कर्नाटक चुनाव: तो क्या इन वजहों से कांग्रेस की हुई ये हालत

rahul and soniya gandhi
कर्नाटक चुनाव: तो क्या इन वजहों से कांग्रेस की हुई ये हालत

बेंगलुरू। कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनाव में मंगलवार को हुई मतगणना दो दोपहर तक रूझानों में कांग्रेस की हार लगभग पक्की हो गई है। विशेषज्ञों की मानें तो इस हार का असर राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित लोकसभा के चुनाव में भी पड़ना तय है। बताया जा रहा है कर्नाटक में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भाजपा ​दक्षिण में और मजबूती हासिल करेंगी।

बता दें कि कर्नाटक की 224 विधानसभा सीटों में से 222 सीट के लिए मतदान 12 मई को हुआ था। यहां बहुमत के लिए 112 सीटें चाहिये। दोपहर तक रूझानों से लगभग तय हो गया हैं कि यहां बीजेपी बहुमत से अपनी सरकार बनाएगी, जिसके बाद विशेषज्ञों ने विश्लेषण कर प्रदेश में कांग्रेस की हार की समीक्षा करनी शुरु कर दी।

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ये हैं कर्नाटक में कांग्रेस की हार के कारण

विधानसभ चुनाव के पहले प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए खुद को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बता दिया, जिसका जनता पर विपरीत असर पड़ा। चर्चाएं शुरू हो गई कि क्या कांग्रेेस के पास राहुल गांधी को छोड़कर प्रधानमंत्री पद के लिए कोई दूसरा चेहरा नही है।

कांग्रेस के पास कोई साफ नीति नहीं है। एक तरफ लोग आधार को लेकर परेशान हैं,वही कांग्रेस अभी इस मुदृे पर किसी नतीजे पर भी नही पहुंच सकी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चुनाव के दौरान अपनी हर रैली में आधार से भ्रष्टाचार मिटाने के दावे करते रहें, वही कांग्रेस अभी तक ये फैसला भी नही कर सकी हैं, कि आधार का विरोध करना है या ​नही।

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कर्नाटक में लिंगायत वोटरों की संख्या सबसे ज्यादा है। चुनाव से पहले सिद्धारमैया ने लिंगायतों को अलग धर्म का दर्जा देने की घोषणा कर दी थी। बताया जा रहा है कि लिंगायत परंपरागत तौर बीजेपी का वोटबैंक माना जाता है। बाद में बीजेपी ने सिद्धारमैया के इस बयान को हिंदू धर्म में बांटने के मुदृदे में बदलकर उनके इस दांव को फेल ​कर दिया।

चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी अपनी हर रैली में पीएम मोदी पर निशाना साधते रहे, वो अपने हर भाषण में पीएम पर सीधे हमला बोल रहे थे, लेकिन प्रधानमंत्री ने रणनीति के तहत उनके किसी भी सवाल का जवाब नही दिया, जो पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हुआ। इसके अलावा कांग्रेस ग्रामीण क्षेत्रों में भी अपना असर डालने में असफल रही, जिसके चलते वहां के मध्यम और उच्च वर्ग के लोगों ने उन्हे नकार दिया।

साल 2013 में अलग पार्टी बनाकर चुनाव लड़ने वाले लिंगायत समुदाय के बीएस येदियुरप्पा ने बीजेपी का काफी नुकसान किया था, इस बार उनके बीजेपी में आने का फायदा पार्टी को मिला। इसके अलावा जेडीएस के वोट में भी बढ़ोत्तरी हुई। बताया जा रहा है कि कांग्रेस को मिलने वाले वोट जेडीएस में चले गए, जिससे कांग्रेस को भारी नुकसान हुआ।

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भ्रष्टाचार के आरोप में जेल गए बीएस येदियुरप्पा को भाजपा ने सीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया, लेकिन कांग्रेस इसका मुदृा नही बना सकी। दूसरी तरफ बीजेपी ने सिद्धारमैया की महंगी घड़ी को मुद्दा बनाकर बनाकर कांग्रेस की खून किरकिरी कराई। जानकार बताते हैं कि अगर कांग्रेस येदियुरप्पा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप को मुदृदा बनाती तो उसे चुनाव में फायदा मिल सकता था।

कर्नाटर में हुए विधानसभा चुनाव में जहां एक तरफ बीजेपी का बूथ मैनेजमेंट बेहतर रहा हैं, वही कांग्रेस इसमें फेल हो गई, जिससे उसे हार का मुंह देखना पड़ा।

बेंगलुरू। कर्नाटक में हुए विधानसभा चुनाव में मंगलवार को हुई मतगणना दो दोपहर तक रूझानों में कांग्रेस की हार लगभग पक्की हो गई है। विशेषज्ञों की मानें तो इस हार का असर राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित लोकसभा के चुनाव में भी पड़ना तय है। बताया जा रहा है कर्नाटक में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भाजपा ​दक्षिण में और मजबूती हासिल करेंगी। बता दें कि कर्नाटक की 224 विधानसभा सीटों में से 222 सीट के लिए मतदान 12…
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