ISRO की एक और बड़ी कामयाबी, RISAT-2BR1 और 9 विदेशी सैटेलाइट को किया लॉन्च

isro
ISRO की एक और बड़ी कामयाबी, RISAT-2BR1 और 9 विदेशी सैटेलाइट को किया लॉन्च

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) ने पीएसएलवी-सी 48 रॉकेट को भारत के पृथ्वी निगरानी उपग्रह रिसैट-2बीआर1 और नौ विदेशी उपग्रहों के साथ श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया। रीसैट-2बीआर1 रडार इमेजिंग अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है।

Isro Launches Another Big Success Risat 2br1 And 9 Foreign Satellites :

यह बादलों और अंधेरे में भी साफ तस्वीरें ले सकता है। अर्थ इमेजिंग कैमरे और रडार तकनीक के चलते यह मुठभेड़-घुसपैठ के वक्त सेना के लिए मददगार होगा। रीसैट-2बीआर1 और चार अन्य देशों के 9 सैटेलाइट सफलतापूर्वक अपने संबंधित कक्षा में स्थापित कर दिए गए।

इसरो प्रमुख ने बताया, ‘यह PSLV की 50वीं उड़ान थी’

‘रिसैट-2बीआर1’ को प्रक्षेपण के लगभग 16 मिनट बाद और अन्य उपग्रहों को लगभग पांच मिनट बाद उनकी अलग-अलग निर्दिष्ट कक्षाओं (Specified Classes) में स्थापित कर दिया गया।

इसरो प्रमुख के. सिवन (K Sivan) और अन्य वैज्ञानिकों ने सभी 10 उपग्रहों के निर्दिष्ट कक्षाओं में स्थापित होने पर एक-दूसरे को बधाई दी। बाद में, मिशन नियंत्रण केंद्र से सिवन ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है जो संयोग से पीएसएलवी की 50वीं उड़ान का दिन है।

576 किमी की कक्षा में बेहद सटीक तरीके से सफलतापूर्वक स्थापित किया गया RISAT-2BR1

इसरो प्रमुख के. सिवन (K. Sivan) ने कहा, ‘‘इसरो ने ऐतिहासिक मिशन को अंजाम दिया है। मुझे यह घोषणा करते हुए अत्यंत खुशी हो रही है कि 50वें पीएसएलवी ने ‘रिसैट-2बीआर1’ को 576 किलोमीटर की कक्षा में सफलतापूर्वक बेहद सटीक तरीके से स्थापित कर दिया है।’’

सिवन ने कहा कि ‘रिसैट-2बीआर1’ एक ‘‘जटिल’’ उपग्रह (Satellite) है, लेकिन इसका निर्माण कम समय में ही कर लिया गया. उन्होंने कार्य में शामिल टीम की सराहना की।

इजरायल से है कनेक्शन

रिसैट-2बीआर1 के अलावा पीएसएलवी जिन 9 सैटलाइट को अपने साथ अंतरिक्ष में ले जा रहा है, उनमें से एक इजरायल का है। इसे इजरायल के हर्जलिया साइंस सेंटर और शार हनेगेव हाईस्‍कूल के स्‍टूडेंट्स ने मिलकर बनाया है। Duchifat-3 नाम के इस सैटलाइट का वजन महज 2.3 किलो है। यह एक एजुकेशनल सैटलाइट है जिस पर लगा कैमरा अर्थ इमेजिंग के लिए इस्‍तेमाल किया जाएगा।

जंगलों की सेहत पर रहेगी नजर

इसके अलावा इस पर लगा एक रेडियो ट्रांसपोंडर वायु और जल प्रदूषण पर रिसर्च करने और जंगलों पर नजर रखने के काम आएगा। इसे बनाने वाले तीनों इजरायली स्‍टूडेंट भी लॉन्‍च साइट पर होंगे।

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) ने पीएसएलवी-सी 48 रॉकेट को भारत के पृथ्वी निगरानी उपग्रह रिसैट-2बीआर1 और नौ विदेशी उपग्रहों के साथ श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया। रीसैट-2बीआर1 रडार इमेजिंग अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है। यह बादलों और अंधेरे में भी साफ तस्वीरें ले सकता है। अर्थ इमेजिंग कैमरे और रडार तकनीक के चलते यह मुठभेड़-घुसपैठ के वक्त सेना के लिए मददगार होगा। रीसैट-2बीआर1 और चार अन्य देशों के 9 सैटेलाइट सफलतापूर्वक अपने संबंधित कक्षा में स्थापित कर दिए गए। इसरो प्रमुख ने बताया, 'यह PSLV की 50वीं उड़ान थी' ‘रिसैट-2बीआर1’ को प्रक्षेपण के लगभग 16 मिनट बाद और अन्य उपग्रहों को लगभग पांच मिनट बाद उनकी अलग-अलग निर्दिष्ट कक्षाओं (Specified Classes) में स्थापित कर दिया गया। इसरो प्रमुख के. सिवन (K Sivan) और अन्य वैज्ञानिकों ने सभी 10 उपग्रहों के निर्दिष्ट कक्षाओं में स्थापित होने पर एक-दूसरे को बधाई दी। बाद में, मिशन नियंत्रण केंद्र से सिवन ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है जो संयोग से पीएसएलवी की 50वीं उड़ान का दिन है। 576 किमी की कक्षा में बेहद सटीक तरीके से सफलतापूर्वक स्थापित किया गया RISAT-2BR1 इसरो प्रमुख के. सिवन (K. Sivan) ने कहा, ‘‘इसरो ने ऐतिहासिक मिशन को अंजाम दिया है। मुझे यह घोषणा करते हुए अत्यंत खुशी हो रही है कि 50वें पीएसएलवी ने ‘रिसैट-2बीआर1’ को 576 किलोमीटर की कक्षा में सफलतापूर्वक बेहद सटीक तरीके से स्थापित कर दिया है।’’ सिवन ने कहा कि ‘रिसैट-2बीआर1’ एक ‘‘जटिल’’ उपग्रह (Satellite) है, लेकिन इसका निर्माण कम समय में ही कर लिया गया. उन्होंने कार्य में शामिल टीम की सराहना की। इजरायल से है कनेक्शन रिसैट-2बीआर1 के अलावा पीएसएलवी जिन 9 सैटलाइट को अपने साथ अंतरिक्ष में ले जा रहा है, उनमें से एक इजरायल का है। इसे इजरायल के हर्जलिया साइंस सेंटर और शार हनेगेव हाईस्‍कूल के स्‍टूडेंट्स ने मिलकर बनाया है। Duchifat-3 नाम के इस सैटलाइट का वजन महज 2.3 किलो है। यह एक एजुकेशनल सैटलाइट है जिस पर लगा कैमरा अर्थ इमेजिंग के लिए इस्‍तेमाल किया जाएगा। जंगलों की सेहत पर रहेगी नजर इसके अलावा इस पर लगा एक रेडियो ट्रांसपोंडर वायु और जल प्रदूषण पर रिसर्च करने और जंगलों पर नजर रखने के काम आएगा। इसे बनाने वाले तीनों इजरायली स्‍टूडेंट भी लॉन्‍च साइट पर होंगे।