तीसरा मोर्चा बनाने में लगे चन्द्रबाबू ने खोया अपना ही प्रदेश, जगन होंगे अगले मुख्यमंत्री

jagan reddy
तीसरा मोर्चा बनाने में लगे चन्द्रबाबू ने खोया अपना ही प्रदेश, जगन होंगे अगले मुख्यमंत्री

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के नतीजों से पहले पूरे देश में घूम—घूम कर भाजपा विरोधी सभी नेताओं को एकजुट करने में जुटे एन चंद्रबाबू नायडू को उनके अपने ही प्रदेश में करारा झटका मिला है। उनका विधानसभा और लोकसभा दोनों परिणामों में क सूपड़ा साफ हो गया। यहां जगन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस ने प्रचंड जीत हासिल की। अब जगन जल्द ही आंध्रप्रदेश के अगले मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

Jagan Mohan Reddy To Become Next Cm Of Andhra Pradesh :

बताया जा रहा है कि जगन मोहन रेड्डी की जीत का श्रेय उनकी पदयात्रा को जाता है। बता दें कि 2014 में चुनाव शिकस्त मिलने के बाद जगन मोहन ने कडप्पा से श्रीकाकुलम तक पदयात्रा निकाली। इस पदयात्रा से उन्होंने जनसंपर्क बढ़ाया, जिसका फायदा उन्हें चुनाव के नतीजों में मिला। कहा जाता है कि आंध्र प्रदेश के चुनावों में पदयात्रा का बड़ा महत्व होता है। इसे यहां की सत्ता की चाबी भी माना जा सकता है।

कांग्रेस लगातार दो कार्यकाल- 1994 से 1999 तक आंध्र प्रदेश में विपक्ष में रही थी। वह 1994 में हार के बाद से विपक्ष में बैठना पड़ा था। तब दिवगंत नेता पी जर्नादन रेड्डी (पीजेआर) विपक्ष के नेता थे और राजशेखर रेड्डी कडप्पा सीट से लोकसभा सांसद थे। 1999 में ऐसी उम्मीद थी कि नेता प्रतिपक्ष के रूप में जनार्दन रेड्डी ने जो काम किया है उसके बलबूते कांग्रेस यहां से जीत रही है। यहां तक कि मुख्यमंत्री पद की लॉबी करने के लिए पीजेआर दिल्ली गए थे लेकिन कांग्रेस यह चुनाव हार गई और राजशेखर रेड्डी फिर से नेता प्रतिपक्ष बने।

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के नतीजों से पहले पूरे देश में घूम—घूम कर भाजपा विरोधी सभी नेताओं को एकजुट करने में जुटे एन चंद्रबाबू नायडू को उनके अपने ही प्रदेश में करारा झटका मिला है। उनका विधानसभा और लोकसभा दोनों परिणामों में क सूपड़ा साफ हो गया। यहां जगन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस ने प्रचंड जीत हासिल की। अब जगन जल्द ही आंध्रप्रदेश के अगले मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। बताया जा रहा है कि जगन मोहन रेड्डी की जीत का श्रेय उनकी पदयात्रा को जाता है। बता दें कि 2014 में चुनाव शिकस्त मिलने के बाद जगन मोहन ने कडप्पा से श्रीकाकुलम तक पदयात्रा निकाली। इस पदयात्रा से उन्होंने जनसंपर्क बढ़ाया, जिसका फायदा उन्हें चुनाव के नतीजों में मिला। कहा जाता है कि आंध्र प्रदेश के चुनावों में पदयात्रा का बड़ा महत्व होता है। इसे यहां की सत्ता की चाबी भी माना जा सकता है। कांग्रेस लगातार दो कार्यकाल- 1994 से 1999 तक आंध्र प्रदेश में विपक्ष में रही थी। वह 1994 में हार के बाद से विपक्ष में बैठना पड़ा था। तब दिवगंत नेता पी जर्नादन रेड्डी (पीजेआर) विपक्ष के नेता थे और राजशेखर रेड्डी कडप्पा सीट से लोकसभा सांसद थे। 1999 में ऐसी उम्मीद थी कि नेता प्रतिपक्ष के रूप में जनार्दन रेड्डी ने जो काम किया है उसके बलबूते कांग्रेस यहां से जीत रही है। यहां तक कि मुख्यमंत्री पद की लॉबी करने के लिए पीजेआर दिल्ली गए थे लेकिन कांग्रेस यह चुनाव हार गई और राजशेखर रेड्डी फिर से नेता प्रतिपक्ष बने।