़ा सवाल बन गया है।

सूत्रों की माने तो बिहार कांग्रेस के नेता महागठबंधन के टूटने से नाराज हैं। उनकी नाराजगी का कारण नीतीश कुमार न होकर कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी हैं। पार्टी के नेताओं का कहना है कि जब बिहार कांग्रेस के नेता अशोक चौधरी ने बिहार में पैदा हुए हालातों पर राहुल गांधी से मुलाकात के लिए मिलने की कोशिश की तो उन्हें तीन दिनों तक दिल्ली में रहने के बाद मिलने का समय दिया गया। महागठबंधन को बचाने की जिम्मेदारी राहुल गांधी के कंधों पर होने के बावजूद उन्होंने जिस तरह का रवैया अपनाया वह परेशान करने वाला था।

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पार्टी के नेताओं की माने तो कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी ने बिहार की समस्या को हल करने के लिए राहुल गांधी को जिम्मेदारी सौंपी थी। राहुल गांधी ने नीतीश कुमार से मुलाकात भी की लेकिन वह कोई हल निकालने में सक्षम नहीं हुए।

लालू प्रसाद यादव को तेजस्वी यादव का इस्तीफा दिलाने के लिए तैयार न कर पाने में राहुल गांधी की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बिहार कांग्रेस के नेताओं दबी जुबान से पूरे मामले में राहुल के ढुलमुल रवैये को जिम्मेदार बताते हुए कह रहे हैं कि जब उन्होंने लालू प्रसाद यादव को भ्रष्टाचार के मामले में बचाने के लिए बने आध्यादेश की कॉपी को फाड़ने में देर नहीं लगाई तो फिर तेजस्वी को लेकर वह कोई फैसला क्यों नहीं कर पाए। उन्हें चाहिए था कि गठबंधन को बचाए रखने के लिए लालू प्रसाद यादव पर दबाव बनाकर तेजसवी का इस्तीफा दिलाते और जदयू राजद को एक बनाए रखने में पुल का काम करते।

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राहुल गांधी की नाकामी का ही परिणाम है कि कांग्रेस के हाथ से एक के बाद एक राज्य निकलता जा रहा है। इससे पूर्व कांग्रेस राहुल गांधी के ही नेतृत्व के चलते असम की सत्ता से बेदखल हो चुकी है। ले देकर बिहार ही एक राज्य ऐसा था जो भविष्य में उभरने की उम्मीद कायम ​किए हुए था, लेकिन आज वहां भी कांग्रेस सत्ता से बाहर हो चुकी है।