भारत का 10 साल में चांद पर दूसरा कदम, ISRO ने जारी की चंद्रयान-2 की तस्वीरें

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भारत का 10 साल में चांद पर दूसरा कदम, ISRO ने जारी की चंद्रयान-2 की तस्वीरें

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो(ISRO) ने चंद्रयान-2 (chandrayaan-2)मिशन की पहली तस्वीरें जारी की हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपने सबसे महत्वाकांक्षी मिशन के तहत चंद्रयान-2(chandrayaan-2) का 9 जुलाई से 16 जुलाई के बीच छोड़ा जाएगा। इसरो के मौजूदा शेड्यूल के मुताबिक, स्पेसक्राफ्ट 19 जून को बेंगलुरु से रवाना होगा और 20 या 21 जून तक श्रीहरिकोटा के लॉन्चपैड पर पहुंचेगा। 10 साल में दूसरी बार चांद पर जाने वाले मिशन से जुड़ीं पहली तस्वीरें सामने आने से इसका रोमांच और भी बढ़ गया है।

Isro Chandrayaan 2 First Images July Launching Payloads Indigenous :

भारत का 10 साल में चांद पर दूसरा कदम, ISRO ने जारी की चंद्रयान-2 की तस्वीरें

भारत में बनाया गया है लॉन्च वीइकल

चंद्रयान-2 मिशन के तीन मॉड्यूल्स में से एक ऑर्बिटर, लैंडर और एक रोवर है जिन्हें लॉन्च वीइकल जीएसएलवी एमके lll स्पेस में लेकर जाएगा। खास बात यह है कि इस लॉन्च वीइकल को भारत में ही बनाया गया है। चंद्रयान-2 के लैंडर को विक्रम और रोवर को प्रज्ञान नाम दिया गया है। रोवर प्रज्ञान को लैंडर विक्रम के अंगर रखा जाएगा और चांद की सतह पर विक्रम के लैंड होने पर इसे डिप्लॉय किया जाएगा।

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चांद पर करेगा एक्सपेरिमेंट, नासा की मदद भी

इसरो के मुताबिक ऑर्बिटर मिशन के दौरान चांद का चक्कर लगाएगा और फिर चांद के साउथ पोल के पास लैंड होगा। चांद की सतह पर पहुंचने पर 6 पहियों वाला प्रज्ञान सतह छोड़ दिया जाएगा जहां यह एक्सपेरिमेंट करेगा। ये सब धरती पर बैठे इसरो के साइंटिस्ट कंट्रोल करेंगे। भारत के लूनर मिशन को आगे ले जाने के अलावा चंद्रयान दो अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मदद भी करेगा। यह अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का एक एक्सपेरिमेंट भी लेकर जाएगा।

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10 साल में दूसरा मिशन

चंद्रयान-2 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाएगा। भारत के लिए यह गौरव का बात है कि 10 साल में दूसरी बार हम चांद पर मिशन भेज रहे हैं। चंद्रयान-1 2009 में भेजा गया था। हालांकि, उसमें रोवर शामिल नहीं था। चंद्रयान-1 में केवल एक ऑर्बिटर और इंपैक्टर था जो चांद के साउथ पोल पर पहुंचा था।

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो(ISRO) ने चंद्रयान-2 (chandrayaan-2)मिशन की पहली तस्वीरें जारी की हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपने सबसे महत्वाकांक्षी मिशन के तहत चंद्रयान-2(chandrayaan-2) का 9 जुलाई से 16 जुलाई के बीच छोड़ा जाएगा। इसरो के मौजूदा शेड्यूल के मुताबिक, स्पेसक्राफ्ट 19 जून को बेंगलुरु से रवाना होगा और 20 या 21 जून तक श्रीहरिकोटा के लॉन्चपैड पर पहुंचेगा। 10 साल में दूसरी बार चांद पर जाने वाले मिशन से जुड़ीं पहली तस्वीरें सामने आने से इसका रोमांच और भी बढ़ गया है। [caption id="attachment_327557" align="aligncenter" width="651"] भारत का 10 साल में चांद पर दूसरा कदम, ISRO ने जारी की चंद्रयान-2 की तस्वीरें[/caption] भारत में बनाया गया है लॉन्च वीइकल चंद्रयान-2 मिशन के तीन मॉड्यूल्स में से एक ऑर्बिटर, लैंडर और एक रोवर है जिन्हें लॉन्च वीइकल जीएसएलवी एमके lll स्पेस में लेकर जाएगा। खास बात यह है कि इस लॉन्च वीइकल को भारत में ही बनाया गया है। चंद्रयान-2 के लैंडर को विक्रम और रोवर को प्रज्ञान नाम दिया गया है। रोवर प्रज्ञान को लैंडर विक्रम के अंगर रखा जाएगा और चांद की सतह पर विक्रम के लैंड होने पर इसे डिप्लॉय किया जाएगा। [caption id="attachment_327558" align="aligncenter" width="651"] भारत का 10 साल में चांद पर दूसरा कदम, ISRO ने जारी की चंद्रयान-2 की तस्वीरें[/caption] चांद पर करेगा एक्सपेरिमेंट, नासा की मदद भी इसरो के मुताबिक ऑर्बिटर मिशन के दौरान चांद का चक्कर लगाएगा और फिर चांद के साउथ पोल के पास लैंड होगा। चांद की सतह पर पहुंचने पर 6 पहियों वाला प्रज्ञान सतह छोड़ दिया जाएगा जहां यह एक्सपेरिमेंट करेगा। ये सब धरती पर बैठे इसरो के साइंटिस्ट कंट्रोल करेंगे। भारत के लूनर मिशन को आगे ले जाने के अलावा चंद्रयान दो अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मदद भी करेगा। यह अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा का एक एक्सपेरिमेंट भी लेकर जाएगा। [caption id="attachment_327559" align="alignnone" width="587"] भारत का 10 साल में चांद पर दूसरा कदम, ISRO ने जारी की चंद्रयान-2 की तस्वीरें[/caption] 10 साल में दूसरा मिशन चंद्रयान-2 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाएगा। भारत के लिए यह गौरव का बात है कि 10 साल में दूसरी बार हम चांद पर मिशन भेज रहे हैं। चंद्रयान-1 2009 में भेजा गया था। हालांकि, उसमें रोवर शामिल नहीं था। चंद्रयान-1 में केवल एक ऑर्बिटर और इंपैक्टर था जो चांद के साउथ पोल पर पहुंचा था।