‘तीन तलाक’ के खिलाफ जीत कर भी अपनों से हार गयी ‘इशरत जहां’

नई दिल्ली। तीन तलाक जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जंग लड़ने वाली इशरत जहां ने यह जंग भले ही जीत ली हो लेकिन उनकी मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ गयी है। गौरतलब है कि मंगलवार को तीन तलाक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एतिहासिक फैसला सुनाते हुए इसे एक ही झटके में खत्म कर दिया। कोर्ट के इस फैसले का लगभग हर वर्ग के लोगों ने दिल खोल स्वागत किया वहीं कुछ मुल्लाओं को यह फैसला रास नहीं आया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब इशरत जहां को समाज के बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है। कोर्ट के बाहर इशरत की यह लड़ाई कानूनी लड़ाई से कहीं ज्यादा मुश्किल साबित होने वाली है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, जब से इशरत के हक में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है तब से उनका घर में रहना मुश्किल हो गया है। समाज के लोग मिलकर उनको सुना रहे हैं। उन्हें ‘गंदी औरत, मर्दों की दुश्मन और इस्लाम विरोधी’ कह रहे हैं। कई पड़ोसियों ने तो इशरत से बात तक करना बंद कर दिया है।

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इशरत पश्चिम बंगाल में हावड़ा के पास में रहती हैं। वह वहां 2004 से रह रही हैं। जिस घर में इशरत रहती हैं वह उनके पति ने दहेज में मिले पैसों से ही खरीदा था। इशरत के पति ने 2014 में उन्हें दुबई से फोन पर तलाक दे दिया था। इशरत इस बात को लेकर काफी परेशान और हैरान हैं। उनका कहना है कि इतनी लंबी लड़ाई लड़ने के बाद उनमें परिवार और बाकी लोगों से लड़ने की हिम्मत नहीं बची है। इशरत चाहती हैं कि वह अब अपना वक्त अपने बच्चों को दें। इशरत के साथ-साथ उनकी तरफ से केस लड़ने वाली वकील नाजिया इलाही खान को भी ट्विटर पर लोगों ने उल्टा-सीधा बोला था।

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