भारत की उपलब्धि को लगी किसी की नजर, ISRO का GSAT-6A से संपर्क टूटा

ISRO , GSAT-6A
भारत की उपलब्धि को लगी किसी की नजर, ISRO का GSAT-6A से संपर्क टूटा
नई दिल्ली। श्रीहरिकोटा से गुरुवार को भारत के सबसे बड़े कम्युनिकेशन सैटलाइट GSAT-6A को लॉन्च किया गया था। इसी बीच एक बुरी खबर आई है कि GSAT-6A का 48 घंटे में ही शनिवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानि इसरो से अचानक संपर्क टूट गया। इसे वैज्ञानिकों के साथ-साथ सशस्त्र सेनाओं के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है। भारतीय सेना के लिए संचार सेवाओं को मजबूत बनाने वाले महत्वाकांक्षी GSAT-6A का गुरुवार शाम श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण हुआ था।…

नई दिल्ली। श्रीहरिकोटा से गुरुवार को भारत के सबसे बड़े कम्युनिकेशन सैटलाइट GSAT-6A को लॉन्च किया गया था। इसी बीच एक बुरी खबर आई है कि GSAT-6A का 48 घंटे में ही शनिवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानि इसरो से अचानक संपर्क टूट गया। इसे वैज्ञानिकों के साथ-साथ सशस्त्र सेनाओं के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है। भारतीय सेना के लिए संचार सेवाओं को मजबूत बनाने वाले महत्वाकांक्षी GSAT-6A का गुरुवार शाम श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण हुआ था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केन्द्र (ISRO) का कहना है कि 29 मार्च को प्रक्षेपित जीसैट-R-6ए उपग्रह के साथ उनका संपर्क टूट गया है और उसके साथ संपर्क फिर से स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।

48 घंटे से जीसैट-6 से नहीं है संपर्क

जानकारी के मुताबिक, पिछले 48 घंटे से इसरो की ओर से इस उपग्रह के बारे में कोई सूचना जारी नहीं की गई है। इस उपग्रह को लेकर आखिरी बुलेटिन 30 मार्च की सुबह 9.22 बजे जारी किया गया था। इसरो से जुड़े सूत्रों का कहना है कि उपग्रह में तकनीकी खराबी आ गई है और वैज्ञानिक-इंजीनियर इसको दूर करने में जुटे हुए हैं। इस घटना को लेकर इसरो की तरफ से न तो कोई बयान अभी दिया गया है और न ही कोई इसपर बोलने को तैयार है। न ही अभी ये पता चल पा रहा है कि सैटेलाइट में आई खराबी को ठीक किया जा सकता है या नहीं।

{ यह भी पढ़ें:- कुलगाम मुठभेड़ में दो आतंकी ढेर, एक जवान शहीद }

ISRO चेयरमैन की मैराथन बैठक

सैटलाइट की कार्यकुशलता को लेकर गुरुवार को सुबह 9.22 बजे इसी तरह की पहली एक्सर्साइज के बाद आधिकारिक बयान में जिक्र था लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ। इसके साथ ही तीसरे ऑर्बिट की एक्सर्साइज के बारे में भी कुछ नहीं बताया गया। इन सबके बीच शनिवार को इसरो के चेयरमैन के शिवन ने वैज्ञानिकों के साथ मैराथन बैठक की थी।

तैयार करने में 270 करोड़ रुपये की लागत

GSAT- 6A एक कम्युनिकेशन सैटेलाइट है और इसको तैयार करने में 270 करोड़ रुपये की लागत आई थी। यह उपग्रह बेहद सुदूर क्षेत्रों में भी मोबाइल संचार में मदद करेगा। इसका मुख्य तौर पर इस्तेमाल भारतीय सेना के लिए किया जाएगा।

{ यह भी पढ़ें:- सीमा पर सेना की तैनाती से घबराया चीन, कहा- रिश्‍ते हो सकते हैं खराब  }

रॉकेट में भी किए गए थे बदलाव

उपग्रह के प्रक्षेपण के लिए जीएसएलवी रॉकेट में भी बदलाव किए गए थे। इसके दूसरे चरण के लिए हाई थ्रस्ट विकास इंजन लगाया गया है। इसके अलावा रॉकेट में इलेक्ट्रो हाइड्रोलिक एक्यूटेशन सिस्टम के बजाय इलेक्ट्रो केमिकल ऑटोमेशन का इस्तेमाल किया गया।

-2,140 किलोग्राम है रॉकेट का वजन

-49.1 मीटर है इसकी लंबाई

-6 मीटर व्यास का एंटीना लगा है

-10 साल है इस मिशन की मियाद

Loading...