जल निगम भर्ती घोटाले में एक बार फिर सामने आया C&DS के निदेशक और पूर्व MD का नाम

लखनऊ। प्रदेश में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अखिलेश सरकार के दौरान यूपी जल निगम में हुई 1300 पदों की भर्ती प्रक्रिया सभी कायदे कानून ताक पर रख कर की गयी। विशेष जांच प्रकोष्ठ (एसआईटी) की प्राथमिक जांच में इस बात का खुलासा हुआ है । इस मामले में उन अफसरों के नाम सामने आए हैं जो इस समय बड़े महत्वपूर्ण पदों पर बैठे हैं। एसआईटी ने जिन अफसरों से पूछताछ की है उनमें जल निगम के तत्कालीन एमडी पीके आशुदानी व वर्तमान में सीएनडीएस(CNDS) के निदेशक राजीव निगम का भी नाम शामिल है।

यूपी जल निगम की निर्माण इकाई सीएंडडीएस निदेशक राजीव निगम एक ऐसे सीनियर इंजीनियर हैं जिन्होंने पिछले कई सालों से फील्ड का काम नहीं देखा है। जिसकी मुख्य वजह उनके ऊपर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। सूत्रों की माने तो राजीव निगम ने महोबा कलेक्ट्रेट के निर्माण में बड़े स्तर पर घोटालेबाजी को संरक्षण दिया था। जिसकी जांच के बाद महोबा जिले के तत्कालीन जिलाधिकारी ने राजीव निगम को भ्रष्टाचार का दोषी पाते हुए, शासन को शिकायत भेजी थी।

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उस शिकायत के बाद से राजीव निगम को सीएंडडीएस से हटाकर जल निगम मुख्यालय में तैनात कर दिया गया था। जहां वह लंबे समय से विभाग की सप्लाई यूनिट के इंचार्ज थे। बताया तो यह भी जाता है कि उन्होंने मुख्यालय में तैनाती के दौरान भी जमकर माल बनाया है। उनकी इसी योग्यता को देखते हुए जल निगम के प्रबंध निदेशक और सीएंडडीएस कार्यवाहक निदेशक राजेश मित्तल ने उनका राजीव निगम का नाम सीएंडडीएस के निदेशक पद दावेदारों की लिस्ट में डाल दिया था।

पूर्व मंत्री आजम खान के जमाने में हुई थी धांधली

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उस समय सरकार के कद्दावर मंत्री मोहम्मद आजम खां नगर विकास मंत्री होने के साथ ही जल निगम के अध्यक्ष पद पर भी काबिज थे। इसके बावजूद इन पदों पर भर्ती में व्यापक पैमाने पर धांधली होने की शिकायत हुई थी। कुछ अभ्यर्थियों ने इस संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर निगम के ही अधीक्षण अभियंता स्तर के एक अधिकारी से जांच कराई गई थी, जिसमें भर्ती प्रक्रिया में धाधंली की पुष्टि हुई थी। इसकेबाद नई सरकार ने भी इस मामले की जांच एसआईटी को सौंप दी थी।

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