सुनो.. मैं मुकेश बहादुर हूं, नौकरशाहों को जूते की नोक पर रखता हूं

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सुनो.. मैं मुकेश बहादुर हूं, नौकरशाहों को जूते की नोक पर रखता हूं

लखनऊ। सीएम योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए अपने मंत्रियों और नौकरशाहों पर नकेल कस रहे हैं। लेकिन सीएम की नाक के नीचे ही उनके मंत्री और नौकरशाह हाई प्रोफाइल जालसाजों को पनाह दे रहे हैं। यही कारण है कि एक पीड़ित न्याय के लिए दर बदर की ठोकरें खा रहा और जालसाज खुलेआम आईएएस और आईपीएस को जूते की नोक पर रखने की बात करता है। आलम यह है कि पुलिस पीड़ित की एफआईआर दर्ज करने को भी तैयार नहीं है।

Jaalsaaz Mukesh Bahadur Singh :

भ्रष्टाचार का यह मामला राजधानी लखनऊ का है। यहां खुद को सत्ता शीर्ष और पुलिस मुखिया का करीबी बताने वाले एक जालसाज ने एक बिल्डर को लुभावने सपने दिखाकर करोड़ो रूपए ठग लिए। पीड़ित शख्स मदद के लिए पुलिस, प्रशासन से लेकर सत्ता में बैठे कई बड़े राजनेताओं तक गया, लेकिन कहीं भी उसकी फरियाद नहीं सुनी गई। आखिरकार उसने सोशल मीडिया का सहारा लिया। हांलाकि ये रास्ता भी उसके गले की फांस बन गया। जालसाज को जैसे ही इसकी भनक लगी उसने पीड़ित को करोड़ों रूपए की मानहानि की नोटिस थमा दी। जिसके बाद पीड़ित ने मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल से लेकर पीएमओ तक मदद की गुहार लगाई। यहां से उसे ये कहकर बैरंग लौटा दिया गया कि कोर्ट का दरवाजा खटखटाए। बता दें कि मामला 16 करोड़ से ज्यादा से ज्यादा की ठगी का है। पीड़ित ने पूरा पैसा जालसाज के खाते में ट्रांसफर किया था, जिसके सभी साक्ष्य वो अधिकारियों के सामने प्रस्तुत कर चुका है।

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Viral Video– Page- https://www.facebook.com/Ganga0666/मेरा नाम गंगा सागर सिंह चौहान है। मैं कंस्ट्रक्शन का काम करता हूं। मुझसे एक बड़े जालसाज मुकेश बहादुर सिंह, जो कि लखनऊ शहर का रहने वाला है, उसने मुझे एक बड़े काम का प्रलोभन देकर कई किस्तों में 17 करोड़ रुपया एक नंबर में ले लिया। जिसका पूरा स्टेटमेंट मेरे पास मौजूद है। अब वो मुझे पैसे देने से साफ इंकार कर रहा है। मेरी पुलिस प्रशासन में कोई सुनवाई नहीं हो रही है। माननीय योगी जी से मेरा निवेदन है कि मुझे इंसाफ दिलाया जाए। मुझे इस आदमी से जान का खतरा है, कृपया मुझे सुरक्षा भी प्रदान की जाए।

Posted by Pardaphash on Friday, 6 September 2019

मामला लखनऊ शहर के रहने वाले बिल्डर और मेसर्स भूमि सागर इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राईवेट लिमिटेड के डायरेक्ट गंगा सागर सिंह चौहान का है। गंगा सागर का कहना है कि उनकी मुलाक़ात लखनऊ के ही रहने वाले मुकेश बहादुर सिंह से करीब तीन साल पहले हुई थी। मुकेश बहादुर ए एंड ए कंपनी के डायरेक्टर हैं। आरोप है कि मुकेश बहादुर ने रायबरेली में एक कोल्ड स्टोरेज बनाने के लिए गंगा सागर को बड़े काम का प्रलोभन दिया और जमीन खरीदने के नाम पर गंगा सागर से कई किश्तों में कंपनी के अकाउंट से पैसे लिए, जिसके ट्रांजेक्सन की पूरी डिटेल उन उनके पास मौजूद है।

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धमकी का आडियो हुआ वायरल, सीएम से लगा रहे मदद की गुहारVideo Source- https://www.facebook.com/Ganga0666/videos/476704483173134/

Posted by Pardaphash on Wednesday, 11 September 2019

गंगा सागर के मुताबिक उन्होने मुकेश बहादुर को 16 करोड़ से ज्यादा रुपये कंपनी के अकाउंट से ट्रांसफर किए और जब उन्होने जमीन दिखाने और अपने नाम करने की बात कही तो मुकेश ने मिलना बंद कर दिया। आरोप है कि जब गंगा सागर ने अपने पैसे वापस मांगने का कई बार प्रयास किए गया तो उन्हे 50 लाख और ढाई करोड़ के चेक दिये गए जो बाउन्स हो गए। अपने साथ जालसाजी का शक होने पर गंगा सागर ने पुलिस से मदद की गुहार लगाई लेकिन वहां पर उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
गंगा सागर का कहना है कि उन्होने इस संबंध में पीएमओ से लेकर मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर कई पत्र अपलोड किए लेकिन पुलिस ने अपनी जांच में मामला कोर्ट का बताते हुए अपना पल्ला झाड लिया। गंगा सागर को इस बीच कई बार जान-माल की धमकी भी दी गयी, जिसके साक्ष्य उनके पास मौजूद हैं। आखिर में गंगा सागर ने सोशल मीडिया का सहारा लेते हुए एक वीडियो अपलोड किया, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगाई गयी, हालांकि अभी तक इस पूरे प्रकरण को ना ही पुलिस ने संज्ञान में लिया है और ना ही सरकार में बैठे किसी राजनेता ने।

ये है मुकेश बहादुर का रसूख

आपको बता दें कि मुकेश बहादुर सिंह ए एंड ए कंपनी के डायरेक्टर के साथ ही पीएचडी चेम्बर ऑफ कॉमर्स का को-चेयरमैन भी है। शहर की पेज थ्री पार्टियां बिना मुकेश बहादुर के अधूरी रहती हैं। सूबे की राजनीति, ब्यूरोक्रेसी और मीडिया में मुकेश बहादुर का खासा दखल है। मुकेश बहादुर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव का भी बेहद करीबी बताया जाता है। यही वजह थी कि अखिलेश यादव ने मुकेश को रायबरेली से विधान परिषद का सपा उम्मीदवार भी बनाया था।
हालांकि चुनाव से ऐन पहले मुलायम सिंह यादव ने उसे पार्टी से निकाल दिया। योगी सरकार में भी मुकेश का दखल इस कदर है कि वह खुलेआम आईएएस, आईपीएस और पीसीएस को जूते की नोक पर रखने की बात कहता है। यूपी सरकार के कई मंत्रियों और बड़े नौकरशाहों के साथ मुकेश अक्सर नजर आता है। सरकार ने बिना किसी खतरे के उसे छह सरकारी गनर मुहैया कराये हैं।

कई चेक हुए बाउंस

गंगा सागर का कहना है कि उन्हे मुकेश बहादुर ने पहला चेक दिनांक 28-0-2018 को 50 लाख का दिया, दूसरा चेक 01-03-2018 को 50 लाख का दिया, तीसरा चेक 28-03-2018 को डेढ़ करोड़ का दिया, चौथा चेक साढ़े साथ करोड़ का दिया। ये सारे चेक बाउन्स हो गए।

लखनऊ। सीएम योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए अपने मंत्रियों और नौकरशाहों पर नकेल कस रहे हैं। लेकिन सीएम की नाक के नीचे ही उनके मंत्री और नौकरशाह हाई प्रोफाइल जालसाजों को पनाह दे रहे हैं। यही कारण है कि एक पीड़ित न्याय के लिए दर बदर की ठोकरें खा रहा और जालसाज खुलेआम आईएएस और आईपीएस को जूते की नोक पर रखने की बात करता है। आलम यह है कि पुलिस पीड़ित की एफआईआर दर्ज करने को भी तैयार नहीं है। भ्रष्टाचार का यह मामला राजधानी लखनऊ का है। यहां खुद को सत्ता शीर्ष और पुलिस मुखिया का करीबी बताने वाले एक जालसाज ने एक बिल्डर को लुभावने सपने दिखाकर करोड़ो रूपए ठग लिए। पीड़ित शख्स मदद के लिए पुलिस, प्रशासन से लेकर सत्ता में बैठे कई बड़े राजनेताओं तक गया, लेकिन कहीं भी उसकी फरियाद नहीं सुनी गई। आखिरकार उसने सोशल मीडिया का सहारा लिया। हांलाकि ये रास्ता भी उसके गले की फांस बन गया। जालसाज को जैसे ही इसकी भनक लगी उसने पीड़ित को करोड़ों रूपए की मानहानि की नोटिस थमा दी। जिसके बाद पीड़ित ने मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल से लेकर पीएमओ तक मदद की गुहार लगाई। यहां से उसे ये कहकर बैरंग लौटा दिया गया कि कोर्ट का दरवाजा खटखटाए। बता दें कि मामला 16 करोड़ से ज्यादा से ज्यादा की ठगी का है। पीड़ित ने पूरा पैसा जालसाज के खाते में ट्रांसफर किया था, जिसके सभी साक्ष्य वो अधिकारियों के सामने प्रस्तुत कर चुका है। https://www.facebook.com/PardaphashNews/videos/681149312400866/ मामला लखनऊ शहर के रहने वाले बिल्डर और मेसर्स भूमि सागर इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राईवेट लिमिटेड के डायरेक्ट गंगा सागर सिंह चौहान का है। गंगा सागर का कहना है कि उनकी मुलाक़ात लखनऊ के ही रहने वाले मुकेश बहादुर सिंह से करीब तीन साल पहले हुई थी। मुकेश बहादुर ए एंड ए कंपनी के डायरेक्टर हैं। आरोप है कि मुकेश बहादुर ने रायबरेली में एक कोल्ड स्टोरेज बनाने के लिए गंगा सागर को बड़े काम का प्रलोभन दिया और जमीन खरीदने के नाम पर गंगा सागर से कई किश्तों में कंपनी के अकाउंट से पैसे लिए, जिसके ट्रांजेक्सन की पूरी डिटेल उन उनके पास मौजूद है। https://www.facebook.com/PardaphashNews/videos/760956557668928/ गंगा सागर के मुताबिक उन्होने मुकेश बहादुर को 16 करोड़ से ज्यादा रुपये कंपनी के अकाउंट से ट्रांसफर किए और जब उन्होने जमीन दिखाने और अपने नाम करने की बात कही तो मुकेश ने मिलना बंद कर दिया। आरोप है कि जब गंगा सागर ने अपने पैसे वापस मांगने का कई बार प्रयास किए गया तो उन्हे 50 लाख और ढाई करोड़ के चेक दिये गए जो बाउन्स हो गए। अपने साथ जालसाजी का शक होने पर गंगा सागर ने पुलिस से मदद की गुहार लगाई लेकिन वहां पर उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। गंगा सागर का कहना है कि उन्होने इस संबंध में पीएमओ से लेकर मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर कई पत्र अपलोड किए लेकिन पुलिस ने अपनी जांच में मामला कोर्ट का बताते हुए अपना पल्ला झाड लिया। गंगा सागर को इस बीच कई बार जान-माल की धमकी भी दी गयी, जिसके साक्ष्य उनके पास मौजूद हैं। आखिर में गंगा सागर ने सोशल मीडिया का सहारा लेते हुए एक वीडियो अपलोड किया, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगाई गयी, हालांकि अभी तक इस पूरे प्रकरण को ना ही पुलिस ने संज्ञान में लिया है और ना ही सरकार में बैठे किसी राजनेता ने।

ये है मुकेश बहादुर का रसूख

आपको बता दें कि मुकेश बहादुर सिंह ए एंड ए कंपनी के डायरेक्टर के साथ ही पीएचडी चेम्बर ऑफ कॉमर्स का को-चेयरमैन भी है। शहर की पेज थ्री पार्टियां बिना मुकेश बहादुर के अधूरी रहती हैं। सूबे की राजनीति, ब्यूरोक्रेसी और मीडिया में मुकेश बहादुर का खासा दखल है। मुकेश बहादुर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव का भी बेहद करीबी बताया जाता है। यही वजह थी कि अखिलेश यादव ने मुकेश को रायबरेली से विधान परिषद का सपा उम्मीदवार भी बनाया था। हालांकि चुनाव से ऐन पहले मुलायम सिंह यादव ने उसे पार्टी से निकाल दिया। योगी सरकार में भी मुकेश का दखल इस कदर है कि वह खुलेआम आईएएस, आईपीएस और पीसीएस को जूते की नोक पर रखने की बात कहता है। यूपी सरकार के कई मंत्रियों और बड़े नौकरशाहों के साथ मुकेश अक्सर नजर आता है। सरकार ने बिना किसी खतरे के उसे छह सरकारी गनर मुहैया कराये हैं।

कई चेक हुए बाउंस

गंगा सागर का कहना है कि उन्हे मुकेश बहादुर ने पहला चेक दिनांक 28-0-2018 को 50 लाख का दिया, दूसरा चेक 01-03-2018 को 50 लाख का दिया, तीसरा चेक 28-03-2018 को डेढ़ करोड़ का दिया, चौथा चेक साढ़े साथ करोड़ का दिया। ये सारे चेक बाउन्स हो गए।