जैन मुनि तरुण सागर महाराज का निधन, आज 3 बजे होगा अंतिम संस्कार

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जैन मुनि तरुण सागर महाराज का निधन, आज 3 बजे होगा अंतिम संस्कार

नई दिल्ली। प्रसिद्ध जैन मुनि तरुण सागर का आज तड़के निधन हो गया है। दरअसल, 51 वर्षीय तरुण पिछले 20 दिनों से पीलिया की समस्या से परेशान थी जिसके कारण वह बहुत कमजोर हो गए थे। मैक्स अस्पताल की ओर से पहले ही बता दिया गया था कि उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हो रहा है। उनके प्रवास स्थल पर उनके दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु जुटने लगे हैं।

Jain Muni Tarun Sagar Passed Away :

मिली जानकारी के मुताबिक आज दोपहर 3 बजे दिल्ली मेरठ हाइवे पर स्थित तरुणसागरम तीर्थ में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। यात्रा सुबह 7 बजे राधेपुरी दिल्ली से प्रारंभ होकर 28 किलोमीटर दूर तरुणसागरम पर पहुंचेगी। बीते कुछ समय से उनकी हालत गंभीर बताई जा रही थी और उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया था। अलग अलग जगहों पर उनके स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रार्थनाएं की जा रही थीं।

उनके कमरे में जैन मुनियों और शिष्यों ही जाने की थी इजाजत

जिस कमरे में उन्हें रखा गया था, वहां पर सिर्फ जैन मुनियों और शिष्यों को ही जाने की इजाजत थी। इसके अलावा किसी को भी अंदर आने की इजाजत नहीं थी। बता दे कि जैन मुनि तरुण सागर का जन्म मध्य प्रदेश के दमोह में 26 जून, 1967 को हुआ था। उनकी मां का नाम शांतिबाई और पिता का नाम प्रताप चंद्र था। तरुण सागर ने आठ मार्च, 1981 को घर छोड़ दिया था और छत्तीसगढ़ में जाकर दीक्षा ली।

नई दिल्ली। प्रसिद्ध जैन मुनि तरुण सागर का आज तड़के निधन हो गया है। दरअसल, 51 वर्षीय तरुण पिछले 20 दिनों से पीलिया की समस्या से परेशान थी जिसके कारण वह बहुत कमजोर हो गए थे। मैक्स अस्पताल की ओर से पहले ही बता दिया गया था कि उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हो रहा है। उनके प्रवास स्थल पर उनके दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु जुटने लगे हैं। मिली जानकारी के मुताबिक आज दोपहर 3 बजे दिल्ली मेरठ हाइवे पर स्थित तरुणसागरम तीर्थ में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। यात्रा सुबह 7 बजे राधेपुरी दिल्ली से प्रारंभ होकर 28 किलोमीटर दूर तरुणसागरम पर पहुंचेगी। बीते कुछ समय से उनकी हालत गंभीर बताई जा रही थी और उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया था। अलग अलग जगहों पर उनके स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रार्थनाएं की जा रही थीं। उनके कमरे में जैन मुनियों और शिष्यों ही जाने की थी इजाजत जिस कमरे में उन्हें रखा गया था, वहां पर सिर्फ जैन मुनियों और शिष्यों को ही जाने की इजाजत थी। इसके अलावा किसी को भी अंदर आने की इजाजत नहीं थी। बता दे कि जैन मुनि तरुण सागर का जन्म मध्य प्रदेश के दमोह में 26 जून, 1967 को हुआ था। उनकी मां का नाम शांतिबाई और पिता का नाम प्रताप चंद्र था। तरुण सागर ने आठ मार्च, 1981 को घर छोड़ दिया था और छत्तीसगढ़ में जाकर दीक्षा ली।